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अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला: पूर्व रक्षा मंत्री एंटनी के दावे को जेटली ने नकारा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 April 2016, 18:41 IST

अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे पर पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी के दावे को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को नकार दिया है.

एंटनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्हें अगस्ता वेस्टलैंड पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाकर उसे अपने 'मेक इन इंडिया' कैंपेन में भागीदारी की अनुमति दी. जबकि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इसका विरोध किया था.

एंटनी के बयान पर जेटली ने कहा, 'यह थ्योरी कि इस कंपनी को यूपीए के शासनकाल के दौरान कालीसूची में डाला गया था और एनडीए सरकार ने इसे हटा दिया, यह सिर्फ कल्पना है.'

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कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने प्रतिबंधित कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड को भारत में वेंडर या सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में मेक इन इंडिया में शामिल किए जाने में मोदी सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया था.

एंटनी ने दावा किया है कि नरेंद्र मोदी और तत्कालीन रक्षामंत्री ने एटार्नी जनरल से मशविरा करके 22 अगस्त, 2014 को इस बाबत आदेश पारित किया. जिसके तहत फिनमेकैनिका (अगस्ता वेस्टलैंड की मदर कंपनी) और उसकी सब्सिडरी कंपनियों को भारत में संयुक्त उपक्रम खोलने की अनुमति दी गई.

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जिसके बाद भारतीय कंपनी टाटा और अगस्ता वेस्टलैंड के संयुक्त उपक्रम रोटोक्राफ्ट को फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड ने भारत में निवेश की इजाजत दी.

एंटनी ने कहा, 'भारतीय प्रधानमंत्री ने एक प्रतिबंधित कंपनी को भारत में निवेश की इजाजत क्यों दी? हम उनकी गलती और कंपनी के साथ गठजोड़ को उजागर करेंगे. देश को आने वाले दिनों में सरकार और इस कंपनी की सांठगांठ का पता चल जाएगा.'

अरुण जेटली पूर्व में रक्षा मंत्री भी रहे हैं. उन्होंने एंटनी के बयान को चुनौती दी है. इससे पहले रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा था कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने कंपनी को कब ब्लैक लिस्ट किया इस बारे में उसे बताना चाहिए.

First published: 30 April 2016, 18:41 IST
 
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