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11 सालों में भारत में शराब पीने वालों की संख्या दोगुनी हो गई, ये रहा मौतों का आंकड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2018, 13:09 IST

शनिवार को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी अल्कोहल एंड हेल्थ 2018 पर वैश्विक जारी रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रति व्यक्ति शराब की खपत 2005 और 2016 के बीच दो गुना बढ़ गई. 2005 में भारतीयों ने 2.4 लीटर शराब का सेवन किया, जो 2010 में 4.3 लीटर तक बढ़ गया और 2016 में यह 5.7 लीटर तक पहुंच गया.

रिपोर्ट के मुताबिक 2005 से 2016 तक अकेले भारत में 2.2 लीटर की वृद्धि के साथ दक्षिण-पूर्व एशिया में शराब की खपत में सबसे ज्यादा वृद्धि की उम्मीद है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में शराब से 30 लाख से ज्यादा लोग मारे गए थे. मृतकों की रिपोर्ट में से तीन से अधिक चौथाई पुरुष थे. कुल मिलाकर शराब के हानिकारक उपयोग से वैश्विक बीमारी के बोझ में 5% से अधिक की वृद्धि होती है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि 100,000 आबादी पर 51.1 पुरुष और 100,000 आबादी पर 27.1 महिलाएं यकृत सिरोसिस से पीड़ित हैं. अल्कोहल के दुरुपयोग से जुड़े कैंसर के परिणामस्वरूप 100,000 आबादी पर 181 पुरुष और प्रति 100,000 आबादी 126.4 महिलाएं हैं.

शराब के कारण सभी मौतों में से 28% घायल होते हैं. इनमे यातायात दुर्घनाएं, आपसी हिंसा से पाचन विकार शामिल हैं. जबकि 21%; कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के कारण 19% शेष संक्रामक बीमारियों, कैंसर, मानसिक विकार और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियों के कारण होते हैं.

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम गेबेरियसस के अनुसार, "बहुत से परिवार और समुदायों को हिंसा, चोटों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, कैंसर और स्ट्रोक जैसी बीमारियों के माध्यम से शराब के हानिकारक उपयोग के परिणामों का सामना करना पड़ता है.

रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर लगभग सभी (95%) देशों में अल्कोहल उत्पादन होता है. इनमें से अधिकतर देशों में बियर विज्ञापन पर कुछ प्रकार के प्रतिबंध हैं, जिनमें टेलीविजन और रेडियो के लिए सबसे आम प्रतिबंध है.

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First published: 30 September 2018, 13:07 IST
 
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