Home » इंडिया » Age Doesn't Matter
 

उम्र तो बस एक संख्या है! पुणे की 93 वर्षीय आजी बनीं सरपंच

अश्विन अघोर | Updated on: 10 September 2016, 7:57 IST
QUICK PILL
  • 93 वर्ष की वयोवृद्ध गंगूबाई भामबुरे धोरे भामबुरवाड़ी ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई हैं. वे पिछले 15 सालों में गांव की पहली महिला सरपंच हैं. 
  • गंगूबाई ने 6 सितंबर को ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा था और 7 सितंबर को परिणाम घोषित किए गए थे. पूरे गांव की मुंहबोली ‘आजी’ (दादी), गंगूबाई अपनी उदारता और सदाशयता के कारण धोरे भामबुरवाड़ी के 2000 वासियों की चहेती बनी हुई हैं. 

पुणे जिले के खेड़ तालुक स्थित धोरे भाम बुरवाड़ी गांव के भामबुरे परिवार में इन दिनों दिवाली का सा माहौल बना हुआ है. पूरा परिवार और गांव जश्न मना रहा है, जो आने वाले कई दिनों तक जारी रह सकता है. इस निराले जश्न को मनाने की वजह भी निराली है.

दरअसल परिवार ने देश को अब तक का सबसे अधिक उम्र का सरपंच दिया है. 93 वर्ष की वयोवृद्ध गंगूबाई भामबुरे धोरे भामबुरवाड़ी ग्राम पंचायत की सरपंच चुनी गई हैं. 

वे पिछले 15 सालों में गांव की पहली महिला सरपंच हैं. गंगूबाई ने 6 सितंबर को ग्राम पंचायत का चुनाव लड़ा था और 7 सितंबर को परिणाम घोषित किए गए थे. पूरे गांव की मुंहबोली ‘आजी’ (दादी), गंगूबाई अपनी उदारता और सदाशयता के कारण धोरे भामबुरवाड़ी के 2000 वासियों की चहेती बनी हुई हैं. लोग उनका बेहद सम्मान करते हैं.

और ये केवल गंगूबाई ही नहीं हैं, जिन्होंने परिवार में चुनाव जीता है. उनके पोते भरत ने भी चुनाव लड़ा था और वे भी जीते, वे अपनी आजी के साथ धोरे भामबुरवाड़ी ग्राम पंचायत संभालेंगे. भरत ने बताया, ‘सरपंच का पद महिलाओं के लिए आरक्षित था. चूंकि और कोई उपयुक्त उम्मीदवार नहीं था, गांव के लोगों ने मेरी आजी पर चुनाव लड़ने के लिए जोर डाला. यह पहली बार हुआ, जब मेरी आजी किसी चुनाव में खड़ी हुईं और जीतीं भी.’

गांव को चुनाव के लिए तीन वार्ड में बांटा गया था. प्रत्येक वार्ड से एक सदस्य यानि कुल तीन सदस्य चुने जाने थे. भरत और गंगूबाई ने एक ही वार्ड से चुनाव लड़ा. गांव के इतिहास में यह पहली बार हुआ जब दादी-पोते ने एक ही वार्ड का प्रतिनिधित्व किया. गंगूबाई को 318 वोट और उनकी प्रत्यक्ष प्रतिद्वंद्वी सुनीता भामबुरे को 294 वोट मिले, और भरत को 335.

भरत ने कहा, ‘हमारे लिए यह जीत दीवाली से कम नहीं है. परिवार में सभी जश्न के मूड में है. हमारे घर के पास लोगों की भीड़ लगी हुई है और वे दादी को बधाई दे रहे हैं और जीत का जश्न मना रहे हैं. गांव वालों ने जीत की खुशी में सुबह जुलूस भी निकाला.’

निरक्षर होने के बावजूद गंगूबाई जानती हैं कि किस तरह गांव का प्रबंधन करना है. वे कहती हैं, ‘मैं गांव और गांव में रहने वाले हर व्यक्ति को नाम से जानती हूं. मुझे लोगों की समस्याओं की जानकारी है. अपनी जिम्मेदारी निभाने में मेरी उम्र बाधक नहीं होगी.’ जब पास के गांव के लोगों को उनकी जीत की जानकारी मिली, वे गंगूबाई से मिलने उमड़ पड़े.

सबसे बुजुर्ग

93 की उम्र के बावजूद गंगूबाई स्वस्थ हैं और रोजाना एक बार जरूर बिना किसी की मदद या लकड़ी के पूरे गांव की सैर करती हैं. चूंकि परिणाम आ गया है, इसलिए फिलहाल वे अपने घर पर लोगों का स्वागत करने में व्यस्त हैं.

कैच के साथ फोन पर बात करते हुए गंगूबाई ने कहा, ‘मैंने गांव के लोगों से अनुरोध किया है कि वे मेरी उम्र पर ना जाएं और गांव के विकास के लिए मिलकर आगे आएं. मैं समस्याओं के समाधान में कोई कसर नहीं छोड़ूंगी. हालांकि मुझे कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है, मैं कार्यों को सीख लूंगी और गांव में वांछित परिवर्तन लाऊंगी.’

बड़ी विनम्रता के साथ गंगूबाई मानती हैं कि उन्हें उस समय हैरानी हुई जब भरत ने उनसे चुनाव लड़ने को कहा. संकोची स्वभाव की गंगूबाई 93 की उम्र में चुनाव लड़ने को इच्छुक नहीं थीं, पर भरत के आग्रह पर उन्होंने अपना मन बदला.

93 की उम्र के बावजूद गंगूबाई स्वस्थ हैं और रोजाना एक बार बिना किसी की मदद के पूरे गांव की सैर करती हैं.

वे कहती हैं, ‘भरत ने मुझे चुनाव लड़ने को राजी किया और मैंने इसके लिए एक कोशिश करना तय किया. मैं जीत को लेकर निश्चित नहीं थी, पर कैम्पेन के दौरान अपना सौ फीसदी दिया और परिणाम सबके सामने है.’

जीत की खुशी में पूरे धोरे भामबुरवाड़ी गांव को फूलों और गंगूबाई की होर्डिंग से सजाया गया है. होर्डिंग में गंगूबाई ने गुलाबी साड़ी और मराठा पगड़ी पहनी है, और अपनी अंगुलियों से ‘वी’ बनाकर अपनी जीत को जता रही हैं. गांव वालों के लिए यह खास दिन है क्योंकि उनकी आजी अब सरपंच भी हैं.

गंगूबाई कहती हैं, ‘पहले लोग मेरे पास खेती से लेकर पारिवारिक विवादों तक से जुड़े विभिन्न मुद्दे लेकर सलाह के लिए आते थे. पर अब स्थिति बदल गई है. मुझे पूरे गांव को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी मिली है. मैं उन्हें निराश नहीं करूंगी.’

First published: 10 September 2016, 7:57 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी