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लड़ाई का अंत, अखिलेश की हार, शिवपाल का सिक्का मजबूत हुआ

अभिषेक पराशर | Updated on: 16 September 2016, 21:20 IST
QUICK PILL
  • मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही लड़ाई फौरी तौर पर थमती नजर आ रही है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए शिवपाल यादव के सभी छीने गए मंत्रालयों को वापस दिए जाने की घोषणा कर दी है. इस पूरी लड़ाई में पद और अधिकार के मामले में जीत शिवपाल यादव की हुई है.
  • सरकार और पार्टी में नियंत्रण की लड़ाई को बढ़ता देख खुद मुलायम सिंह यादव ने मामले में दखल देते हुए बर्खास्त किए गए मंत्री को अखिलेश यादव से बिना पूछे ही बहाल किए जाने की घोषणा कर दी तो देर शाम तक बदलते घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव को सभी मंत्रालय दिए जाने का ऐलान कर दिया.

मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही लड़ाई फौरी तौर पर थमती नजर आ रही है. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव  ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए शिवपाल यादव के सभी छीने गए मंत्रालयों को वापस लौटा दिया है. इस पूरी लड़ाई में पद और अधिकार के मामले में जीत शिवपाल यादव की हुई है.

शिवपाल को न केवल उनके सभी मंत्रालय मिल गए हैं बल्कि उन्हें उत्तर प्रदेश समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष का भी पद मिल गया है. इससे पहले यह पद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पास था. गायत्री प्रजापति से लेकर शिवपाल यादव को विभाग वापस दिए जाने तक का फैसला अखिलेश यादव की मर्जी के बिना हुआ.

मुख्य सचिव दीपक सिंघल की बर्खास्तगी के बाद जब मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी पद से बर्खास्त किया तब जवाबी कार्रवाई करते हुए अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव से सिंचाई, लोक निर्माण और राजस्व जैसे अहम मंत्रालय छीन लिए थे. इसके बाद शिवपाल यादव के पास केवल समाज कल्याण विभाग की ही जिम्मेदारी बची थी.

उम्मीद के मुताबिक ही तिलमिलाए शिवपाल यादव ने यह कहते हुए सरकार के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था कि अब इस सरकार में काम करने का कोई मतलब नहीं है. उनका यह पैंतरा काम कर गया और महज 24 घंटों के भीतर न केवल उन्हें उनका विभाग मिल गया बल्कि वह पार्टी के भीतर पहले से और अधिक ताकतवर होकर लौटे हैं. 

सरकार और पार्टी में नियंत्रण की लड़ाई को बढ़ता देख खुद मुलायम सिंह यादव ने मामले में दखल देते हुए बर्खास्त किए गए मंत्री को अखिलेश यादव से बिना पूछे ही बहाल किए जाने की घोषणा कर दी तो देर शाम तक बदलते घटनाक्रम में मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव को सभी मंत्रालय दिए जाने का ऐलान कर दिया.

समाजवादी पार्टी में चल रही लड़ाई बेशक फौरी तौर पर थमती नजर आ रही है. लेकिन अब यह बात साफ हो चुकी है कि अखिलेश यादव भले ही मुख्यमंत्री हो लेकिन अहम अधिकारियों की नियुक्ति से लेकर सभी बड़े फैसले वह अपनी मर्जी से नहीं ले पाते हैं. 

अभी भी इन फैसलों में उन्हें मुलायम सिंह यादव की तरफ देखना पड़ता है. कई बार वह इन फैसलों को पलटने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाते बल्कि उल्टे उन्हें अपने लिए गए फैसलों को पलटने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

2017 के बेहद अहम विधानसभा चुनाव में विपक्षी दल अखिलेश को लाचार मुख्यमंत्री की तरह पेश कर राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करेंगे. 

अभी तक यह बात कही जाती थी लेकिन मुलायम सिंह यादव ने जिस तरह से फैसले लिए हैं, उसने यह साबित कर दिया है कि सरकार का चेहरा भले ही अखिलेश यादव  हो लेकिन उसकी बागडोर मुलायम सिंह यादव के हाथों में ही है. 

हालांकि इस लड़ाई में अखिलेश की छवि वैसे नेता के तौर पर उभरी है जो बेहद साफ छवि का है लेकिन परिवार के हितों के आगे उसे झुकना पड़ता है. चुनाव में समाजवादी पार्टी को इसका खमियाजा उठाना पड़ सकता है. 

मुलायम सिंह के दखल ने भले ही झगड़े को लगभग खत्म कर दिया है लेकिन अगर 2017 विधानसभा  चुनाव के नतीजे मनमुताबिक नहीं आए तो अभी सुलह कराकर दबा दी गई यह लड़ाई दूसरा रूप ले सकती है. मुमकिन है कि तब इस लड़ाई का निपटारा किसी समझौते से भी नहीं हो पाए और अभी तक एक जुट रहा मुलायम का यह कुनबा टूट कर बिखर जाए.  

First published: 16 September 2016, 21:20 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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