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प्रजापति की वापसीः अखिलेश के ब्रांड पर दाग़

अतुल चंद्रा | Updated on: 11 February 2017, 5:46 IST
QUICK PILL
  • अखिलेश सरकार ने इस बात को और पक्का कर दिया कि उनकी सरकार ‘भ्रष्टों की और भ्रष्टों के लिए’ सरकार है. जिस व्यक्ति के खिलाफ अदालत के आदेश पर सीबीआई जांच चल रही हो, उसे मंत्री बनाना सरकार में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना होगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट को झटका देते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को गायत्री प्रसाद प्रजापति को दोबारा कैबिनेट में शामिल कर लिया. उन्हें 14 दिन पहले ही बर्खास्त किया गया था. प्रजापति को बर्खास्त करके अखिलेश ने अपनी छवि साफ करने की कोशिश की थी लेकिन अंततः यह एक दिखावे से ज्यादा और कुछ साबित नहीं हुआ.

28 जुलाई को मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले और न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने जांच एजेंसी को आदेश दिए थे कि यह पता लगाया जाए कि 2012 में खानों की लीज अवधि समाप्त होने के बाद उसे गैर कानूनी रूप से बढ़ाया गया था क्या? मामले की सीबीआई जांच के आदेश देते हुए अदालत ने राज्य के जिला मजिस्ट्रेटों द्वारा पेश सभी हलफनामों को ‘फर्जी’ करार दिया, जिनमें कहा गया था कि उनके जिलों में कहीं अवैध खनन नहीं हो रहा है. कोर्ट ने खनन विभाग के प्रधान सचिव द्वारा पेश हलफनामे को ‘छलावा’ बताया, जिसमें कहा गया था कि अवैध खनन के आरोपों की जांच के लिए कमेटी बनाई गई है.

प्रजापति को बर्खास्त करते वक्त मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह जताने की कोशिश की थी कि वे अपने मंत्रालय से भ्रष्ट लोगों का सफाया कर रहे हैं. साथ ही चाचा शिवपपाल को भी लपेेटे में ले लिया था. अब लगता है, जैसे उन्होंने अपने बूते से ज्यादा कुछ कर लिया था. मुलायम ने एक झटके में ही उनके सारे फैसले पलट दिए और दिखा दिया कि सपा में असली बॉस कौन है. मुलायम ने ही अखिलेश की शर्मिन्दगी की परवाह न करते हुए कार्यकर्ताओं को प्रजापति की मंत्रिमंडल में वापसी की सूचना दी.

मुलायम के चरणों में लेट गए प्रजापति

प्रजापति को बर्खास्त करने से पहले अखिलेश शायद यह भूल गए कि अमेठी विधायक इन्हीं प्रजापति के कारण मुलायम ने कथित तौर पर आईपीएस अमिताभ ठाकुर को धमकी दी थी, जो उनके चहेते मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे थे. सोमवार को शपथ ग्रहण समारोह में प्रजापति ने अखिलेश के पैर तीन बार छुए किए लेकिन मुलायम के चरणों में तो लेट ही गए. प्रजापति के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी. आखिरकार वे ही थे जो यादव परिवार में कलह का कारण बने.

चाहे या ना चाहे अखिलेश सरकार ने इस बात को और पक्का कर दिया कि उनकी सरकार ‘भ्रष्टों की और भ्रष्टों के लिए’ सरकार है. बीजेपी ने प्रजापति की मंत्रिमंडल में वापसी को ‘भ्रष्टाचार को खुले आम बढ़ावा देना’ कहा है. बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता केशव प्रसाद मौर्य ने कहा जिस व्यक्ति के खिलाफ अदालत के आदेश पर सीबीआई जांच चल रही हो, उसे मंत्री बनाना सरकार में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना होगा. अपने कार्यकाल में समाजवादी पार्टी सरकार ने सारे गलत कारणों से हाई कोर्ट का विरोध किया. अगर अखिलेश सरकार ने हाई कोर्ट की परवाह न करते हुए प्रजापति को पुनः मंत्रिमंडल में शामिल किया तो दूसरी ओर नोयडा के मुख्य अभियंता यादव सिंह के खिलाफ हाई कोर्ट के आदेश पर चल रही सीबीआई जांच रुकवाने की कोशिश की. सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख को देखने के बाद ही सरकार पीछे हटी. यादव सिंह के खिलाफ फिलहाल जांच चल रही है.

अनिल यादव को भी हाई कोर्ट ने बर्खास्त किया था

इसी प्रकार, उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग अध्यक्ष अनिल यादव विभिन्न सरकारी नौकरियों में भर्ती में अनियमितता के गंभीर आरोप झेल रहे हैं. सरकार ने उनको तब तक नहीं हटाया जब तक कि हाई कोर्ट ने उन्हें बर्खास्त नहीं कर दिया. भ्रष्ट मंत्रियों और नौकरशाहों की सरपरस्ती करने की अखिलेश की आदत है, इसमें कोई अचरज नहीं है. उन्होंने दो अत्यधिक भ्रष्ट नौकरशाहों अखंड प्रताप सिंह और नीरा यादव को सुप्रीम कोर्ट के मना करने के बावजूद मुख्य सचिव बनाया. इससे पहले मुलायम सिंह यादव भी एक कवयित्री की हत्या के आरोपी अमरमणि त्रिपाठी का बचाव कर चुके हैं.

आई जी रैंक के अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने 2015 में एक पुलिस रिपोर्ट दर्ज करवाई, जिसमें दावा किया गया था कि मुलायम ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी कि वे प्रजापति के खिलाफ लोकायुक्त अदालत में चल रहा केस वापस ले ले. उनकी आरटीआई कार्यकर्ता पत्नी नूतन ने प्रजापति पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई थी. प्रजापति ने बीपीएल कार्ड होल्डर के तौर पर अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी और अब उनकी संपत्ति 942 करोड़ रूपए से अधिक है.

First published: 28 September 2016, 3:02 IST
 
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