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अजमेर दरगाह ब्लास्ट मामले में साध्वी प्रज्ञा और इंद्रेश कुमार को NIA की क्लीनचिट

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 April 2017, 17:37 IST
(कैच)

अजमेर दरगाह मामले में एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा और आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार को क्लीन चिट दे दी है. ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह पर 2007 में हुए बम धमाके में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने जयपुर की कोर्ट में सौंपी अपनी सप्लीमेंट्री फाइनल रिपोर्ट में कहा है कि इंद्रेश कुमार और साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं. 

एनआईए की विशेष अदालत ने इसी मामले में भवेश पटेल और आरएसएस के नेता देवेंद्र गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने पटेल पर 10,000 रुपये और देवेंद्र गुप्ता पर 5000 रुपये का जुर्माना भी ठोका था. 

सोमवार को सुनवाई के दौरान जयपुर की एनआईए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फरार चल रहे चार अन्य आरोपियों की संपत्ति का ब्यौरा अब तक क्यों नहीं बताया गया है. मामले की अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी.

क्या है पूरा मामला?

अजमेर दरगाह में 11 अक्टूबर 2007 को हुए ब्लास्ट में तीन जायरीनों की मौत हुई थी, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे. धमाका दरगाह के अहाता-ए-नूर परिसर में हुआ था. अजमेर में स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की ये दरगाह सदियों से लोगों को भाईचारे और अमन का पैगाम देती चली आ रही है.

एक अप्रैल 2011 को केंद्र सरकार ने इस मामले की जांच एनआईए को सौंपी थी. आठ मार्च 2017 को संदेह का लाभ देते हुए एनआईकोर्ट ने मुख्य आरोपी स्वामी असीमानंद को बरी कर दिया था. साल 2006 से 2008 के बीच देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ब्लास्ट हुए थे. इनकी जांच एनआईए को सौंपी गई थी. धमाकों के तार कथित हिंदू चरमपंथियों से जुड़े पाए गए थे. स्वामी असीमानंद की गिरफ्तारी 19 नवंबर, 2010 को उत्तराखंड के हरिद्वार से हुई थी.

जयपुर स्पेशल एनआईए कोर्ट के जज दिनेश गुप्ता ने इस केस में असीमानंद के अलावा हर्षद सोलंकी, मुकेश वासाणी, लोकेश शर्मा, मेहुल कुमार, भरत भाई को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था. अदालत ने देवेन्द्र गुप्ता, भावेश पटेल और सुनील जोशी को भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी, 195 और धारा 295 के अलावा विस्फोटक सामग्री कानून की धारा 3(4) और गैर कानूनी गतिविधियों का दोषी पाया.

फाइल फोटो
First published: 3 April 2017, 17:37 IST
 
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