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अखाड़ा परिषद ने स्वामी चक्रपाणि महाराज का किया बहिष्कार, जारी की फर्जी बाबाओं की लिस्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 March 2018, 8:55 IST

संस्कृति और सभ्यता के देश भारत में धर्मों का अलग ही महत्त्व है. ऐसे में कुछ लोग लोगों की धार्मिक आस्था का गलत फायदा उठाते है अपने निजी हित के लिए. पिछली कई बार से कई ऐसे बाबाओं का नाम सामने आया है जिन पर लोगों की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ करने के आरोप लगे हैं.

इसी मामले में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की इलाहाबाद में हुई बैठक के बाद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा, 'साधु संत सन्यासी परंपरा, उदासीन परंपरा, नाथ परंपरा, वैष्णव संप्रदाय, शिव संप्रदाय आदि से आते हैं. वहीं फर्जी बाबाओं की कोई परंपरा या संप्रदाय नहीं है.'

साधु संत सन्यासी परंपरा, उदासीन परंपरा, नाथ परंपरा, वैष्णव संप्रदाय, शिव संप्रदाय आदि से आते हैं. वहीं फर्जी बाबाओं की कोई परंपरा या संप्रदाय नहीं है.”

 

बैठक में अखिल भारतीय श्री पंच निर्मोही अनी अखाड़े के श्री महंत राजेंद्र दास ने प्रस्ताव रखा कि अखाड़ा परिषद पहले भी कई फर्जी बाबाओं का बहिष्कार कर चुकी है. अभी जानकारी प्राप्त हुई है कि चक्रपाणि और प्रमोद कृष्णम किसी अखाड़े से संबंधित नहीं है और न ही किसी प्रकार से साधुओं की परंपरा में हैं इसलिए अखाड़ा परिषद ने इन दोनों का बहिष्कार किया है.

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने घोषणा की है कि जो भी साधु समाज इनके कार्यक्रमों में जाता है या इन्हें बुलाता है, उसका भी अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद द्वारा बहिष्कार माना जाएगा. इससे पहले अखाड़ा परिषद ने 10 सितंबर, 2017 को फर्जी बाबाओं की पहली सूची जारी थी जिसमें 14 नाम शामिल थे.

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इनमें आशाराम बापू, गुरमीत राम रहीम, सुखविंदर कौर उर्फ राधे मां, सच्चिदानंद गिरि, ओमबाबा उर्फ विवेकानंद झा, निर्मल बाबा, इच्छाधारी भीमानंद उर्फ शिवमूर्ति द्विवेदी, स्वामी असीमानंद, ओम नमः शिवाय बाबा, नारायण साई, रामपाल, कुश मुनि, मलखान गिरि और बृहस्पति गिरि शामिल थे. अखाड़ा परिषद द्वारा 29 दिसंबर, 2017 को फर्जी बाबाओं की दूसरी सूची जारी की गई जिसमें दिल्ली के विरेन्द्र दीक्षित कालनेमी, बस्ती के सचिदानंद सरस्वती और इलाहाबाद की त्रिकाल भवंता के नाम शामिल थे.

First published: 17 March 2018, 8:34 IST
 
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