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जेएनयू छात्रसंघ चुनाव: वामपंथी एकता से दोध्रुवीय हुआ टकराव

प्रणेता झा | Updated on: 4 September 2016, 8:23 IST
(कैच)
QUICK PILL
  • जेएनयू में दक्षिणपंथियों का प्रभाव देखते हुए वाम संगठन पहली बार एक-दूसरे के खिलाफ न लड़कर एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं. परम्परागत रूप से जेएनयू का छात्रसंघ चुनाव वाम संगठनों के अधिक नजदीक रहा है.
  • जेएनयू छात्रसंघ का पिछला कार्यकाल काफी मुश्किलों भरा रहा है. कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगने की घटना हुई, जिसमें तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत तीन छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में छात्रसंघ चुनाव की रणभेरी बज चुकी है. नौ सितंबर के चुनाव है.

आरएसएस और भाजपा से जुड़े संगठन विद्यार्थी परिषद के सामने परिसर में हाल के विवादों को लेकर सबसे बड़ी चुनौती खुद को साबित करने की है तो वामपंथी छात्र संगठन एकजुट होकर मैदान में हैं. हालांकि वामपंथी छात्र संगठन कामयाब होने के लिए आंतरिक मतभेदों से उबर नहीं पा रहे हैं.

विद्यार्थी परिषद के सामने सबसे बड़ी चुनौती वामदलों के छात्र संगठनों की एकजुटता से है. इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि विद्यार्थी परिषद गत नौ फरवरी को जेएनयू में हुई घटना को राष्‍ट्रवाद से जोड़ते हुए मुद्दा बनाएगी तो जेएनयू में 28 वर्षीय पीएचडी छात्रा से दुष्‍कर्म मामले को भी उठाया जाएगा. आरोपी को आईसा का एक्टिविस्ट बताया जा रहा है.

कैम्पस में सीपीआई (एमएल) लिबरेशन की छात्र इकाई ऑल इंडिया स्टूडेन्ट एसोसिएशन (एआईएसए) सबसे बड़ा छात्र संगठन है.

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उसने सीपीएम समर्थित स्टूडेन्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से सेन्ट्रल पैनल पर गठजोड़ किया है ताकि नौ फरवरी के विवादित कार्यक्रम के बाद वामपंथ के नाम पर वोट मिल सकें.

इस घटना के बाद वाम छात्र संगठन की पहचान राष्ट्रविरोधी भावनाएं भड़काने वाले समूह के बन रही थी.

हालांकि, सीपीआई समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेन्ट्स फेडरेशन (एआईएसएफ), जिससे जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार भी जुड़े हुए थे, आधिकारिक रूप से इस वाम एकजुटता का हिस्सा नहीं है. यह संगठन केवल बाहर से समर्थन दे रहा है.

विद्यार्थी परिषद ने बहस में शोध छात्रा के साथ हुए दुष्कर्म की घटना के जरिए जेंडर जस्टिस को मुद्दा बनाया है

वामदलों ने ऑल इंडिया स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (एआईएसए) के मोहित कुमार पांडे को अध्यक्ष पद के लिए खड़ा किया है तो विद्यार्थी परिषद की ओर से शोध छात्रा के साथ दुष्कर्म की घटना के चलते एक महिला प्रत्याशी जान्हवी ओझा को खड़ा कर जेंडर जस्टिस का कार्ड खेलने की कोशिश की गई है.

ओझा का कहना है कि लेफ्ट फ्रंट जेएनयू के छात्रों के साथ नहीं, बल्कि दुष्कर्मियों के साथ खड़ा है.

रतन को एआईएसए से निकाल दिया गया था लेकिन गुरुवार को अध्यक्ष पद के सभी प्रत्याशियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों ने आईसा को बलात्कारी के खिलाफ समुचित प्रदर्शन न करने का दोषी ठहराया.

विद्यार्थी परिषद ने यह जानकारी दी कि इसके पहले जनरल बॉडी की हुई बैठक में सभी संगठनों से प्रेस कॉन्फ्रेस में बलात्कार का मुद्दा न उठाने के लिए कहा गया था.

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ओझा और उनके प्रवक्ता सौरभ शर्मा (पूर्व संयुक्त सचिव और 14 सालों में छात्रसंघ के लिए चुने जाने वाले विद्यार्थी परिषद के पहले कार्यकर्ता) ने अपने दस मिनट के भाषण में चीन और नक्सलियों का संदर्भ देते हुए राष्ट्रवाद की जरूरत पर विचार व्यक्त किए.

नौ फरवरी की घटना और बलात्कार मामले का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि गलत कारणों के चलते हाल में ही जेएनयू चर्चा में आ गया है. शर्मा देश विरोधी नारे लगाने मामले के मुख्य शिकायकर्ता थे. प्रेस से मुखातिब होने से पहले एक अलग बातचीत में शर्मा ने कहा कि विद्यार्थी परिषद तो पहले ही चुनाव जीत चुका है.

परिसर में दक्षिण पंथियों का प्रभाव देखते हुए वाम संगठन पहली बार एक-दूसरे के खिलाफ न लड़कर एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं. परम्परागत रूप से जेएनयू का छात्रसंघ चुनाव वाम संगठनों के अधिक नजदीक रहा है.

दलित छात्र रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या भी इस बार जेएनयू के चुनावों में बड़ा मुद्दा बनकर सामने आ रहा है

मोहित कुमार पांडे, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष और अपने प्रवक्ता शेहला राशिद के साथ आए थे, ने विश्वविद्यालयों के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष प्रकृति पर अपनी बात रखी. उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, हैदराबाद सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की अंशांति मुद्दे को उकेरा. पांडे ने दलित छात्र रोहित वेमुला की संस्थागत हत्या पर भी अपने विचार रखे.

अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे अन्य प्रत्याशियों में योगेन्द्र यादव समर्थित स्टूडेन्ट्स फॉर स्वराज (एसएफएस) के दिलीप कुमार, एनएसयूआई के सन्नी धीमान, बिरसा अम्बेडकर फुले स्टूडेन्ट्स एसोसिएशन (बीएपीएसए) के सोनपिम्पल राहुल पूर्णम भी हैं.

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बीएपीएसए के पूर्णम ने अपने प्रभावशाली भाषण में सामाजिक भेदभाव और असमानता का जिक्र किया. उनके साथ ही दो अन्य प्रत्याशियों ने भी दक्षिण और वाम पर जमकर हमला बोला.

जेएनयू छात्रसंघ का पिछला छह माह का कार्यकाल काफी मुश्किलों भरा रहा है. देश विरोधी नारे लगने की घटना हुई, जिसके चलते लगभग 70 छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज दर्ज हुई, तत्कालीन जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार समेत तीन छात्रों की गिरफ्तारी हुई. कुमार नौ फरवरी को देशविरोधी नारे लगाने के आरोपी लोगों में शामिल थे.

विश्वविद्यालय द्वारा गठित जांच समिति ने विश्वविद्यालय के मानकों का उल्लंघन करने के सिलसिले में 21 में से आईसा के जेएनयू छात्र संघ के महासचिव राम नागा समेत 16 छात्रों को दोषी पाया था, इन्हें मतदान करने से वंचित कर दिया गया है.

First published: 4 September 2016, 8:23 IST
 
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