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अखिलेश के मंत्री ने 22 करोड़ महीने में बेंच दिया सोनघाटी!

आवेश तिवारी | Updated on: 15 September 2016, 7:18 IST
QUICK PILL
  • उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले की जो कहानी हम बताने जा रहे हैं वो उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात बने न बने लेकिन यह सच है कि इस कहानी ने सोनभद्र जिले को नरक से भी बदतर बना दिया.
  • सरकार द्वारा संरक्षित खनन माफियाओं का यह सिंडिकेट एमएम-11 जिसे परमिट भी कहते हैं के लिए प्रति सौ पन्ने एक लाख चालीस हजार की वसूली किया करता है. इस वसूली को सोनभद्र के आम उद्यमी की भाषा में वीवीआईपी टैक्स कहते हैं.

उत्तर प्रदेश के खनन घोटाले की जो कहानी हम बताने जा रहे हैं वो उत्तर प्रदेश के अखिलेश यादव सरकार के लिए शर्मिंदगी की बात बने न बने लेकिन यह सच है कि इस कहानी ने सोनभद्र जिले को नरक से भी बदतर बना दिया. 

क्या आप यकीन करेंगे कि अखिलेश यादव की सरकार में यूपी के सोनभद्र में लाइमस्टोन और डोलोमाईट की खदानों में बकायदा वसूली के लिए ठेके हुआ करते हैं?

जी हां,अखिलेश के खनन मंत्री गायत्री प्रजापति ने खनन उद्यमियों से वसूली के लिए बकायदे सिंडिकेट बना रखा था. आज गायत्री प्रजापति भले ही बर्खास्त किये जा चुके हो लेकिन सिंडिकेट ज्यों का त्यों काम कर रहा है.

वीवीआईपी वसूली का बड़ा खेल

सरकार द्वारा संरक्षित खनन माफियाओं का यह सिंडिकेट एमएम-11 जिसे परमिट भी कहते हैं के लिए प्रति सौ पन्ने एक लाख चालीस हजार की वसूली किया करता है. इस वसूली को सोनभद्र के आम उद्यमी की भाषा में वीवीआईपी टैक्स कहते हैं.

अकेले सितम्बर माह के लिए सोनभद्र जिले में अवैध वसूली के लिए सिंडिकेट को 22 करोड़ में ठेका दिया गया था. अखिलेश के मंत्री रहे गायत्री प्रजापति के कार्यकाल में कथित तौर पर जारी इस धंधे में चालाकी का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि अधिकारी कर्मचारी वसूली की रकम बीच में हजम न कर सकें इसलिए सिंडिकेट के मामले से वसूली की व्यवस्था की गई थी.

यह याद रखना चाहिए कि मायावती के शासनकाल में जब बाबूसिंह कुशवाहा खनन मंत्री थे तब कहा जाता है कि शराब किंग रहे पोंटी चड्ढा के माध्यम से यह वसूली हुआ करती थी. 

हांलाकि बाद में पोंटी चड्ढा की हत्या हो गई. आज यह सिंडिकेट समाजवादी पार्टी में ऊंचा रसूख रखने वाले खनन माफियाओं के पास है. इनके खिलाफ अवैध खनन को लेकर पूर्व में भी कई मामले दर्ज रहे हैं.

लाशों के ढेर पर भ्रष्टाचार की अलख

अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में हुए खनन घोटाले की जड़ों को जानने के लिए 27 फरवरी, 2012 की उस घटना को जरुर याद कर लेना चाहिए जब एक अवैध खदान में हुए आकस्मिक विस्फोट के दौरान सोनभद्र में 12 से ज्यादा मौते हुई थी.

यह वो वक्त था जब प्रदेश में अखिलेश सरकार चुनाव लड़कर सत्ता में आने की तैयारी कर रही थी. इस लोमहर्षक घटना के बाद सोनभद्र की दो सौ से ज्यादा खदाने बंद कर दी गई थी. 

अखिलेश सरकार ने सत्ता में आते ही जिलाधिकारी बीबी पन्त का स्थानानातरण कर दिया था क्योंकि वो बंद खदानों को चालू करने को तैयार नहीं थे.

