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अब दिल्ली से प्रसारित नहीं होंगे क्षेत्रीय भाषाआें के कार्यक्रम

प्रणेता झा | Updated on: 29 August 2016, 12:36 IST
QUICK PILL
  • एआइअार (आॅल इंडिया रेडियो) जल्द ही दिल्ली से प्रसारित होने वाले क्षेत्रीय भाषाआें के बुलेटिन को बंद करने जा रहा है.
  • पिछले सात दशक से दिल्ली से क्षेत्रीय भाषाआें के बुलेटिन का प्रसारण हो रहा था आैर नए फैसले के बााद इन बुलेटिन का प्रसारण संबंधित राज्यों की राजधानी से होगा.
  • फैसले को लागू किए जाने के बाद एनएडी केवल हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आैर उर्दू भाषा में सामचार का प्रसारण करेगा.
  • फिलहाल दिल्ली से14 क्षेेत्रीय भाषाआें में प्रसारण किया जाता है आैर अब इनमें से 12 भाषा यानी अरुणाचली, असमी, बंगाली, डोगरी, गुजराती, कश्मीरी, मलयाली, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी आैर तमिल भाषाआें के प्रसारण को संबंधित राज्यों की राजधानी यानी रीजनल न्यूज सेंटर को स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

एआइअार (आॅल इंडिया रेडियो) जल्द ही दिल्ली से प्रसारित होने वाले क्षेत्रीय भाषाआें के बुलेटिन को बंद करने जा रहा है. पिछले सात दशक से दिल्ली से क्षेत्रीय भाषाआें के बुलेटिन का प्रसारण हो रहा था आैर नए फैसले के बाद इन बुलेटिन का प्रसारण संबंधित राज्यों की राजधानी से होगा. 

सूत्रों के मुताबिक कर्मचारी सरकार के इस फैसले से खुश नहीं है. एआइआर के न्यूज सर्विस डिवीजन के कर्मचारियों के मुताबिक प्रसार भारती ने गुणवत्ता आैर प्रतिनिधित्व का हवाला देते हुए इन सेवाआें को संबंधित राज्यों की राजधानियों से प्रसारित करने का फैसला लिया है. प्रसार भारती ने इन सेवाआें के लिए अनुवाद आैर प्रसारण की जिम्मेदारी से खुद को दूर कर लिया है. 

प्रसार भारती नेशनल न्यूज सर्विस का प्रसारण करता रहेगा. बुलेटिन की तैयारी दिल्ली में बैठे संपादकों के हाथों में ही होगी लेकिन क्षेत्रीय भाषआें में इनका अनुवाद आैर प्रसारण न्यूज रीडर्स सह अनुवादक की मदद से किया जाएगा.

फिलहाल न्यूज रीडर्स सह अनुवादक केवल क्षे़त्रीय भाषाआें के कार्यक्रम का ही अनुवाद करते हैं आैर इनका प्रसारण करते हैं.

अब क्षे़त्रीय भाषा के प्रसारण को संबंधित राज्यों की राजधानियों में भेज दिया जाएगा

12 अगस्त को सूचना आैर प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्द्घन सिंह राठाैर ने लोेकसभा को बताया था कि भारत के सरकारी प्रसारक प्रसार भारती ने एनएसडी के प्रस्ताव काे मंजूरी दे दी है. अब क्षेत्रीय भाषा के प्रसारण को संबंधित राज्यों की राजधानियों में भेज दिया जाएगा.

फैसले को लागू किए जाने के बाद एनएसडी केवल हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत आैर उर्दू भाषा में समाचार का प्रसारण करेगा. फिलहाल दिल्ली से 14 क्षेेत्रीय भाषाआें में प्रसारण किया जाता है आैर अब इनमें से 12 भाषा यानी अरुणाचली, असमी, बंगाली, डोगरी, गुजराती, कश्मीरी, मलयालमी, मराठी, नेपाली,  उड़िया, पंजाबी आैर तमिल भाषाआें के प्रसारण को संबंधित राज्यों की राजधानी स्थानांतरित कर दिया जाएगा.

अरुणाचली को छोडकर यह सभी भाषाएं संविधान की आठवीं सूची में अनुबद्घ हैं. राठौर ने कहा इन सेवाआें को राजधानियोें में भेजे जाने का संबंध क्षेत्रीय भाषाआें में मौजूद विशेषज्ञता का उपलब्ध होना है. 

आॅल इंडिया रेडियो के सूत्रों ने कैच को बताया कि इस फैसले से क्षेत्रीय सेवाआें की गुणवत्ता में गिरावट आएगी. उन्होंने कहा कि हिंदी आैर अंग्रेजी के मुकाबले क्षेत्रीय बुलेटिन की गुणवत्ता में गिरावट आएगी.

एआइआर के एक कर्मचारी ने अपना नाम नहीं छापे जानेे की शर्त पर बताया, 'सबसे बड़ी समस्या यह है कि संपादकीय टीम का बंटवारा किया जा रहा है. यह विकेंद्रीकरण नहीं बल्कि बंटवारा है. यह अहम है कि तैयारी, अनुवाद आैर प्रसारण का काम अभी भी एक है.'

