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अजीत जोगी की पार्टी: राहुल... सलीम तो कांग्रेस अनारकली!

राजकुमार सोनी | Updated on: 10 June 2016, 7:31 IST

'सलीम तुम्हें मरने नहीं देगा और अनारकली हम तुम्हें जीने नहीं देंगे'. फिल्म मुगले आजम का यह डायलॉग इन दिनों छत्तीसगढ़ के राजनीतिक गलियारों में खूब बोला जा रहा है. एक अरसे के बाद इस डायलॉग के एकायक ताजा हो जाने की एक खास वजह यह है कि चंद रोज पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कांग्रेस से अलग होकर मरवाही के कोटमी इलाके में नई पार्टी बनाने का ऐलान किया है.

जोगी ने इस दौरान यह बताया कि जब अकबर युद्ध के मैदान में जाने के लिए खुद को तैयार करते थे तब महारानी जोधा उन्हें तिलक लगाकर तलवार थमाती थी. जोगी का कहना था कि जब उन्होंने भी नई पार्टी बनाने के लिए कमर कसी तब उनकी विधायक पत्नी रेणु जोगी ने भी महारानी जोधा की तरह ही तिलक लगाया और तलवार देकर कहा- जाओ अब छत्तीसगढ़ की आजादी के लिए जुट जाओ. 

जोगी ने फिलहाल छत्तीसगढ़ को रमनसिंह से आजाद करने की घोषणा की है, लेकिन अकबर-जोधा, तिलक और तलवार के किस्से के बाद यह कहा जा रहा है कि उन्होंने राहुल गांधी को सलीम मान लिया है और उनकी नजर में कांग्रेस अब एक कनीज यानी अनारकली हैं.

ज्ञात हो कि तब जोगी मुख्यमंत्री थे और शुक्ल ने उनके खिलाफ बगावत का परचम उठा रखा था

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जोगी की नई पार्टी जिसके नाम का ऐलान होना बाकी है यदि वह चुनाव समर में ताल ठोकती हैं तो भाजपा और कांग्रेस में से किसे ज्यादा नुकसान पहुंचेगा यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वर्ष 2003 के विधानसभा चुनाव में जो स्थिति कद्दावर नेता वीसी शुक्ल ने पैदा की थी ठीक वैसी ही सिचुवेशन जोगी भी पैदा करने की जुगत में लगे हुए हैं. 

ज्ञात हो कि तब जोगी मुख्यमंत्री थे और शुक्ल ने उनके खिलाफ बगावत का परचम उठा रखा था. शुक्ल ने पहले छत्तीसगढ़ संघर्ष परिषद के जरिए जोगी के खिलाफ माहौल बनाया और फिर शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का दामन थामकर विधानसभा की 90 सीटों पर ऐसे प्रत्याशी खड़े किए जो कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाने वाले साबित हुए थे.

फिर नहीं लौटा सुनहरा दौर

शुक्ल की बदौलत जोगी सत्ता से बाहर हुए लेकिन 2003 के बाद उनका सुनहरा दौर फिर नहीं लौटा. उनके पुत्र अमित जोगी को राकांपा के कोषाध्यक्ष रामावतार जग्गी की हत्या के आरोप में जेल जाना पड़ा तो विधानसभा के दो चुनावों में कांग्रेस ने उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया. 

हालांकि उनकी पत्नी रेणु जोगी और पुत्र को टिकट मिला और उन्हें विधायक बनने का अवसर मिला मगर जोगी न तो संगठन की कमान संभालने लायक समझे गए और न ही उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनने का मौका दिया गया. 

कांग्रेस के प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद कहते हैं, कांग्रेस ने जोगी को बहुत कुछ दिया. उन्हें राज्यसभा का सदस्य बनाया. सांसद बनने का मौका दिया, मगर अंतागढ़ उपचुनाव के दौरान सत्ता में बैठे लोगों से लेन-देन का टेप सामने आने के बाद वे अविश्वसनीय हो गए. 

हरिप्रसाद का यह भी कहना है कि जोगी इस बार भी राज्यसभा से टिकट चाहते थे मगर जब कांग्रेस ने छाया वर्मा को मौका दिया तो वे खीझ गए.

