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पंजाब में चुनाव से पहले हर पार्टी को किसानों की चिंता सताने लगी है

राजीव खन्ना | Updated on: 10 February 2017, 1:52 IST
QUICK PILL
  • पंजाब में अगले साल विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. सत्तारूढ़ अकाली दल और विपक्षी कांग्रेस पार्टी सहित आम आदमी पार्टी राज्य के ग्रामीण वोटरों को लुभाने की कोशिश शुरू कर चुके हैं.
  • राज्य के किसान कर्ज, खराब फसल, कम होती खेती जमीन जैसी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं. राज्य में किसानों की आत्महत्या थम नहीं नहीं रही है. सभी पार्टियां चुनाव के मद्देनजर कई घोषणाएं कर रही हैं.

पंजाब में अगले साल होने वाले विधान सभा चुनाव से पहले राज्य में किसानों की समस्या एक प्रमुख मुद्दा बन गई है.

राज्य के तीन प्रमुख दलों कांग्रेस, शिरोमणी अकाली दल(एसएडी) और आम आदमी पार्टी(आप) ने अभी से ग्रामीण इलाकों में अपना प्रचार शुरू कर दिया है.

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी वोटरों को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अकाली दल ने राज्य के किसानों के लिए कुछ नहीं किया. वहीं प्रकाश सिंह बादल सरकार ने किसानों के लिए अलग-अलग घोषणाएं करनी शुरू कर दी हैं.

राज्य के कृषि क्षेत्र इस समय कई संकटों से गुजर रहा है. इनमें सबसे प्रमुख हैं किसानों पर भारी कर्ज. पटियाला स्थित पंजाबी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के अनुसार राज्य के किसानों पर 69, 355 करोड़ रुपये का कर्ज है. इन विशेषज्ञों ने इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च के लिए हाल ही में एक शोध किया था जिसमें ये बात सामने आयी.

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दूसरा बड़ा मुद्दा है किसान और खेत मजदूरों द्वारा आर्थिक दबाव के चलते आत्महत्या करना. किसी ठोस सरकारी रणनीति के अभाव के चलते इसपर कोई रोक लगती नहीं दिख रही.

राज्य का तीसरा बड़ा कृषि संकट सीधे उपज से जुड़ा है. राज्य में कपास और मटर जैसी फसलों की उपज काफी खराब रही है.  नकली कीटनाशक और बीजों ने किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया.

पंजाब के किसानों पर 69 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. आर्थिक दुर्दशा के कारण किसान कर रहे हैं आत्महत्या

किसानों को उनकी उपज का उचित दाम भी नहीं मिल रहा है. फसल से पर्याप्त आमदनी न होने के चलते वो अधर में फंस गए हैं. किसानों की हालात इतनी खराब है कि बासमती चावल उगाने वाले किसान भी लागत नहीं निकाल पा रहा है.

इनके अलावा सामाजिक सुरक्षा, जनस्वास्थ्य और शिक्षा का मुद्दा भी अहम है. विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा अपने बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च करना पड़ रहा है. उनकी आर्थिक बदहाली में इसका भी योगदान है.

साल दर साल कम होती जा रही प्रति व्यक्ति खेत की जमीन के कारण भी किसानी मुनाफे का सौदा नहीं रही. ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी भी राज्य के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है.

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राज्य में 10 लाख से ज्यादा किसान परिवार हैं. सभी राजनीतिक पार्टियां इनका वोट पाना चाहती हैं.

कांग्रेस ने दो महीने पहले एक बार फिर राज्य की बागडोर कैप्टन अमरिंदर सिंह को सौंपी है. उन्होंने हाल ही में 'पगड़ी संभाल किसान' मुहिम शुरू की है. उन्होंन राज्य के फरीदकोट जिले से इसकी शुरुआत की है. पहला कार्यक्रम जाट महासभा के बैनर तले हुआ लेकिन आगे से इसके कार्यक्रम राज्य कांग्रेस के तत्वाधान में होगा.

