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मोदी सरकार: तीन तलाक़ ख़त्म होने पर नया क़ानून बनेगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 May 2017, 16:56 IST

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने 5 सदस्यीय संविधान पीठ से कहा, "अगर अदालत तुरंत तलाक (तीन तलाक) के तरीके को खारिज कर देती है, तो केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच शादी और तलाक से जुड़ा एक नया कानून लाएगी."

अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने यह बात तब कही, जब सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा कि अगर इस तरह के तरीके खारिज कर दिए जाएं, तो शादी से निकलने के लिए किसी मुस्लिम मर्द के पास क्या तरीका होगा?  इस पर रोहतगी ने कोर्ट से कहा, "अगर कोर्ट तीन तलाक को अमान्‍य और असंवैधानिक करार देता है, तो केंद्र सरकार मुसलमानों में शादी और तलाक से जुड़ा नया क़ानून लेकर आएगा."

बहुविवाह-निकाह हलाला की होगी समीक्षा

इससे पहले सोमवार को तीन तलाक के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो तीन तलाक के साथ-साथ बहुविवाह और निकाह हलाला की भी समीक्षा करेगा, लेकिन कोर्ट अभी तीन तलाक पर ही अपनी सुनवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट में  तीन तलाक पर पांच जजों की संवैधानिक पीठ सुनवाई कर रही है. सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मुस्लिमों में होने वाले बहुविवाह और निकाह हलाला की भी समीक्षा होगी. सरकार की तरफ से पेश मुकुल रोहतगी ने कोर्ट से इसकी मांग की थी. 

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि अभी तीनों मामलों पर सुनवाई करने के लिए समय काफी कम है. कोर्ट में हम अभी सिर्फ ट्रिपल तलाक पर ही सुनवाई करेंगे. इससे पहले पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि बहुविवाह की समीक्षा नहीं होगी. 

'मुस्लिम महिलाओं के हक का हनन तो नहीं'

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि हम सिर्फ ये समीक्षा करेंगे कि तलाक-ए-बिद्दत यानी एक बार में तीन तलाक और निकाह हलाला इस्लाम धर्म का अभिन्न अंग है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट  की संवैधानिक पीठ इस मुद्दे को इस नजर से भी देख रही है कि क्या तीन तलाक से मुस्लिम महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का हनन हो रहा है या नहीं.

सीनियर वकील राम जेठमलानी भी तीन तलाक की एक पीड़िता की ओर से पेश हुए. उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है.  

'तीन तलाक शादी तोड़ने का सबसे खराब तरीका'

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था, "तीन तलाक मुस्लिमों में शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है." प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था, "ऐसे भी संगठन हैं, जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है."

संविधान पीठ ने ये टिप्पणी उस वक्त की, जब पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह ऐसा मसला नहीं है, जिसकी न्यायिक जांच की जरूरत हो. वैसे भी महिलाओं को निकाहनामा में ही इस बारे में शर्त लिखवाकर तीन तलाक को ‘नहीं' कहने का अधिकार है.

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में पहले से तय समय के मुताबिक सुनवाई 19 मई तक जारी रहेगी. संविधान पीठ में जस्‍ट‍िस कुरियन जोसफ, जस्‍ट‍िस आरएफ नरीमन, जस्‍ट‍िस यूयू ललित और जस्‍ट‍िस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. जबकि चीफ जस्टिस जेएस खेहर बेंच की अध्यक्षता कर रहे हैं.

First published: 15 May 2017, 16:56 IST
 
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