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NSA डोभाल से मिलकर इस शख्स की ज़िन्दगी में आ गया भूचाल, कहा- हो गई बड़ी भूल

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 August 2019, 13:18 IST

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने जम्मू कश्मीर दौरा किया था, जिसके बाद सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का शोपियां में बंद के दौरान का एक वीडियो जारी किया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में डोभाल बाजार के फुटपाथ पर लोगों के एक छोटे समूह के साथ भोजन करते दिख रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उस क्लिप में डोभाल के साथ देखे गए व्यक्तियों में से एक का कहना है कि उन्हें एहसास नहीं था कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से बात कर रहे हैं. व्यक्ति ने कहा कि वह जैकेट पहने उस व्यक्ति को जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह के निजी सहायक समझ रहे थे.

मंसूर अहमद मगरे जो एक सामाजिक कार्यकर्ता है, कहते हैं “जब मैं उनसे (डोभाल) बात कर रहा था, मैंने अचानक डीजीपी साहब और एसपी साहब को सम्मान के साथ खड़ा पाया, उनके हाथ पीछे की ओर मुड़े हुए थे. मैंने सोचा कि वह निजी सहायक नहीं हो सकता. मैंने उनसे पूछा, सर मुझे आपका परिचय चाहिए और उन्होंने मुझे बताया कि वह मोदी जी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं.”

व्यक्ति ने कहा “जब मैं घर वापस आया तो मेरा बेटा सो रहा था. मैंने उसे जगाया और कहा कि मैं डोभाल से मिला हूं. वह हैरान था और उसने कहा कि यह सब जल्द ही टीवी पर आएगा''. मंसूर कहते हैं “इस (वीडियो) ने मेरे जीवन को स्थायी रूप से बदल दिया है. लोग मुझे एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जानते थे लेकिन अब वह छवि बदल गई है. ट्रेड यूनियन नेता रह चुके मंसूर कहते हैं कि अगर मुझे पता होता कि मुझे डोभाल से मिलना है तो मैं कभी तैयार नहीं होता, चाहे वह मुझे घसीट कर ले जाते.

मंसूर के परिवार के सदस्य अजीब सी स्थिति में हैं. लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं. खासतौर से कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद के बयान के बाद, जिसमे उन्होंने कहा "लोगों को पैसे से खरीदा जा सकता है". परिवार का कहना है ''लोग अब यह भी कह रहे हैं कि उन्हें इसके लिए पैसा मिला था. मगरे के बेटे मोहसिन मंसूर कहते हैं, हम उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगे''.

शोपियां के अलियालपोरा का निवासी मंसूर एक वरिष्ठ नागरिक मंच के राज्य समन्वयक और स्थानीय मस्जिद समिति का प्रमुख हैं. उनका कहना है कि वह अक्सर जिले के नागरिकों के लिए पुलिस प्रशासन के साथ बातचीत करते रहते हैं. साथ ही उन परिवारों की ओर से हस्तक्षेप करते हैं जिनके परिजनों को हिरासत में लिया गया है.

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First published: 13 August 2019, 12:28 IST
 
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