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मालेगांव धमाका: सभी 9 अभियुक्त हुए बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 April 2016, 15:56 IST

मुंबई की एक अदालत ने 2006 में हुए मालेगांव धमाकों के मामले में नौ मुस्लिम आरोपियों को बरी कर दिया है. 8 सितंबर 2006 को मालेगांव में एक मस्जिद के पास हुए धमाकों में 37 लोगों की मौत हुई थी. धमाके में करीब सवा सौ लोग जख्मी हुए थे.

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'इंसाफ मिलना बड़ी बात'

वहीं अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मामले के आरोपी रईस अहमद ने कहा कि अदालत से न्याय मिलने में काफी इंतजार करना पड़ा.

रईस अहमद का कहना है, "इंसाफ मिलने में देर हो गई, लेकिन इंसाफ मिल गया ये उनके लिए बहुत बड़ी बात है.


जिन आरोपियों को अदालत ने बरी किया है उनमें एक की मौत हो चुकी है. जबकि छह आरोपी जमानत पर चल रहे हैं. इसके अलावा दो आरोपियों को जुलाई 2011 में हुए मुंबई लोकल धमाकों में दोषी ठहराया जा चुका है.

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raees ahmad

महाराष्ट्र एटीएस ने इस मामले में नौ आरोपियों (सभी मुस्लिम) को गिरफ्तार किया था. 2006 के अंत में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. बाद में जब ये मामला जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया, तो उसने 2010 में एक और चार्जशीट दाखिल की.

2011 से एनआईए के पास जांच


2011 में मामले की जांच एनआईए ने अपने हाथ में ली थी. जब स्वामी असीमानंद ने स्वीकार कर लिया कि बम धमाकों की करतूत हिन्दू कट्टरपंथियों की थी तो जांच एजेंसी ने कुछ और लोगों को आरोपी बनाया.

इनमें सेना के सेवारत अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर भी शामिल थीं. हाल तक, एनआईए को पक्का विश्वास था कि आरोपियों के इसी गुट ने बम धमाके किए थे.

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एनआईए ने न सिर्फ एटीएस और सीबीआई द्वारा जांच में जुटाए गए तथ्यों को खारिज कर दिया, बल्कि उसने आधिकारिक तौर पर बयान दिया कि एटीएस ने मुस्लिम आरोपियों के खिलाफ खड़े किए गए गवाहों पर "दबाव” बनाया था.

इसके बाद मुस्लिम आरोपियों ने अपनी रिहाई के लिए याचिका लगाई थी.


First published: 25 April 2016, 15:56 IST
 
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