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चुनावी साल में उत्तर प्रदेश सरकार की पत्रकार आवास योजना

अतुल चंद्रा | Updated on: 29 August 2016, 7:44 IST

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में 500 पत्रकारों को आवंटित किए गए सरकारी आवास खाली करने का नोटिस देने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पत्रकारों के लिए एक नई आवासीय योजना की घोषणा की है. सरकार द्वारा आदेश जारी करने के बाद ही सब्सिडाइज्ड हाउसिंग योजना की पूरी जानकारी के बारे में पता चल सकेगा.

मुख्यमंत्री ने यह घोषणा अपने आधिकारिक निवास पर पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में की. मुख्यमंत्री ने कहा कि वह चाहते हैं कि हर पत्रकार के पास अपना खुद का मकान हो.

यदि मुख्यमंत्री अपना वादा निभाते हैं तो वे अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों मुलायम सिंह यादव और राजनाथ सिंह के नक्शेकदम पर चलेंगे जिन्होंने पत्रकारों को अफोर्डेबल आवास देने के कदम का सूत्रपात किया था.

हालांकि मुख्यमंत्री के अधिसंख्य पत्रकारों और मीडिया घरानों के साथ मधुर सम्बंध हैं, अच्छे रिश्ते हैं और वे इसका आनन्द भी उठाते हैं, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनकी इस घोषणा को फील गुड फैक्टर में इजाफा करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

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भारतीय जनता पार्टी के राज्य महासचिव विजय बहादुर पाठक चाहते हैं कि सरकार राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने पर अपना ध्यान केंद्रित करे बजाए आवास जैसे सांसारिक मुद्दों के. उन्होंने तुरन्त ही यह भी जोड़ा कि पत्रकारों के कल्याण को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए.

उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष प्रांशु मिश्र का कहना है कि आवास योजना को लेकर विचार-विमर्श का यह समय प्रासंगिक नहीं है लेकिन ठीक इसी समय चिन्ता इस बात की है कि 500 पत्रकारों को आवास खाली करने के जो नोटिस दिए गए हैं, उस पर तुरन्त ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

सूत्रों ने दावा किया है कि सरकार पत्रकारों के कल्याण से मुंह नहीं मोड़ेगी. इस दिशा में काम जारी है

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकारी आवास खाली करने के नोटिस दिए गए हैं. शीर्षस्थ न्यायालय ने सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थाई आवास दिए जाने की नीति को खारिज कर दिया है.

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि शीर्षस्थ कोर्ट के आदेश के अनुपालन में नोटिस जारी कर दिए गए हैं लेकिन पत्रकारों का तर्क है कि कोर्ट का आदेश पूर्व मुख्यमंत्रियों, ट्रस्टों, सोसाइटीज और संगठनों के लिए है, आदेश में मीडिया कर्मियों का उल्लेख नहीं है.

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सूत्रों ने दावा किया है कि सरकार पत्रकारों के कल्याण से मुंह नहीं मोड़ेगी. इस दिशा में काम जारी है. इन सूत्रों का यह भी कहना है कि इन आवंटनों को नियमित करने के लिए विधानसभा के वर्तमान सत्र में एक विधेयक लाया जाएगा.

राज्य के प्रमुख सूचना सचिव नवनीत सहगल ने पत्रकारों के एक शिष्टमंडल से कहा है कि सभी मुद्दों को देखा जा रहा है. फोटो पत्रकार एसएम परी, जिन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने गए फोटो पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की थी, का कहना है कि सरकार की अफोर्डेबल आवास योजना के दायरे में सभी पत्रकार आएंगे न कि केवल फोटो पत्रकार. आवश्यक सरकारी आदेश जारी होने में 10-15 दिन लग ही जाएंगे.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह ने नब्बे के दशक में जब पहली बार पत्रकारों, राजनीतिकों और नौकरशाहों को प्लॉटों का आवंटन करने की नीति की शुरुआत की थी, तब इस विवाद ने जोर पकड़ लिया था कि प्लॉट्स सिर्फ उन्हीं को दिए गए हैं जो मुख्यमंत्री के चहेते हैं. यह भी आरोप लगा था कि अनेक पत्रकारों ने अपनी सम्पत्ति के लिए सरकारी शुल्क भी अदा नहीं किया.

कई मामलों में यह भी देखने में आया कि यह खर्च सरकार ने वहन किया और सरकारी शुल्क के भुगतान के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष का इस्तेमाल किया गया.

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अमर सिंह को भी आर्थिक रूप से गरीब वर्ग की श्रेणी में पहले 35 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया था

जब मायावती उप्र की मुख्यमंत्री बनीं तब उन्होंने जांच के आदेश दिए कि कितने राजनीतिज्ञों, नौकरशाहों और पत्रकारों को गोमती नगर की पॉश कालोनी विपुल खंड में प्लॉट्स दिए गए.

लखनऊ विकास प्राधिकरण की प्रतिष्ठित विपुल खंड योजना में छह सेक्टर थे जिसमें से केवल दो ही जनता के लिए थे. बाकी बचे 500 प्रीमियम प्लॉट्स तत्कालीन मुख्यमंत्री के सचिवालय के आदेश पर पत्रकारों, राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स के लिए आरक्षित किए गए थे.

समाजवादी पार्टी के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह को भी आर्थिक रूप से गरीब वर्ग की श्रेणी में पहले 35 वर्ग मीटर का प्लॉट आवंटित किया गया था. बाद में उसे 354 वर्ग मीटर में तब्दील कर दिया गया.

आने वाली आवास योजना के लिए लाटरी सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि आगे किसी भी विवाद से बचा जा सके. इसका अर्थ यह है कि केवल उन्हीं पत्रकारों को आवास मिलेंगे जो–आर्थिक रूप से कमजोर हैं.

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वर्तमान की मुख्यमंत्री की घोषणा से पत्रकार मकान खाली करने के नोटिस की छाया में निरुत्साहित से लगते हैं क्योंकि उनके पास मकान खाली करने के लिए सिर्फ 15 दिन का ही समय बचा है.

First published: 29 August 2016, 7:44 IST
 
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