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छत्तीसगढ़: विवादित आईएएस एलेक्स मेनन ने उठाए न्यायिक व्यस्था पर सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 June 2016, 11:47 IST

छत्तीसगढ़ कैडर के आईएएस अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन ने सोशल मीडिया के जरिए एक विवादास्पद टिप्पणी की है. मेनन ने 18 जून को फेसबुक और ट्विटर के जरिए देश की न्यायिक व्यस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि देश में फांसी की सजा पाने वालों में 94 फीसदी दलित और मुस्लिम हैं.

मेनन ने लिखा है, "क्या इंडिया का लीगल सिस्टम पक्षपातपूर्ण है? देश में 94 फीसदी फांसी मुस्लिमों और दलितों को दी जाती है."

हालंकि फेसबुक पर लोगों के द्वारा उनके इस पोस्ट को काफी पसंद किया गया. बहुत से लोगों ने इसे लाइक भी किया है, लेकिन इसके साथ ही इस पर बहस भी शुरू हो गई.

आईएएस एलेक्स पॉल मेनन का फेसबुक वॉल (फेसबुक)

नक्सलियों ने किया था अगवा

आईएएस एलेक्स पॉल मेनन उस समय सुर्खियों में आए थे, जब सुकमा में डीएम रहते हुए 21 अप्रैल 2012 को नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया था.

मेनन 12 दिन तक नक्सलियों के कब्जे में रहे थे. तीन मई 2012 को एक मध्यस्थ की मदद से उनकी रिहाई संभव हो सकी थी. इसके बाद आईएएस मेनन पर नक्सलियों से साठगांठ के आरोप भी लगे थे.

कन्हैया के समर्थन में पोस्ट

इससे पहले इसी साल मार्च में जब वो बलरामपुर के डीएम थे, तब उन्होंने जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के समर्थन में कुछ कंटेंट अपने फेसबुक पर शेयर किए थे.

इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तो मेनन ने सफाई दी थी कि एक जागरूक नागरिक होने के नाते कन्हैया मुद्दे से जुड़े कुछ लिंक्स मैंने फेसबुक पर शेयर किए थे.

उन्हीं विवादों की वजह से बृहस्पति सिंह ने आईएएस एलेक्स पॉल मेनन को नक्सली तक कह दिया था. इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें डीएम पद से हटाकर मंत्रालय में अटैच कर दिया था.

First published: 22 June 2016, 11:47 IST
 
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