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विमान यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार के इस फैसले से सस्ता हो सकता है हवाई सफर

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 August 2019, 8:11 IST
प्रतीकात्मक तस्वीर

विमानन ईंधन (एयर टरबाइन फ्यूल) में बदलाव की तैयारी सरकार द्वारा शुरू कर दी गई है. विमानन मंत्रालय ने इसके तहत हवाईअड्डों पर एटीएफ खरीदने पर देने वाले अतिरिक्त करों को औचित्यपूर्ण बनाने के लिए एक समिति का गठन किया है. इस बात की जानकारी सरकारी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई है. अगस सरकार के इस फैसले के तहत एटीएफ कर कम होता है तो हवाई सफर सस्ता होने की संभावना है.

फिलहाल विमानन कंपनियां को भारत के किसी भी हवाईअड्डे पर एटीएफ खरीदने पर थ्रोपुट शुल्क (थ्रोपुट चार्ज), फ्यूल इन्फ्रास्ट्रक्चर शुल्क और इनटू प्लेन शुल्क जैसे कई शुल्क का भुगतान करना पड़ता है.

इस मामले को लेकर एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "इन चार्जेस पर कई बार कर लगता है." एक अन्य  अधिकारी ने कहा, "विमानन कंपनियों और हवाईअड्डा परिचालकों के बीच एक प्रत्यक्ष बिलिंग व्यवस्था विकसित करने के लिए विमानन मंत्रालय ने विमानन कंपनियों, हवाईअड्डा परिचालकों, तेल कंपनियों सहित अन्य के प्रतिनिधित्व वाली एक समिति का गठन किया है. यह समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट जमा कर सकती है."

विमानन कंपनियों को 400 करोड़ का हो सकता है सालाना बचत

सरकारी अनुमानों के अनुसार, अगर प्रत्यक्ष बिलिंग व्यवस्था लागू हो जाती है, तो इससे विमानन कंपनियों को सालभर में 400 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. जानकारी के मुताबिक, भारत में विमानन कंपनियों के एटीएफ की हिस्सेदारी में अगर कुल खर्च को देखें, तो वह लगभग 40 फीसदी है. इसलिए एटीएफ पर कर कम होने से विमानन कंपनियों को अच्छा फायदा हो सकता है.

इस मामले को लेकर एक अधिकारी ने विस्तार से बताते हुए कहा, "थ्रोपुट चार्ज के लिए बिलिंग का ही उदाहरण लें, जो हवाईअड्डा परिचालक द्वारा तेल कंपनी से वसूला जाता है. इसके बदले में तेल कंपनी इस चार्ज को विमानन कंपनी से वसूलती है. हालांकि जटिल बिलिंग प्रक्रिया के चलते थ्रोपुट चार्जेस पर जीएसटी, उत्पाद शुल्क और वैट जैसे कर जुड़ जाते हैं."

उन्होंने इस मामले को लेकर कहा, "दिल्ली हवाईअड्डे पर यदि हवाईअड्डा परिचालक सिर्फ 100 रुपये थ्रोपुट शुल्क वसूलता है तो विमानन कंपनी को 164 रुपये का भुगतान करना पड़ता है."

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First published: 19 August 2019, 8:11 IST
 
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