अरुणाचली को छोडकर यह सभी भाषाएं संविधान की आठवीं सूची में अनुबद्घ हैं

सूत्र ने बताया, 'इन बुलेटिन में नेशनल आैर इंटरनेशनल न्यूज को कवर किया जाता है. अगर दिल्ली में बैठे संपादकों ने बुलेटिन को तैयार किया है तो उसमें आखिरी समय में कभी कोई बदलाव नहीं किया जा सकता. बदलाव के बाद इसे अनुवाद के लिए क्षेत्रीय केंद्रों को भेजा जाएगा आैर फिर वहां मामूली संपादन होगा. इसमें समय लगेगा. जबकि दिल्ली में न्यूज पढ़ने के दौरान भी बुलेटिन में बदलाव किया जा सकता है.'

अधिकारी ने बताया कि संपादकों को कोई क्षेत्रीय सहायता उपलब्ध नहीं होगी. एआइआर के एक अन्य अधिकारी ने बताया, 'एनआरटी अब दिल्ली में तैयार किए जा रहे बुलेटिन में कोइ इनपुट नहीं दे पाएंगे. इस बात की संभावना है हिंदी आैर अंग्रेजी समझने वाले श्रोताआें को अब क्षेेत्रीय भााषा में न्यूज सुनने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.' 

उन्होंने कहा एआइआर मुख्यालय से प्रसारण होने के बावजूद  क्षेत्रीय भाषा के लोगों को इसमें प्रतिनिधित्व मिलता रहा है. एेसे में उन्होंने केवल राज्यों की राजधानी तक सीमित कर देना ठीक नहीं है. 

अधिकारी ने बताया कि दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सूचना आैर प्रसारण मंत्रालय को पत्र लिखकर पंजाबी बुलेटिन को दिल्ली सेे हटाकर क्षेत्रीय समाचार केंद्र भेजे जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है.

उन्होंने कहा, 'इस फैसले का राजनीतिक असर होगा. क्षेत्रीय दल आैर भाषा आधारित संगठन इसे हिंदी बनाम अन्य क्षेत्रीय भाषा का मुद्दा बना सकते हैैं. आप 1965-66 की स्थिति याद कर लीजिए, जब हिंदी को देश की एकमात्र अाधिकारिक भाषा बनाने की कोशिश की गई.'

अधिकारी नेे बताया के प्रसार भारती के फैसलेे से हिंदी के मुकाबले अन्य क्षेत्रीय भाषाआें के विकास में मौजूद असंतुलन को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही देश की राजधानी में अन्य क्षेत्रीय भाषाआें का प्रतिनिधित्व भी खत्म होगा.

2005 में तीन भाषाआें सिंधी, कन्नड़ आैरर तेलुगू में प्रसारित होने वाला नेशनल बुलेटिन गुजरात, कर्नाटक आैर आंध्र प्रदेश स्थानांतरित कर दिया गया था.

2005 में तीन भाषाआें सिंधी, कन्नड़ आैर तेलुगू बुलेटिन को गुजरात, कर्नाटक आैर आंध्र में स्थांतरित किया गया था

एआइआर के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इन तीनों भाषाआें को क्षेत्रीय सेंटर में भेजे जाने का फैसला बेहद सफल रहा.

अधिकारी ने कहा कि भाषाई शुद्घता का बेहतर तरीके से क्षेत्रीय सेंटर में ख्याल रखा जा सकता है. उन्होंने कहा, 'हमें पहले अक्सर प्रसाारण आैर उच्चारण को लेकर शिकायत मिलती थी.'

हालांकि दूसरे अधिकारी ने बताया इस मामले में अभी तक कोइ स्वतंत्र अध्ययन नहीं कराया जा गया है, जिससे यह पता चल सके कि इन तीनों भाषाआें को क्षेत्रीय सेंटर में स्थाानांतरित किए जाने का कितना फायदा हुआ.

अधिकारी ने बताया, '2005 में तीन नहीं सभी भाषाआें को संबंधित सेंटर पर भेजे जाने का प्रस्ताव था लेकिन तत्कालीन सूचना आैैर प्रसारण मंत्री जयपाल रेड्डी ने इसे खारिज कर दिया था. 2000 में भी एेसा करने की कोशिश की गई लेकिन तत्कालीन सूचना मंत्री सुषमा स्वराज ने इसका विरोध किया था. प्रसार भारती को अधिक स्वायत्ता मिलने की बात की जाती है लेकिन इसका संचालन भारतीय सूचना सेवा के अधिकारियों के हाथों में होता है. जब एेसेे प्रस्ताव सामने आते हैं तो उनसे सलाह नहीं ली जाती.' 

हालांकि सरकार के इस फैसले से निश्चित तौर पर क्षेत्रीय भाषाआें में नियुक्तियों की राह आसान होगी. एआइआर ने पहली बार 1939 में दिल्ली में सभी प्रसारण सेवाआें को केंद्रीकृत किया था. फिलहाल एआइआर संविधान की आठवीं अनुसूची में शाामिल 22 भाषाआें में प्रसारण करता है. इसके अलावा यह देश की 146 बोलियों में भी अपनी सेवाएं देता है.

जबकि कोंकणी, मराठी, मणिपुरी आैर संथाली भाषाआें का प्रसारण इन सेंटर से ही शुरू किया गया. इस महीने की शुरुआत में सूचना आैर प्रसारण मंत्रालय के उस फैसले का जबरदस्त विरोध हुआ था जिसके तहत उन्होंने महाराष्ट्र, तमिलनाडु आैर केरल की रीजनल न्यूज यूनिट को बंद किए जाने का आदेश दिया था. विरोध के बाद मंत्रालय ने इस आदेश को पलट दिया.

First published: 29 August 2016, 12:36 IST
 
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