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हुर्रियत के खाली हाथ लौटाने के बाद आज जम्मू में सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2016, 10:57 IST
(पीटीआई)

हुर्रियत नेताओं के खाली हाथ लौटाने के बाद सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल आज जम्मू में है. इससे पहले राज्य में शांति बहाली की कोशिशों को उस वक्त झटका लगा, जब मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के न्योते को अलगाववादी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस ने ठुकरा दिया. 

अलगाववादियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए विपक्ष के पांच सांसदों के उनसे बातचीत के प्रयास को नामंजूर कर दिया. वहीं सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और राज्य के कुछ अन्य नेताओं के साथ चर्चा करके कश्मीर घाटी में आठ जुलाई से जारी अशांति को खत्म करने को लेकर चर्चा की. 

कश्मीरी पंडितों-कारोबारियों से मुलाकात

आज सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल जम्मू में कश्मीरी पंडितों और कारोबारियों से हालात पर चर्चा करने वाला है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि अपने दौरे के पहले दिन प्रतिनिधिमंडल ने समाज के विभिन्न वर्गों से संबंधित करीब 30 समूहों में आये करीब 200 सदस्यों से मुलाकात की.

प्रतिनिधिमंडल के पांच सदस्यों का एक समूह उससे अलग होकर अलगाववादियों से मिलने गया. चार सांसद, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई नेता डी राजा, जदयू नेता शरद यादव और आरजेडी के जयप्रकाश नारायण समूह से अलग हुए और गिलानी से मिलने के लिए उनके आवास पर गए. 

गिलानी ने नहीं खोला घर का गेट

पिछले 60 दिनों से गिलानी अपने घर में नजरबंद हैं. इसके अलावा एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के उदारवादी धड़े के नेता मीरवाइज उमर फारूक से चश्मा शाही उप जेल में अलग से मिलने के लिए गए.

वहीं अली शाह गिलानी के आवास के दरवाजे सांसदों के लिए खोले तक नहीं गए, जबकि बाहर लोगों ने नारेबाजी की. गिलानी ने उन्हें खिड़की से देखा, लेकिन सांसदों से मिलने से इनकार कर दिया. 

'किसी से भी बातचीत को तैयार'

शरद यादव ने कहा, "हमारा यह प्रयास यह दिखाने के लिए है कि हम किसी से भी बातचीत के लिए तैयार हैं, चाहे वे मिलने के लिए तैयार हों या नहीं."

इसके साथ ही समूह, जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक से भी मुलाकात करने के लिए गया जो हुमामा में बीएसएफ शिविर में हिरासत में है. मलिक ने सांसदों से कहा कि दिल्ली आने पर वह उनसे बातचीत करेंगे.

मीर वाइज से मिले ओवैसी

वहीं असदुद्दीन ओवैसी मीरवाइज से अलग से मिलने के लिए गए. मीरवाइज ने ओवैसी से संक्षिप्त मुलाकात की, जिस दौरान केवल दुआ-सलाम हुई. समूह ने हुर्रियत के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल गनी भट से भी मुलाकात का प्रयास किया, लेकिन भट ने भी उनसे बात करने से इनकार कर दिया.

भट ने नेताओं का स्वागत किया लेकिन साफ कर दिया कि यह निर्णय किया गया है कि प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ कोई बातचीत नहीं होगी. ओवैसी ने कहा कि उन्होंने हिरासत में रखे गए नेता शब्बीर शाह से भी कुछ समय के लिए मुलाकात की और वहां उनके साथ नमाज भी अदा की. 

'विश्वास बढ़ाने के लिए उठाएं कदम'

मीरवाइज से मुलाकात के बाद सीताराम येचुरी ने कहा, "हम दोनों पक्षों से आग्रह कर रहे हैं कि पहले सामान्य स्थिति बहाल करिये और सुनिश्चित करिये कि पिछले दो महीने से जारी लोगों की पीड़ा समाप्त हो. बिना शर्त राजनीतिक बातचीत शुरू करिये."

येचुरी ने साथ ही कहा, "जब सरकार नारे देती है, उसके बाद कुछ ठोस कदम भी उठाये जाने चाहिए. कश्मीरी लोगों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं."

सीपीएम महासचिव येचुरी ने कहा, "सरकार वाजपेयी का जम्हूरियत, कश्मीरियत और इंसानियत का बयान दोहराती रहती है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा नारे के साथ उठाये गए कदमों को भूल जाती है जैसे रमजान के दौरान एकतरफा संघर्ष विराम और हिजबुल मुजाहिदीन के साथ बातचीत. तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने स्वयं हिजबुल नेताओं के साथ कई बार बैठक की थी."

First published: 5 September 2016, 10:57 IST
 
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