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अखिलेश यादव: मुख्तार अंसारी को सपा में शामिल नहीं होने दूंगा

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 June 2016, 14:54 IST
(फाइल फोटो)

यूपी के सीएम अखिलेश यादव ने कौमी एकता दल के विधायक और माफिया सरगना मुख्तार अंसारी के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अखिलेश ने कहा है कि वो मुख्तार अंसारी को समाजवादी पार्टी में शामिल नहीं होने देंगे.

एक टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने यह बयान दिया है. अखिलेश ने साथ ही कहा कि मुख्तार अंसारी का समाजवादी पार्टी में स्वागत नहीं है.  

'मुख्तार जैसे लोगों को नहीं चाहते'

टेलीविजन चैनल के कार्यक्रम में अखिलेश ने कहा, "हम मुख्तार जैसे लोगों को नहीं चाहते. बतौर मुख्यमंत्री मुझे जो कहना है वो मैं कहूंगा. मैं अपना फैसला खुद लेता हूं." 

अखिलेश यादव के इस बयान के बड़े सियासी मायने हैं. इससे पहले भी आपराधिक छवि के लोगों से वो सार्वजनिक तौर पर दूरी दिखा चुके हैं. एक कार्यक्रम के दौरान जब अतीक अहमद ने उनके करीब आने की कोशिश की थी, तो उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से उन्हें हटाने को कहा था.

इसके अलावा 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के बड़े माफिया डॉन डीपी यादव को पार्टी में शामिल करने का खुले तौर पर विरोध किया था. अखिलेश के विरोध की वजह से डीपी यादव की सपा में एंट्री नहीं हो सकी थी. 

'शिवपाल के फैसले से सहमत नहीं' 

न्यूज़ चैनल के कार्यक्रम में अखिलेश ने यह भी कहा है कि वह कौमी एकता दल के समाजवादी पार्टी में विलय के अपने चाचा शिवपाल यादव के फैसले से सहमत नहीं हैं.

बताया जा रहा है कि अखिलेश यादव जियाउद्दीन रिजवी को मंत्री बना सकते हैं. समाजवादी पार्टी ने आज लखनऊ में पार्टी संसदीय बोर्ड की बैठक बुलाई है. हाल ही में कौमी एकता दल के सपा में विलय के बाद समाजवादी पार्टी में अंदरूनी कलह की बात सामने आ रही थी.

कौमी एकता दल से विलय पर विवाद

हालांकि पार्टी के यूपी प्रभारी शिवपाल यादव ने कहा था कि पार्टी में सब कुछ ठीक है. वहीं अखिलेश यादव ने भी दो दिन पहले ही कहा था कि कौमी एकता दल का विलय सपा का अंदरूनी मामला है और इस पर पार्टी जो फैसला लेगी उसे माना जाएगा. 

शिवपाल ने ये भी दलील दी थी कि कौमी एकता दल मुख्तार अंसारी का नहीं बल्कि अफजाल अंसारी का दल है और अफजाल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. पूर्वांचल के कई जिलों में कौमी एकता दल का प्रभाव है.

अफजाल अंसारी के छोटे भाई मुख्तार अंसारी मऊ सदर और बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी मुहम्मदाबाद सीट से कौमी एकता दल के विधायक है. विधानसभा चुनाव से पहले इस विलय को अहम माना जा रहा था. 

ऐसी संभावना है कि बीच का रास्ता निकालने के लिए कौमी एकता दल के विलय को तो पार्टी सुप्रीमो मुलाय सिंह यादव की मंजूरी मिल जाएगी, लेकिन मुख्तार अंसारी को शामिल नहीं किया जाएगा. तकनीकी तौर पर भी ये मुमकिन नहीं है, क्योंकि मुख्तार अंसारी अभी जेल में बंद हैं.   

First published: 25 June 2016, 14:54 IST
 
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