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बेजवाड़ा विल्सन: जो 50 लोग मरे हैं, सरकार उनसे संसद में माफी मांगे

सुहास मुंशी | Updated on: 22 November 2016, 7:39 IST
(विकास कुमार)
QUICK PILL
  • कुछ महीना पहले रोमन मैग्सेसे पुरस्कार से नवाज़े गए नागरिक अधिकार कार्यकर्ता बेजवाड़ा विल्सन ने नोटबंदी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा पर सवाल उठाए हैं. 
  • उन्होंने कहा कि नोटबंदी के फ़ैसले से साफ़ है कि यह अमीर बनाम ग़रीब के बीच का संघर्ष है. अमीरों को इस फैसले से कोई खास दिक्कत नहीं हो रही है. 

कैच न्यूज के साथ इस पूरे इंटरव्यू के दौरान मैग्सेसे पुरस्कार विजेता सामाजिक कार्यकर्ता बेजवाड़ा विल्सन बीजेपी से कुछ सवाल पूछते नज़र आए. इन सवालों में काफी तल्खी और नाराजगी झलकी. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी के प्रति बिल्कुल सीधी सटीक प्रतिक्रिया है.

विल्सन ने नोटबंदी को गरीब विरोधी बतया. उन्होंने कहा, कैशलेस लेन-देन या अर्थव्यवस्था का मतलब है, एक ऐसी दुनिया जहां सिर्फ अमीर रहते हैं क्योंकि भारत में एक बड़ा वर्ग ऐसा है, जिसकी पहुंच इंटरनेट बैकिंग तो छोड़िए, साधारण बैंकिंग सुविधाओं तक भी नहीं है.

विल्सन ने कहा, यह नीति वापस ही लेनी होगी. मोदी सरकार को देश की जनता के गुस्से का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा, जो इस फैसले से बुरी तरह नाराज़ है. 

साक्षात्कार

सरकार इस कदम से कालेधन और इससे जुड़े धंधों पर रोक लगाना चाहती है. आपकी शिक़ायत क्या है?

सबसे बड़ी बात यह गरीब विरोधी है. यह फैसला कालेधन पर लगाम कसने में कारगर साबित नहीं होगा. प्रधानमंत्री ख़ुद इस बात से बखूबी वाकिफ हैं और जनता भी. मोदी के पास ऐसे 2,000 लोगों की लिस्ट है, जिनकी सकल सम्पत्ति 1.5 खरब डॉलर से ज़्यादा है. वे उन्हें क्यों नहीं पकड़ते? 

अगर वे उन्हें पकड़ना चाहते हैं, जिनके पास कालाधन है और कर चोरी करते हैं, तो उन्हें पकड़ें. देश के 120 करोड़ लोगों को परेशानी में डालने की बजाय उन पर सर्जिकल स्ट्राइक क्यों नहीं करते.

सरकार को गरीबों को और तकलीफ देने का कोई अधिकार नहीं है.

रोज़मर्रा की हज़ारों परेशानियों से दो-चार होते गरीबों की तकलीफें सुलझाने की बजाय सरकार ने उन्हें और मुसीबतों के बोझ तले दबा दिया है. सरकार के इस कदम ने वाकई गरीब की तकलीफें बढ़ी ही हैं. बिना किसी नोटिस के 500 और 1000 रूपए के नोट बंद करने जैसा तर्कहीन और भयावह कदम उठाने के पीछे मोदी का एजेंडा साफ ज़ाहिर है.

यह एजेंडा क्या है?

हर किसी को 'प्लास्टिक इकॉनॉमी' के लिए प्रोत्साहित करने के इस कदम का नतीजा होगा लोगों के एक काफी बड़े वर्ग को ऑनलाइन ट्रांज़ैक्शन पर ले आना. हम अब कैशलेस इकोनॉमी की ऐसी दुनिया में दाख़िल हो रहे हैं, जहां छोटे कारोबारी, सब्जी वाले, मज़दूर, किसान और सफाई कर्मचारी नहीं रहते. यह दुनिया सिर्फ अमीरों की है. इस दुनिया में हर कोई अपना कार्ड स्वाइप करता है और पेटीएम करता है. मुझे कल तक पेटीएम के बारे में कुछ पता नहीं था.

जो इस नई दुनिया के कायदों को नहीं मानते उन्हें सजा दी जा रही है. नतीजा यह होगा कि अमीर तो और अमीर हो जाएंगे लेकिन गरीब को पूरे वित्तीय तंत्र से बाहर रखकर गरीब होने की सजा दी जा रही है. आपको याद होगा 1990 के सुधारों के बाद अरबपतियों की सूची जारी की गई थी. इस फैसले के बाद बड़े पैमाने पर ऐसा हो सकता है कि फिर से नए अरबपतियों की सूची जारी हो. बिल गेट्स जैसे अमीरों ने भारत सरकार के नोटबंदी कार्यक्रम की सराहना की है.

बिल गेट्स जैसे अमीर क्या जानें कि दिहाड़ी पर जीने वाले मजदूर रोजाना किस तरह की तकलीफ भरी जिंदगी जीते हैं?

आपकी राय में सरकार को क्या करना चाहिए?

यह कदम सरकार को वापस लेना चाहिए. सरकार को गरीब को और मुसीबतों में डालने का कोई अधिकार नहीं है. सरकारी नीतियों का खामियाजा जनता क्यों भुगते? इस सारी उठा पटक में 50 से ज़्यादा लोग जान गंवा चुके हैं. सरकार को उनसे माफी मांगनी चाहिए.

50 लोगों की मौत कोई मज़ाक की बात नहीं है. सरकार के इस कदम से पिछले 11 दिनों में मारे गए लोगों के प्रति संसद में श्रद्धांजलि अर्पित की जानी चाहिए. साथ ही बिना कोई समय गंवाए सार्वजनिक स्तर पर माफी मांगनी चाहिए.

इस सबके अलावा सरकार ने गरीबों के अधिकारों पर हमला किया है. दिहाड़ी मजदूर बैंकों के बाहर रोज़ लाइन में खड़े रहकर दिन गुजार रहे हैं. किसी मजदूर को अपनी मजदूरी और दिहाड़ी भुलाकर उसके अपने ही पैसे निकालने के लिए बैंकों की लाइन में खड़ा करना कहां तक ठीक है? क्या सरकार को भारत के श्रम कानून की बिल्कुल जानकारी नहीं है? आपने किसी बड़े उद्योगपति को बैंक की इन कतारों में लगा नहीं देखा होगा. केवल वेतनभोगी और दिहाड़ी मजदूर ही इन लाइनों में लगे दिखाई देंगे.

आपको क्या लगता है लोग इसके प्रति तुरंत क्या प्रतिक्रिया देंगे? 

जनता में सरकार के इस फैसले के प्रति भीतर तक गुस्सा भर गया है और सरकार को जल्दी ही इसका स्वाद चखने को मिल जाएगा.

First published: 22 November 2016, 7:39 IST
 
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