भरोसे की परीक्षा

जोगी पर अगड़ी जाति का विरोध करने और व्यापारी समुदाय को प्रताडि़त करने का आरोप लगता रहा है मगर कोटमी के सम्मेलन में उन्होंने सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को किनारे कर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने का दावा किया. 

यही एक वजह है कि उन्होंने छत्तीसगढ़ में छूआछुत के खिलाफ आंदोलन छेडऩे वाले पंडित सुंदरलाल शर्मा के काम को भी याद किया तो उन्हें बैरिस्टर छेदीलाल का शौर्य भी याद आया. उन्होंने भयभीत रहने वाले व्यापारी समुदाय को यह कहते हुए राहत देने की कोशिश की है कि अगर वे मुख्यमंत्री बन गए तो छत्तीसगढ़ से सभी टैक्स को हटा देंगे. 

इंस्पेक्टर राज समाप्त हो जाएगा तो व्यापारी बगैर डरे व्यापार कर सकेंगे. उनकी इस बात का कितना इकबाल किया जाता है यह देखना अभी बाकी है. हालांकि जोगी सभी वर्गों के जोगी है यह बताने के लिए लंगर में पोहा तो किसान से चनाबूट मांगकर खाने लग गए हैं. उनका यह देशज अंदाज लोगों को लुभा भी रहा है.

अभी इंतजार...

जोगी के करीबी समझे जाने वाले विधायकों एवं संगठन के प्रमुखों ने फिलहाल कांग्रेस के साथ रहने का ऐलान किया है. इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि अभी चुनाव में ढाई साल का समय बाकी है. 

विधायक अगर पार्टी छोड़ते हैं तो विधायक नहीं रह पाएंगे और संगठन के कुछ महत्वपूर्ण पदाधिकारी भी यदि जोगी के साथ खड़े रहते हैं तो उन्हें संगठन चलता कर सकता है. 

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जोगी के पास युवाओं की अच्छी-खासी टीम है. यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष उत्तम वासुदेव कहना है कि वे जोगी के करीबी है मगर संगठन के साथ इसलिए रहेंगे क्योंकि संगठन ने उन्हें बहुत कुछ दिया है. 

माना जा रहा है कि संगठन के साथ टिके रहने का दावा करने वाले बहुत से विधायक और समर्थक चुनाव से कुछ पहले उनके साथ दिखाई दे सकते हैं, तब दल-बदल कानून का शिंकजा भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा.

यह होगा आखिरी दांव

जोगी और उनके समर्थकों का पूरा जोर फिलहाल नवम्बर महीने में रायपुर राजधानी में होने वाले एक बड़े सम्मेलन को लेकर हैं. इस सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार, तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित क्षेत्रीय दलों के अन्य प्रमुख क्षत्रपों के शामिल होने की संभावना है. 

सम्मेलन में राहुल गांधी के धुर विरोधी जगन रेडडी को भी बुलाने की तैयारी चल रही है. इस सम्मेलन में ही जोगी अपनी पार्टी के नाम का ऐलान भी करेंगे. राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि जोगी भी अपनी पार्टी के जरिए 90 सीटों पर ऐसे प्रत्याशी खड़े करेंगे जो कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगाएंगे. 

प्रेक्षकों की राय है कि रमन से मुक्ति की बात उन्हें इसलिए करनी पड़ी हैं क्योंकि उन्हें रमन के साथ सांठगांठ कर राजनीति करने के आरोपों को धोना भी है. 

प्रेक्षक यह भी मानकर चल रहे हैं कि जोगी अपनी पार्टी के जरिए भाजपा को भी नुकसान पहुंचाने की स्थिति में रह सकते हैं क्योंकि चुनाव के दौरान जिनकी टिकट कटती है या तो वे बागी हो जाते हैं या फिर निर्दलीय चुनाव लड़कर किस्मत आजमाते हैं. जोगी की पार्टी दोनों बड़ी पार्टियों के नाराज चल रहे लोगों और बागियों के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है.

First published: 10 June 2016, 7:31 IST
 
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