अमरिंदर ने बादल सरकार पर तीखा हमला बोला है. वो नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार पर भी हमला कर रहे हैं. अमरिंदर ने फरीदकोट ने कहा, "अगर केंद्र सरकार कारपोरेट को 1.14 लाख करोड़ का कर्ज माफ कर सकती है तो गरीब किसानों का मामूली कर्ज क्यों नहीं माफ कर सकती."

पंजाब में 10 लाख से ज्यादा किसान परिवार हैं. सभी राजनीतिक पार्टियां इनका वोट पाना चाहती हैं

अमरिंदर ने ये भी कह कि बादल अपनी सहयोगी पार्टी से किसानों का कर्ज माफ करने के लिए कह कह सकती है, आखिरकार उनकी बहू केंद्र सरकार में मंत्री हैं.

कांग्रेस ने पिछले एक दशक में आत्महत्या करने वाले किसानों की सूची बनाने के लिए एक कमेटी बनाई है. ये कमेटी आत्महत्या के कारणों  की भी पड़ताल करेगी. पार्टी ने सत्ता में आने के बाद नकली कीटनाशकों और बीजों की आपूर्ति की भी जांच कराने का वादा किया है.

आम आदमी पार्टी पंजाब के गांवों में जाकर स्थानीय मुद्दों को उठा रही है. पार्टी ने 'परिवार जोड़ो' कैंपेन शुरू किया है. पार्टी गांव गांव जाकर किसान परिवारों से मिलकर उन्हें अपनी पार्टी का एजेंडा बता रही है.

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आम आदमी पार्टी के नेता आशीष खेतान की पहली पर पंजाब इकाई ने दिल्ली की तर्ज पर राज्य में 15 मार्च से 'पंजाब डॉयलॉग' लॉन्च करने की घोषणा की है. खबर है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 20 फरवरी से राज्य का दौरा करेंगे. वो राज्य में करीब एक हफ्ते रहेंगे. आम आदमी पार्टी ने पहले ही किसान और मजदूर विंग का गठन कर दिया है. ये संगठन राज्य में हुई किसान आत्महत्याओं और उनकी आर्थिक दुर्दशा से जुड़े आंकड़े जुटाएगी, खास तौर पर कपास किसानों के बारे में.

राज्य के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ग्रामीण वोटरों को लुभाने के लिए नई घोषणाएं कर रहे हैं. पिछले कुछ समय में उन्होंने किसानी की बेहतरी के लिए एक के बाद कई घोषणाएं की हैं.

अपने ताजा फैसले में उन्होंने कच्ची शहद और उसके कारोबार से जुड़े तमाम समानों से वैट खत्म कर दिया है. मधुमक्खी पालन उद्योग को उन्हें अतिरिक्त सब्सिडी देने की भी घोषणा की है.

राज्य की बादल सरकार अगले साल होने वाले चुनाव को देखते हुए किसानों के लिए एक के बाद एक कई घोषणाएं कर चुकी है

बादल ने फूलों, औषधियों और सलाद की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी घोषणाएं की हैं. उन्होंने किसानों को मार्केटिंग में मदद करने के लिए एक विशेष संस्था बनाने की भी घोषणा की है. उन्होंने फूलों की खेती करने वालों को किसानों की दर पर 24 घंटे बिजली देने की घोषणा की है.

बादल ने मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए अगले सालाना योजना में विशेष बजट के आवंटन की घोषणा की है.

माना जा रहा है कि बादल छोटे और मझोले उद्योगों के लिए भी विशेष प्रोविडेंट और पेंशन फंड योजना की घोषणा करते हैं. भूमिहीन किसान, पांच एकड़ तक जमीन के रखने वाले किसान और 60 साल से अधिक उम्र वाले किसान इस योजना के तहत लाभ पा सकेंगे. पंजाब में इस श्रेणी में करीब 16 लाख किसान हैं.

इस बात की भी संभावना है कि बादल मार्च में किसानों के लिए स्वास्थय और दुर्घटना बीमा योजना की भी घोषणा कर सकते हैं.

अकाली अमरिंदर सिंह को ये कहकर घेर रही है कि उनकी पत्नी परनीत कौर यूपीए सरकार में मंत्री थीं लेकिन जब पंजाब के किसानों के संग भेदभाव हो रहा था तो वो क्यों चुप रही थीं.

First published: 15 February 2016, 8:48 IST
 
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