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नजर लागी राजा तोरे बंगले पर: तैयार हो रहा है अखिलेश का आलीशान बंगला

अनिल के अंकुर | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST

सोमवार को जिस समय सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधास्वरूप मिलने वाले आलीशान बंगलों को दो महीने के भीतर वापस करने का फरमान सुनाया लगभग उसी वक्त शाम-ए-अवध के शहर की एक सुनसान, पॉश सड़क विक्रमादित्य मार्ग पर एक बंगले में कुछ कारीगर खामोशी से रंग-रोगन और साफ-सफाई के काम में लगे हुए थे.

यह बंगला उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मिलना है. हालांकि वो अभी वर्तमान मुख्यमंत्री हैं लेकिन उनके पूर्व मुख्यमंत्री होने की सूरत में यह बंगला उन्हें प्रदेश की सेवा के ईनाम स्वरूप मिलेगा. प्रदेश में ऐसा कानून है कि सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को लखनऊ शहर में एक बंगला आजीवन रहने को मिलता है.

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अखिलेश को मिलने वाले बंगले की पूरी तैयारी कर ली गई है. बंगले की फिनिशिंग का काम तेजी से किया जा रहा है. इस बंगले का काम दिसंबर के पहले-पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. अभी तक जो योजना है उसके मुताबिक अखिलेश इस चुनाव के बाद अपने नए बंगले में जाएंगे.

दो मार्गों को छूता है नया बंगला

लखनऊ की हृदय स्थली हजरतगंज के पास विक्रमादित्य मार्ग के पास अखिलेश का बंगला तैयार किया जा रहा है. इस बंगले से से सटा हुआ पूर्व मुख्यमंत्री सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का भी बंगला है. अभी इस बंगले में अपने पिता के साथ उनके भाई प्रतीक परिवार के साथ रहते हैं.

जिस बंगले को अखिलेश के लिए तैयार किया जा रहा है वह यूपी के कृषि उत्पादन आयुक्त का बंगला था. इस बंगले के पीछे लोक निर्माण विभाग के सर्वेंट क्वाटर थे. अब इस बंगले और सर्वेंट क्वार्टर में अखिलेश यादव रहेंगे. बंगले की भव्यता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसका सामने का गेट विक्रमादित्य मार्ग से शुरू होता है और पिछला दरवाजा कालिदास मार्ग पर खुलता है.

बेल्जियम के शीशे, इटली के पत्थर

तकरीबन तीन एकड़ जमीन पर बन रहे इस हाहाहूती बंगले की साज सज्जा में कोई कोताही नहीं बरती जा रही है. फिलहाल इस बंगले में किसी बाहरी आदमी की इंट्री या ताकझांक पर रोक लगा दी गई है. इस मकान के नवीनीकरण की जिम्मेदारी मुम्बई की एक बड़ी निर्माण कम्पनी को दी गई है. बंगले की रूप रेखा और सजावट दुबई के शेखों के बंगलों की तर्ज पर किया जा रहा है.

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इसमें बेल्जियम से मंगाए गए शीशे लगाए जा रहे हैं तो पत्थर इटली के मंगाए जा रहे हैं. नए बंगले में सीएम के बेडरूम और निजी बाथरूम की साज सज्जा ऐसी होगी कि पांच सितारा होटल के लक्जरी कमरे भी फेल हो जाएं. लोक निर्माण विभाग, विकास प्राधिकरण और राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकारी मिलकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं. यही कारण है कि इन विभागों के अधिकारियों ने पिछले दिनों भव्य भवनों के अध्ययन के लिए इन देशों की यात्राएं भी की थी ताकि काम करने में कोई दिक्कत न आए.

बंगले की रूपरेखा बदलने में खर्च हो गए 50 करोड़

अटकलें हैं कि सीएम अखिलेश यादव के लिए तैयार किए जा रहे इस बंगले की रूपरेखा बदलने में सूबे के विभिन्न विभागों ने अब तक 15 करोड़ रुपये खर्च कर दिया है. यह सब तब है जब सरकार को जमीन पर एक पैसे का खर्च नहीं करना पडा है. पीडब्ल्यूडी विभाग के एक अधिकारी के अनुसार बंगले पर अभी 28 करोड़ खर्च होने का अनुमान है. इसमें मुख्यमंत्री का ऑफिस भी होगा.

