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अखिलेश कैबिनेट में बलराम यादव और नारद राय की वापसी

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 June 2016, 11:55 IST

उत्तर प्रदेश में सवा चार साल पुराने अखिलेश यादव मंत्रिमंडल का आज विस्तार हुआ है. सबसे अहम बात यह है कि बलराम यादव और नारद राय की कैबिनेट में वापसी हुई है.

बलराम यादव ने सबसे पहले कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली. कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के सूत्रधार रहे बलराम यादव को बर्खास्त कर दिया गया था, लेकिन एक बार फिर उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है.

इसके अलावा बलिया से आने वाले नारद राय की भी मंत्रिपरिषद में वापसी हुई है. इससे पहले नारद राय खादी और ग्रामोद्योग विभाग के मंत्री थे. आज हुआ विस्तार अखिलेश मंत्रिमंडल का सातवां विस्तार है.

राज्यपाल राम नाईक ने इसके अलावा जियाउद्दीन रिजवी, रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रताप शुक्ल को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई. 

रविदास मेहरोत्रा हाल ही में विधान परिषद चुनाव के दौरान पार्टी से नाराज बताए जा रहे थे. उन्हें भी आज हुए कैबिनेट विस्तार में जगह मिली है. उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस विस्तार को अहम माना जा रहा है. 

सात महीने बाद नारद राय की वापसी

मंत्रिमंडल विस्तार में बलराम यादव के साथ ही नारद राय को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई गई. इसके अलावा लखनऊ के रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रताप शुक्ल के साथ ही बलिया के जियाउद्दीन  रिजवी पहली बार मंत्री बने हैं.

नारद राय की सात महीने बाद अखिलेश कैबिनेट में वापसी हुई है. पिछले साल 29 अक्टूबर को अखिलेश यादव ने जिन आठ मंत्रियों को बर्खास्त किया था, नारद राय उनमें से एक थे. गुटबाजी की शिकायत के बाद उन पर कार्रवाई की गई थी.

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में जातीय और क्षेत्रीय संधुलन साधने के मकद से यह विस्तार किया गया है. लखनऊ मध्य से विधायक रविदास मेहरोत्रा और सरोजनीनगर से तीसरी बार विधायक बने शारदा प्रताप शुक्ल को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की शपथ दिलाई गई.

वहीं बलिया जिले की सिकंदपुर विधानसभा सीट से विधायक जियाउद्दीन रिजवी को मंत्री बनाकर कौमी एकता दल विवाद को लेकर सियासी समीकरण साधने की कवायद की गई है.

समारोह से दूर नाराज शिवपाल

इस बीच यूपी के लोक निर्माण मंत्री और सीएम अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में नहीं शामिल हुए.

जहां एक ओर अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में पांच नए मंत्री शामिल किए गए, वहीं समारोह स्थल लखनऊ से दूर शिवपाल यादव अपने गृह क्षेत्र इटावा में बने रहे. माना जा रहा है कौमी एकता दल प्रकरण के बाद अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच सब कुछ ठीक नहीं है. हालांकि दोनों ने बयान दिया था कि इस मामले को लेकर समाजवादी पार्टी में कोई कलह नहीं है. 

अखिलेश यादव ने कहा था कि कौमी एकता दल का विलय पार्टी का अंदरूनी मामला है और इस पर पार्टी फोरम में ही चर्चा होगी. वहीं एक टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने साफ किया था कि वे मुख्तार अंसारी को समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं होने देंगे.

लखनऊ में पिछले हफ्ते शिवपाल यादव की मौजूदगी में कौमी एकता दल का सपा में विलय हुआ था, लेकिन संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा था कि मुख्तार अंसारी और उनकी पार्टी कौमी एकता दल समाजवादी पार्टी में नहीं शामिल होंगे.

First published: 27 June 2016, 11:55 IST
 
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