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Air Quality Index: बेहद खराब हुई दिल्ली-एनसीआर की हवा, नोएडा और गाजियाबाद भी रेड जोन में शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 October 2020, 7:55 IST

Air quality of Delhi NCR: राजधानी दिल्ली (Delhi) की हवा (Air) लगातार जहरीली होती जा रही है. इसके साथ ही दिल्ली के आसपास (Delhi NCR) के शहर भी प्रदूषण (Pollution) की मार झेल रहे हैं. हालांकि, गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) में हवा को साफ रखने के लिए ग्रेप (ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान) लागू किया गया लेकिन दिल्ली समेत एनसीआर के सभी शहरों का वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index) 300 से ऊपर चला गया. गुरुवार को ग्रेटर नोएडा देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर रहा. यहां वायु गुणवत्ता स्तर 357 दर्ज  किया गया, जो दिन में एक समय 400 पहुंच गया.

इसके अलावा मेरठ (Meerut) का एक्यूआई 359 के साथ ये तीसरे नंबर पर रहा. वहीं 335 एक्यूआई के साथ फरीदाबाद (Faridabad) चौथे और 332 एक्यूआई के साथ मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर रहा. सीपीसीबी के मुताबिक स्थानीय प्रदूषकों के अलावा पराली के धुएं से दिल्ली की हवा बेहद खराब स्तर पर पहुंच गई है. राजधानी दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक 312 दर्ज किया गया. बता दें कि इस सीजन में पहली बार प्रदूषकों में छह फीसदी हिस्सा पराली के धुएं का रहा है. इसके साथ ही सफर का आकलन है कि दिल्ली-एनसीआर का तापमान गिरने के साथ सतह पर चलने वाली हवा स्थिर है.


गुरुवार को दिल्ली पहुंचने वाली हवा की दिशा पछुआ रही. इससे पराली के धुएं का हिस्सा भी दिल्ली-एनसीआर में बढ़ गया है. अब ऐसा माना जा रहा है कि अगले दो दिनों तक हवा की गुणवत्ता में सुधार होने के आसार नहीं हैं. शनिवार शाम हवा की चाल तेज होने से प्रदूषण स्तर में थोड़ा सुधार होने का अनुमान हैै. बावजूद इसके यह खराब व बेहद खराब की सीमा रेखा पर ही रहेगा. राजधानी दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए सरकार तमाम कदम उठा रही है. गुरुवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए नया अभियान लांच किया है. इसके तहत दिल्लीवालों से अपील की गई है कि वह रेड लाइट पर अपनी गाड़ी बंद रखें.

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इससे ईंधन की बचत होने के साथ प्रदूषण स्तर में भी कमी आएगी. ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान लांच करते हुए सीएम केजरीवाल ने कहा कि ट्रैफिक सिग्नल पर रोज 10 लाख वाहन बंद होते हैं, तो एक साल में पीएम-10 करीब 1.5 टन और पीएम 2.5 करीब 0.4 टन कम उत्सर्जित होगा. ऑफिस आने-जाने में एक गाड़ी रोज औसतन 15 से 20 मिनट रेड सिग्नल पर रुकती है. इस दौरान करीब 200 मिली लीटर तेल की खपत होती है.

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गाड़ी बंद रखने पर साल में 7000 रुपये की बचत भी हो सकती है. उन्होंने लोगों से अपील की कि हम सभी रेड सिग्नल पर अपने वाहन बंद रखने का संकल्प लें, हर एक व्यक्ति का प्रयास प्रदूषण को कम करने में योगदान देगा. बता दें कि दिल्ली एनसीआई में अक्टूबर-नवंबर के महीने में प्रदूषण अपने चरम पर पहुंच जाता हैै. जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पराली जलाने के कारण होता है.

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First published: 16 October 2020, 7:55 IST
 
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