Home » इंडिया » The Board of Control for Cricket in India (BCCI) on 8 December announced two new teams from the cities of Pune and Rajkot for the 2016 and 2017 edit
 

जानिए आईपीएल में शामिल पुणे, राजकोट टीमों के कुछ अनजाने तथ्य

रोहन राज | Updated on: 10 December 2015, 7:56 IST

चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल के बैन के बाद बीसीसीआई ने आठ दिसंबर को इंडियन प्रीमियर लीग के अगले दो संस्करणों (2016 और 2017) के लिए पुणे और राजकोट के नाम से दो नई टीमों को शामिल करने की घोषणा की है.

उद्योगपति संजीव गोयनका की न्यु राइजिंग कंसोर्टियम और इंटेक्स मोबाइल फोन निर्माता कंपनी के हाथ इन दोनों टीमों की कमान आई है. न्यु राइजिंग ने पुणे को अपना घर बनाया है और इंटेक्स मोबाइल ग्रुप ने राजकोट को चुना है.

इन दोनों फ्रेंचाइजीज़ को रिवर्स बिडिंग प्रक्रिया के बाद चुना गया है. न्यू राइजिंग ने पुणे के लिए 16 करोड़ रुपये की बोली लगायी जबकि इंटेक्स मोबाइल ग्रुप ने राजकोट के लिए 10 करोड़ रुपये की बोली लगायी.

अंतिम दौर में कुल पांच कंपनियोंं ने बोलियां लगायी. जबकि शुरुआती दौर में 21 कंपनियों और बड़े व्यापारिक घरानों ने बीसीसीआई से बिडिंग के दस्तावेज मंगवाए थे.

रिवर्स बिडिंग क्या है

बीसीसीआई की रिवर्स बिडिंग पॉलिसी के अनुसार, जो निवेशक 40 करोड़ रुपये आधार मूल्य के नीचे सबसे कम कीमत की बोली लगाएगा उसे फ्रेंचाइजी का स्वामित्व मिल जाएगा. इसका मतलब यह है की बीसीसीआई नई फ्रेंचाइजी को अपने केंद्रीय राजस्व से अधिकतम 40 करोड़ रुपये का भुगतान कर सकती है.

इस तरह अगर कोई कंपनी 25 करोड़ में फ्रेचाइजी खरीदती है तो बीसीसीआई को 15 करोड़ का फायदा होगा. बीसीसीआई नए फ्रेंचाइजी मालिकों से कोई फ्रेंचाइजी शुल्क नहीं वसूलेगी. बाकी टीमों से बीसीसीआई एकमुश्त फ्रेंचाइजी शुल्क वसूल रही है.

कौन-कौन फ्रेंचाइजी खरीदना चाहता था

कुल 21 कंपनियों ने बीसीसीआई बिडिंग के दस्तावेज खरीदे थे. इनकी कीमत दो लाख रुपये के करीब थी.

इनमें स्टार इंडिया, वोडाफोन, चेट्टीनाड सीमेंट, वीडियोकॉन, आरपीजी ग्रुप, आरपी-संजीव गोयनका ग्रुप, एनडीटीवी, वाधवा ग्रुप, साइकिल ब्रांड अगरबत्ती  और  सेट मैक्स जैसी कंपनियां शामिल हैं.

दो साल की टीम के फायदे

दोनों नए फ्रेंचाइजी के मालिकों को कुछ बड़े फायदे होंगे. उन्हें जरूरी प्रचार मिलेगा, उनकी पहुंच बढ़ेगी, उनकी कंपनियों की छवि और ब्रांड चमकेगा. ये कुछ फायदे हैं जो उन्हें अगले दो सालोंं में मिलेंगे. क्रिकेट की दुनिया में होने वाला कारोबारी लेनदेन अक्सर अर्थशास्त्र से संचालित होता है. व्यापारिक घराने अपनी आईपीएल फ्रेंचाइजी का इस्तेमाल सामाजिक असर, रुतबे और दायरे को बढ़ाने के लिए करते हैं.

साथ ही यह लोगों को आईपीएल के मालिकों के एक विशिष्ट समूह का हिस्सा भी बनाता है. इसके अलावा आईपीएल टीम का मालिक होने के कारण भविष्य में क्रिकेट और आईपीएल से जुड़ी किसी भी नई गतिविधि में आपकी हिस्सेदारी की संभावना बनी रहती है.

अगले दो वर्षों में आईपीएल का हिस्सा रहकर दोनों टीमोंं के मालिक यह तय कर सकते हैं की उन्हें टीम खरीदनी है या नहीं.

चेन्नई और राजस्थान से खिलाड़ियों के साथ क्या होगा?

दोनों निलंबित टीमों के खिलाड़ी इन दोनों नई टीमों से जुड़ने के लिए स्वतंत्र होंगे. एक टीम से एक फ्रेंचाइजी अधिकतम पांच खिलाड़ी को चुन सकती है. बाकी दस खिलाड़ियों को बीसीसीआई के पूल में मौजूद 50 खिलाडियों में से चुना जाएगा जो कि बोली लगाकर खरीदे जा सकेंगे. 

मूल नियमों के तहत दोनों टीमें अधिकतम चार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले भारतीय खिलाड़ियों का चयन कर सकती है. इस बार बोली के लिए उपलब्ध खिलाड़ियों में महेंद्र सिंह धोनी, रविचंद्रन अश्विन और ब्रेंडन मैकुलम जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

शॉर्टलिस्ट खिलाड़ियों के लिए प्राइस बैंड

दोनों नई टीमों के पास अपनी टीम खड़ा करने के लिए 66 करोड़ रुपए उपलब्ध होंगे. निलंबित टीमों के खिलाड़ियों को चुनने का तरीका वही पुराना होगा जिस आधार पर उन्हें पिछली टीमों ने खरीद रखा था.

पहले खिलाड़ी को 12.5 करोड़ रुपये, दूसरे को 9.5 करोड़, तीसरे को 7.5 करोड़ रुपये, चौथे को 5.5 करोड़ रुपये और पांचवें खिलाड़ी को 4 करोड़ रुपये मिलेंगे. और जो एक नवोदित खिलाड़ी कोई भी नई फ्रेंचाइजी सेलेक्ट करेगी उसको 4 करोड़ रुपये मिलेंगे.

चेन्नई और राजस्थान पर बैन  

चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स पर दो साल के लिए बैन लगा दिया गया था. चेन्नई सुपरकिंग के मालिक और पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा (सह मालिक राजस्थान) को स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी का आरोपी पाया गया था.

First published: 10 December 2015, 7:56 IST
 
रोहन राज @catchnews

स्वतंत्र पत्रकार

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