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मंत्री पद पर तलवार: हाईकोर्ट ने गायत्री प्रजापति के मामले में फैसला सुरक्षित रखा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 October 2016, 15:28 IST
(एएनआई)

यूपी के अखिलेश सरकार में भ्रष्टाचार के मामले में पहले बर्खास्त और फिर बहाल हुए विवादास्पद खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को फिर से मंत्री बनाए जाने के मामले में दायर की गई याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बाबासाहब भोंसले और जस्टिस राजन रॉय की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की ओर से उनके वकील अशोक पाण्डेय तथा इस याचिका का विरोध कर रहे महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह की दलीलें सुनने के बाद गुरुवार तक के लिए अपना फैसला सुरक्षित कर लिया.

अनुच्छेद 164 के तहत हटे थे प्रजापति

ठाकुर की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि गायत्री प्रजापति को प्रदेश में हुए अवैध खनन की सीबीआई रिपोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश पर मंत्री पद से हटाया गया था.

जब किसी मंत्री को संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत हटाया जाता है, तो इसका सीधा मतलब होता है कि उसने मुख्यमंत्री और राज्यपाल का विश्वास खो दिया है. ऐसे में उस व्यक्ति को तब तक मंत्री नहीं बनाया जा सकता, जब तक भरोसा उठने का कारण समाप्त नहीं हो जाता है.

वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से पेश हुए महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि प्रजापति को मंत्रिमण्डल में फिर से शामिल किया जाना पूरी तरह से विधिसम्मत था. यह याचिका विचार करने योग्य नहीं है, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिये.

12 सितंबर को हुए थे बर्खास्त

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बीते महीने की 12 सितम्बर को खनन मंत्री गायत्री प्रजापति को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर दिया था.

अखिलेश यादव के इस फैसले से उनकी समाजवादी पार्टी में भूचाल आ गया था. इसके बाद विवाद को शांत करने के लिए अखिलेश ने पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह के निर्देश पर उन्हें दोबारा मंत्री बनाया गया और उन्हें परिवहन मंत्रालय दिया गया है.

First published: 5 October 2016, 15:28 IST
 
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