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जनवरी 2017 से हर मोबाइल में होगा पैनिक बटन

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 April 2016, 18:15 IST

केन्द्रीय संचार एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोमवार को अधिसूचना जारी की है, जिसके मुताबिक एक जनवरी 2017 से देश के बाजारों में बिना पैनिक बटन वाले मोबाइल फोन की बिक्री नहीं हो सकेगी.

अधिसूचना के अनुसार फोन बनाने वाली कंपनियों को फोन में पांच और नौ नम्बर के बटन पैनिक बटन बनाने होंगे. ये बटन दबाते ही संकट में फंसे मोबाइल धारक के पास पुलिस तत्काल पहुंच जाएगी. 

2018 से जीपीएस सिस्टम


पैनिक बटन के अलावा एक जनवरी 2018 से सभी मोबाइल में जीपीएस नैविगेशन सिस्टम भी अनिवार्य कर दिया गया है. 

केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 2018 की शुरुआत से बिकने वाले सभी मोबाइल में इनबिल्ट जीपीएस नैविगेशन सिस्टम लगा होना चाहिए. 

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रविशंकर प्रसाद के मुताबिक तकनीक का मतलब जिंदगी को और बेहतर बनाना है. इसका और अच्छा इस्तेमाल हम तब कर पाएंगे जब इसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल कर पाएं.

इंडियन सेल्युलर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंकज महेंद्रू के मुताबिक महिलाओं को सुरक्षा देने के सरकार के फैसले पर पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री, मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली कंपनियां और सर्विस प्रोवाइडर साथ हैं.

5 और 9 नंबर पैनिक बटन


अगर आप स्मार्टफोन यूजर हैं तो परेशानी में आपको सबसे पहले इमरजेंसी बटन दबाना होगा. वहीं आपके फोन में इमरजेंसी बटन नहीं है तो आप पावर बटन को तीन बार दबाकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. 

स्मार्ट फोन धारक कीपैड का '5' या '9' नंबर का बटन दबाकर भी इमरजेंसी कॉल कर सकते हैं. आपकी ये कॉल या मैसेज सीधे लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसी या लोकल पुलिस को मिल जाएगी.

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निर्भया मामले के बाद चर्चा


मंत्रालय के अनुसार इससे महिला सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी. आपात स्थिति में वो पैनिक बटन दबाकर पुलिस या अपने करीबी की मदद ले सकेंगी. 

पैनिक बटन को दबाने से कम से कम तीन नंबरों पर संकट में होने संबंधी संदेश तुरंत चला जाएगा. इसमें पुलिस या अपने करीबियों का नंबर डाला जा सकता है.

दिसंबर 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप के बाद मोबाइल फोन में पैनिक बटन का विकल्प दिए जाने पर चर्चा शुरू हुई थी. इस प्रोजेक्ट को यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए निर्भया फंड से वित्तीय मदद देने की बात कही गई है.

इंडियन वायरलेस टेलीग्राफी एक्ट-1993 के तहत मोबाइल में पैनिक बटन के जरूरी होने की बात कही गई है.

First published: 26 April 2016, 18:15 IST
 
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