बिल्ली-मारकुंडी में जिन खदानों को मंजूरी दी गई उन सभी जगहों पर वन विभाग द्वारा धारा-20 का प्रकाशन नहीं हुअा

उसके बाद सुभाष एलवाई को सोनभद्र का जिलाधिकारी बना दिया गया लेकिन उन्होंने भी खदानों को पुनः चालू करने से इनकार कर दिया. जब आईएएस अधिकारियों ने खनन नीतियों का हवाला देकर इन खदानों को खोले जाने से इनकार किया तो प्रदेश सरकार ने जिले से आईएएस जिलाधिकारी को हटाकर, पीसीएस रैंक के मुख्य विकास अधिकारी के अनुमोदन से बंद खदानों को पुनः चालू करवाया. गौरतलब है कि पीपीएस वे अधिकारी होते हैं जो सीधे राज्य सरकार से कृपापात्र होते और आईएएस रैंक के आकांक्षी होते हैं.

गौरतलब है कि प्रदेश में 31 मई, 2012 से गिट्टी बालू के खनन में ई टेंडरिंग की प्रक्रिया लागू की गई थी लेकिन अब जबकि अखिलेश सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है, तब भी ई टेंडरिंग की प्रक्रिया अपनाई नहीं जा सकी है.

लाशों के ढेर पर भ्रष्टाचार की अलख

अखिलेश यादव सरकार के कार्यकाल में हुए खनन घोटाले की जड़ों को जानने के लिए 27 फरवरी, 2012 की उस घटना को जरुर याद कर लेना चाहिए जब एक अवैध खदान में हुए आकस्मिक विस्फोट के दौरान सोनभद्र में 12 से ज्यादा मौते हुई थी.

यह वो वक्त था जब प्रदेश में अखिलेश सरकार चुनाव लड़कर सत्ता में आने की तैयारी कर रही थी. इस लोमहर्षक घटना के बाद सोनभद्र की दो सौ से ज्यादा खदाने बंद कर दी गई थी. अखिलेश सरकार ने सत्ता में आते ही जिलाधिकारी बीबी पन्त का स्थानानातरण कर दिया था क्योंकि वो बंद खदानों को चालू करने को तैयार नहीं थे.

उसके बाद सुभाष एलवाई को सोनभद्र का जिलाधिकारी बना दिया गया लेकिन उन्होंने भी खदानों को पुनः चालू करने से इनकार कर दिया. 

जब आईएएस अधिकारियों ने खनन नीतियों का हवाला देकर इन खदानों को खोले जाने से इनकार किया तो प्रदेश सरकार ने जिले से आईएएस जिलाधिकारी को हटाकर, पीसीएस रैंक के मुख्य विकास अधिकारी के अनुमोदन से बंद खदानों को पुनः चालू करवाया. गौरतलब है कि पीपीएस वे अधिकारी होते हैं जो सीधे राज्य सरकार से कृपापात्र होते और आईएएस रैंक के आकांक्षी होते हैं.

गौरतलब है कि प्रदेश में 31 मई, 2012 से गिट्टी बालू के खनन में ई टेंडरिंग की प्रक्रिया लागू की गई थी लेकिन अब जबकि अखिलेश सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है, तब भी ई टेंडरिंग की प्रक्रिया अपनाई नहीं जा सकी है.

खुली आँखों से दिखता है यूपी का खनन घोटाला

अखिलेश सरकार के मंत्री गायत्री प्रजापति ने अपना कार्यभार ग्रहण करते ही वसूली का खेल शुरू कर दिया. खनन घोटाला किस हद तक प्रदेश सरकार की नाक के नीचे होता रहा इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि लगभग 2,500 हेक्टेयर में फैले बिल्ली-मारकुंडी खनन क्षेत्र में जिन खदानों को मंजूरी दी गई उन सभी जगहों पर वन विभाग द्वारा धारा-20 का प्रकाशन नहीं किया गया.

भारतीय वन अधिनियम की धारा-20 का मतलब उस भूमि की प्रकृति को निर्धारित करना है कि वो भूमि वन भूमि है या राजस्व की भूमि. यानि कि प्रदेश सरकार के दबाव में वन विभाग ने भी नियम कायदों को ताक पर रखकर बकायदे अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर दिए. 

खनन घोटाले को नापने का सबसे बेहतर तरीका है कि आप खनन भूमि की नाप और उसके समतुल्य जारी किये गए एमएम-11 में दी गई माप की गणना कर लें. लेकिन सोनभद्र में कई खदानें ऐसी हैं जिनमें खनन हुआ ही नहीं है केवल परमिट की काला बाजारी से करोड़ों रुपए का वारा न्यारा कर दिया गया है.

First published: 15 September 2016, 7:18 IST
 
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