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फिर से छपेगा नेशनल हेराल्ड और नवजीवन अखबार, नीलाभ मिश्र बने एडिटर-इन-चीफ

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2016, 14:47 IST

लंबे अरसे से विवादों में रहे अखबार नेशनल हेराल्ड का एक बार फिर से प्रकाशन शुरू होगा. नेशनल हेराल्ड की संपत्ति के मालिकाना हक के स्थानांतरण को लेकर काफी समय से सियासी विवाद रहा है.

इस मामले में बीजेपी नेता और राज्यसभा सदस्य सुब्रमण्यम स्वामी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी समेत कई कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ याचिका दाखिल कर रखी है. 19 दिसंबर 2015 को कांग्रेस नेता दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हो चुके हैं. 

एजेएल ने जारी की प्रेस रिलीज

द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) ने दिल्ली में एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए अखबार को दोबारा प्रकाशित करने का एलान किया. प्रेस रिलीज में कहा गया है, "नेशनल हेराल्ड और नवजीवन अपना प्रकाशन शुरू करेंगे. नीलाभ मिश्र को प्रधान संपादक (एडिटर-इन-चीफ) बनाया गया है."

प्रेस रिलीज में कहा गया है, "द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड कंपनी की स्थापना 1937 में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी. कंपनी ने फैसला लिया है कि हमारे प्रकाशन के अंग्रेजी अखबार नेशनल हेराल्ड और हिंदी अखबार नवजीवन का प्रकाशन शुरू किया जाएगा."

प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है, "कंपनी ने वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ मिश्र को तत्काल प्रभाव से हिंदी और अंग्रेजी अखबार के साथ ही डिजिटल माध्यम का भी प्रधान संपादक नियुक्त किया है. इससे पहले वे आउटलुक हिंदी पत्रिका के संपादक की जिम्मेदारी निभा चुके हैं."

दिल्ली में द एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?

नेशनल हेराल्ड अखबार की शुरुआत 1938 में लखनऊ में की गई थी. इस अखबार का हिंदी अर्थ भारत का अग्रदूत था. देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इसके पहले संपादक थे.

1942 में अंग्रेजों ने भारतीय प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली, जिस वजह से अखबार को बंद करना पड़ा. 1942 से लेकर 1945 तक तीन साल के दौरान अखबार का एक भी अंक प्रकाशित नहीं हुआ.

1945 खत्म होते-होते इस अखबार को एक बार फिर से चलाने की कोशिश की गई. 1946 में इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी ने अखबार का प्रबंधन संभाला. ये वो दौर था जब मानिकोंडा चलापति राव अखबार का संपादन संभाल रहे थे. 

1977 में दोबारा बंद हुआ अखबार

अखबार के दो संस्करण दिल्ली और लखनऊ से छापे जा रहे थे. 1977 में एक बार फिर से इस अखबार को बंद करना पड़ा. इंदिरा गांधी की चुनाव में हार हुई.

अब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को अखबार की कमान संभालनी पड़ी. लखनऊ संस्करण को मजबूरन बंद करना पड़ा, सिर्फ दिल्ली का अंक ही प्रकाशित हो पाता था. 

एसोसिएट जर्नल्स को मालिकाना हक

खराब प्रिंटिंग और तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए साल 2008 में इसके दिल्ली अंक को भी बंद करने का फैसला किया गया. उस वक्त नेशनल हेराल्ड के संपादक थे टीवी वेंकेटाचल्लम.

2008 में इस अखबार को पूरी तरह से बंद कर दिया गया. इस अखबार का मालिकाना हक एसोसिएट जर्नल्स को दे दिया गया. इस कंपनी ने कांग्रेस से बिना ब्याज के 90 करोड़ रुपए कर्जा लिया, लेकिन अखबार फिर भी शुरू नहीं हो सका. 

2012 में यंग इंडिया के हवाले

26 अप्रैल 2012 को एक बार फिर से मालिकाना हक का स्थानांतरण हुआ. अब नेशनल हेराल्ड अखबार का मालिकाना हक यंग इंडिया को मिला. यंग इंडिया में 76 फीसदी शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास हैं.

जानकारी के मुताबिक यंग इंडिया ने नेशनल हेराल्ड की संपत्ति महज 50 लाख रुपये में हासिल की. आरोप है कि इस संपत्ति की कीमत करीब 1600 करोड़ रुपये के आस-पास थी.

संपत्ति की हेरा-फेरी का आरोप

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया कि हेराल्ड की संपत्ति को गलत ढंग से इस्तेमाल में लिया गया है. जिसके बाद स्वामी इस मामले को साल 2012 में कोर्ट तक खींच ले गए.

पिछले कई साल से सुब्रमण्यम स्वामी इस मामले को लेकर लगातार गांधी परिवार को घेरते रहे हैं. 19 दिसंबर 2015 को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में पेश हुए थे.

First published: 31 August 2016, 14:47 IST
 
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