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विधि आयोग के 16 सवालों पर पर्सनल लॉ बोर्ड जंग के मूड में

अतुल चंद्रा | Updated on: 14 October 2016, 8:27 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • भारत सरकार के विधि आयोग ने 16 सवालों की लिस्ट जारीकर ट्रिपल तलाक़ और कॉमन सिविल कोड पर जनता से राय मांगी है. 
  • ऑल इंडिया मु्स्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आयोग की इस पहल के ख़िलाफ़ दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस कर मोदी सरकार पर हमला बोला है. 
  • बोर्ड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह बताते हुए इस पहल को ख़तरनाक और समाज को बांटने वाला बताया है. 

भारत के विधि आयोग 16 सवालों की लिस्ट जारीकर देश में एक नई बहस पैदा कर दी है. इन सवालों में ट्रिपल तलाक़ जैसे मुद्दे शामिल हैं. आयोग ने यह भी पूछा है कि क्या इसका विकल्प समान नागरिक संहिता है? आयोग के इन सवालों पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की भौंहें चढ़ गई हैं. बोर्ड ने कहा है कि यह मुसलमानों के संवैधानिक अधिकार पर सीधा हमला है. 

बोर्ड के मौलाना वली रहमानी ने विधि आयोग पर सरकार का एजेंट होने का आरोप लगाते हुए कहा कि मुसलमान इसका बायकॉट करेंगे. बोर्ड के सदस्य और लखनऊ की ईदगाह के इमाम मौलाना रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि विधि आयोग की इस पहल के ख़िलाफ़ गुरुवार से एक सिग्नेचर कैंपेन शुरू किया गया है.

महली ने कहा, 'जब राम मंदिर और दूसरे मुद्दे धराशायी हो गए तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए यह समाज के ध्रुवीकरण की ख़तरनाक कोशिश है. यह भी कि सरकार ने यह एक पैंतरा चला है महंगाई और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए'.

पीछे नहीं हटेंगे

इस मुद्दे पर मुसलमान पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं, वहीं महिलाओं से जुड़े कानून में कोडिफ़िकेशन की कोशिश भारतीय जनता पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में गेम चेंजर हो सकती है. महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर मुस्लिम समाज को एकजुट करने की नीयत से लखनऊ में फिलहाल एक पर्चा बांटा जा रहा है. मोटे तौर पर इसमें तीन प्वाइंट शामिल किए गए हैं. इसमें लिखा है... 

1- हम इस्लामिक कानून से पूरी तरह संतुष्ट हैं. ख़ासकर निक़ाह, तलाक़, खुला, फश्ख़ और विरासत के मुद्दे पर. हम इन सवालों पर मिली इस्लामिक हिदायत से इत्तेफाक़ रखते हैं और इनमें किसी भी तरह के बदलाव की गुंजाइश का पूरी ताक़त से विरोध करते हैं. 

2- भारत का संविधान हर धर्म के अनुयायियों को अपना धर्म मानने की पूरी आज़ादी देता है. लिहाज़ा, समान नागरिक संहिता हमें किसी भी रूप में मंज़ूर नहीं है. 

3- हम शरीयत के क़ानून को बचाने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं. 

इस पर्चे पर हस्ताक्षर करने वाले का नाम, उनके पिता/पति का नाम और पता होगा. 

मौलाना रशीद फिरंगी महली ने कहा है कि यह पर्चा जुमे की नमाज़ के बाद मस्जिदों में भी बंटवाया जाएगा और नमाज़ के बाद ख़ुतबा में भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा. 

पलटवार

दिल्ली में जब मौलाना वली रहमानी से पूछा गया कि क्या उनका विरोध विधि आयोग के बायकॉट तक सीमित रहेगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'आगे आगे देखिए होता है क्या'. वहीं महली ने कहा है कि हम कुछ बड़ा करने की तैयारी कर रहे हैं और नवंबर में कोलकाता में होने वाली बोर्ड की बैठक में फ़ैसला लिया जाएगा. 

हालांकि विधि आयोग ने अपनी अपील में समान नागरिक संहिता की व्यवहारिकता पर स्वस्थ बहस की उम्मीद जताई है. साथ ही यह भी कहा है कि आयोग का फोकस सभी धर्मों के पारिवारिक कानूनों पर होगा. मगर मुसलमानों ने इसका तीखा विरोध करते हुए कहा है कि यह देश की सांस्कृतिक विविधता को ख़त्म करने और सभी को एक रंग में रंगने की कोशिश है. 

हालांकि ट्रिपल तलाक़ के मुद्दे पर मुस्लिम समाज एकमत नहीं है. शिया नवाब के एक वंशज ने नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा कि ट्रिपल तलाक़ की प्रथा शिया समुदाय में नहीं है. 

सवाल महिलाओं के

मुस्लिम विमंस पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ट्रिपल तलाक़ को ग़ैरकानूनी करार देते हुए कहती हैं, 'हर दिन मुसलमानों के हर समाज की औरतें उनके पास ट्रिपल तलाक़, खुला, ख़र्च समेत शादी से जुड़े मुद्दे लेकर आती हैं'. 

समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर विधि आयोग की पहल पर उन्होंने कहा, 'मैं ख़ुद सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता हूं. मैने मांग की है कि ट्रिपल तलाक़ और बहुविवाह की प्रथा को ख़त्म किया जाए और महिलाओं को खुला के तहत उनके अधिकार दिए जाएं.'

वहीं मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहा है, वहीं मुस्लिम औरतों के एक समूह की सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित पड़ी हैं. इनमें ट्रिपल तलाक़ जैसी व्यवस्था को ख़त्म करने की मांग की गई है. 

First published: 14 October 2016, 8:27 IST
 
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