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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की 'दो मुसीबतें'

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 1 November 2016, 8:48 IST
QUICK PILL
  • सीपीएम के विवादित नेता रहे लक्ष्मण सेठ की बीजेपी में एंट्री से पार्टी में हर कोई ख़ुश नहीं दिखाई दे रहा है. 
  • वहीं आरएसएस रूपा गांगुली के उस बयान से नाराज़ है जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं को सुरक्षित बताया था. 

पश्चिम बंगाल में बीजेपी दो मोर्चों पर उलझी हुई है. पहली चिंता सीपीएम के पूर्व नेता लक्ष्मण सेठ का पार्टी में शामिल होना है जिसने बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव राहुल सिन्हा और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के बीच की खाई गहरी कर दी है. 

दूसरी दिक्कत राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली का वह बयान है, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के सुरक्षित होने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि शेख हसीना सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं कि हिन्दू वहां शांति से रह सकें.

गांगुली के इस बयान पर आरएसएस के प्रदेश प्रवक्ता जिश्नू बोस नाराज से लग रहे हैं. सिन्हा और बोस दोनों अपनी-अपनी शिकायत लेकर दिल्ली में आलाकमान से मिलना चाहते हैं.

लक्ष्मण सेठ से परेशानी

सिन्हा ने कहा कि वे सेठ के पार्टी में शामिल होने पर कोई कमेंट नहीं करना चाहते क्योंकि उनसे सलाह लिए बगैर वे पहले ही पार्टी सदस्य बन चुके हैं. उन्होंने कहा, 'देखते हैं आगे क्या होता है, सभी विषयों पर अभी बोलना ज़रूरी नहीं है. सेठ सीपीआई (एम) के कद्दावर नेता माने जाते हैं, जो कि पूर्वी मिदनापुर के जिला मुख्यालय तमलुक पर राज कर चुके हैं. उनपर कथित तौर पर 2007 में नंदीग्राम हिंसा में शामिल होने का आरोप है. उन्हें 2014 में सीपीआई (एम) ने पार्टी से निकाल दिया था. तभी से वे गुमनामी की जिंदगी जी रहे थे.

सीपीएम से निकाले जाने के बाद सेठ ने उसी साल अगस्त में भारत निर्माण पार्टी का गठन किया था लेकिन इससे उन्हें कोई लाभ नहीं हुआ. दो साल बाद अपनी दूसरी राजनीतिक पारी की शुरूआत करते हुए 21 अक्टूबर को वे बीजेपी में शामिल हो गए. इससे पहले उन्होंने घोष से मिलकर इच्छा जताई थी कि वे बीजेपी में शामिल हो कर तमलुक लोकसभा सीट पर उपचुनाव लड़ना चाहते हैं. प्रदेश बीजेपी की कोशिश है कि बीएनपी का उसमें विलय हो जाय और इस पर केंद्रीय नेतृत्व के फैसले का इंतजार कर रही है.

हालांकि बीजेपी ने उन्हें तमलुक से टिकट नहीं दिया है. बल्कि घोष के नजदीकी सूत्रों का कहना है कि पार्टी पूर्वी मिदनापुर में अपना आधार बढ़ाने के लिए उनके प्रभाव का इस्तेमाल करेगी. सेठ को पार्टी में शामिल किए जाने पर पार्टी के भीतरी मतभेद एक बार और तब सामने आए, जब एंग्लो इंडियन कैटगरी से लोकसभा में सांसद बीजेपी सदस्य और बंगाली अभिनेता जॉर्ज बेकर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'हम बड़े परिवार वाले हैं और यहां सबके लिए जगह है. सबका स्वागत है. अगर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेब भट्टाचारजी भी बीजेपी में शामिल होना चाहें, तो उनका भी स्वागत है.'

गांगुली के विवादित बयान

इस बीच, 28 अक्टूबर को आरएसएस के प्रदेश सचिव बोस ने बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यकों के बारे में दिए गए रूपा गांगुली के बयान पर नाराजगी जताई है. यह आजकल राज्य में आरएसएस का प्रिय मुद्दा बन गया है और बोस ने कहा 'मुझे नहीं लगता जिस वक्त गांगुली ने यह बयान दिया, उन्हें बांग्लादेश में हिन्दुओं के हालात के बारे में पूरी जानकारी थी. वहां हिन्दू अल्पसंख्यक हमेशा कट्टरपंथी धार्मिक गुट के निशाने पर रहते हैं. उनकी बात सच्चाई से कोसों दूर है. हमने अब गांगुली को बांग्लादेश के मौजूदा हालात के बारे में बता दिया है.'

टीएमसी ने क्या कहा

सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी के अंदरूनी मामलों पर चुटकी लेते हुए कहा, 'इसीलिए बीजेपी अब तक पश्चिम बंगाल में कोई खास मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है.'

बंगाल सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, 'यह सेठ के लिए अच्छा है कि वे एक राष्ट्रीय दल में शामिल हो गए हैं क्योंकि उनका राजनीतिक दमखम पूरी तरह ख़त्म हो चुका था लेकिन हम अब सेठ का मुकाबला करने के लिए हर तरह से तैयार हैं.'

उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी राज्य में साम्प्रदायिक तनाव फैलाएगी तो टीएमसी उस पर पलटवार करेगी. हाल ही में ममता ने कहा था, 'साम्प्रदायिक आतंकवाद सबसे बड़ा आतंक है.'

विश्लेषकों की राय

आने वाले दिनों में बगाल में कुछ सीटोंं पर विधानसभा के उपचुनाव होने हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन उपचुनावों में पश्चिम बंगाल की बीजेपी इकाई के अंदर चल रही अंदरूनी फूट का फायदा टीएमसी को जरूर मिलेगा. हालांकि अभी जानकार इस बात पर कोई आकलन नहीं कर पा रहे हैं कि सेठ के बीजेपी में आने से उसे कोई फायदा होगा या नहीं.

First published: 1 November 2016, 8:48 IST
 
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