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कर्मचारियों के रहने के लिए अलग से क्वार्टर भी इसी बंगले से सटाकर बनाए जाएंगे. ग्रांउड फ्लोर पर तीन हॉल हैं. इन हॉल में बैठकों के आयोजन की समुचित व्यवस्था होगी. ग्राउंड फ्लोर ऑफिस और अतिथियों के लिए आरक्षित किया गया है. फर्स्ट फ्लोर अखिलेश के परिवार के लिए होगा. इस बंगले में चार अलग-अलग ब्लॉक बनाए गए हैं. इन ब्लॉकों में गेस्ट हाउस का कान्सेप्ट भी है. ये गेस्ट हाउस निजी अतिथियों के लिए ही उपयोग में लाया जाएगा. चारों ओर सुरक्षा गार्ड्स भी तैनात करने के इंतजाम इस बंगले में किए जा रहे हैं.

अब देखने की बात यह होगी कि सीएम अखिलेश यादव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने सपनों के इस नए बंगले को अपने नाम कैसे आवंटित कराते हैं.

सुप्रीम कोर्ट का झटका

सुप्रीम कोर्ट से यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों को तगड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने में सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया है. समाजवादी पार्टी के महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन फाइल करेगी.

बता दें कि 12 साल पहले लखनऊ के एक एनजीओ ने पूर्व मुख्यमंत्रियों द्वारा सरकारी बंगले के इस्तेमाल के संबंध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. मामले की सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट में 20 बार लिस्टिंग की गई, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी.

27 नवंबर 2014 को जस्टिस आर दवे, जस्टिस एनवी रामन और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने मामले में सुनवाई करते हुए इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. सोमवार को करीब 20 महीने बाद इस याचिका पर फैसला सुनाया गया.

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लखनऊ के 20 सदस्यों वाले एक एनजीओ ने याचिका दायर की थी. इस एनजीओ में रि‍टायर्ड आईएएस, आईपीएस, जज और टेक्‍नोक्रेट भी शामि‍ल हैं. एनजीओ ने पूर्व सीएम और अन्‍य अयोग्‍य लोगों को गवर्नमेंट बंगला अलॉट करने के खि‍लाफ यह याचिका दायर की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगला देने के यूपी सरकार के नोटिफिकेशन को सोमवार को खारिज कर दिया. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने में बंगला खाली करना होगा. मुख्यमंत्रियों को जीवन भर के लिए बंगला नहीं मिल सकता.

इन्हें खाली करने होंगे बंगले

नए आदेश के तहत यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, मुलायम सिंह यादव, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, रामनरेश यादव, वीर बहादुर सिंह और एनडी तिवारी को अपने बंगले खाली करने होंगे.

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मायावती, बसपा

13 ए, माल एवन्यू है बसपा सुप्रीमो मायावती का बंगला. मायावती 1995,1997, 2002 और 2007 में सूबे की मुख्यमंत्री रही है.

मुलायम सिंह यादव, सपा

5, विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित है मुलायम सिंह का बंगला. मुलायम 1989, 1993 और 2003 में सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

राजनाथ सिंह, बीजेपी

मौजूदा समय में गृह मंत्री को 4 कालिदास मार्ग पर बंगला आवंटित है. यह ठीक सीएम अखिलेश यादव के बंगले 5 कालिदास मार्ग के बगल में है. सन 2000 में राजनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे.

कल्याण सिंह, बीजेपी

मौजूद समय में राजस्थान के गवर्नर कल्याण सिंह को माल एवन्यू स्थित बंगला नंबर 2 अलॉट है. वह 1991 और 1997 में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

राम नरेश यादव, जनता पार्टी

राम नरेश यादव मौजूद समय में मध्य प्रदेश के गवर्नर हैं. उन्हें एक माल एविन्यू स्थित बंगला अलॉट है. वह 1977 में जनता पार्टी की सरकार में सूबे के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

एनडी तिवारी, कांग्रेस

पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी को भी माल एवेन्यू में ही बंगला अलॉट है. वह 1976, 1984, 1988 में प्रदेश के मुख्य मंत्री रह चुके हैं.

First published: 2 August 2016, 8:10 IST
 
अनिल के अंकुर @CatchHindi

संवाददाता, पत्रिका

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