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संदीप पांडेय: वैचारिक विरोध की वजह से हुई थी बर्खास्तगी

अतुल चंद्रा | Updated on: 23 April 2016, 21:11 IST
QUICK PILL
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीएचयू-आईआईटी के विजिटिंग प्रोफेसर संदीप पांडेय की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया है. अदालत ने बीएचयू प्रशासन के फैसले को पूर्वाग्रह से ग्रसित मानते हुए सख्त टिप्पणी की.
  • हाईकोर्ट ने बीएचयू कार्य परिषद के रवैए पर सवाल उठाते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला करार दिया है. संदीप पांडेय ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए वैचारिक विरोध की वजह से निशाना बनाने का आरोप लगाया.

मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता संदीप पांडेय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद बीएचयू प्रशासन पर निशाना साधा है. संदीप ने बर्खास्तगी की कार्रवाई की असल वजह वैचारिक विरोध को बताया है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीएचयू-आईआईटी के विजिटिंग प्रोफेसर संदीप पांडेय की बर्खास्तगी रद्द करने का फैसला सुनाया था. कोर्ट ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) प्रशासन के आदेश को पूर्वाग्रह से ग्रसित माना है.

हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कड़ी टिप्पणी की. अदालत ने कहा, "संदीप पांडेय के खिलाफ लिया गया फैसला ना सिर्फ पूर्वाग्रह से ग्रसित लगता है, बल्कि ये भी साफ दिखता है कि अलग विचारधारा के कारण ऐसा किया गया."

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संदीप पांडेय की याचिका पर जस्टिस वीके शुक्ला और एमसी त्रिपाठी की डबल बेंच बेंच ने सुनवाई की.


'अभिव्यक्ति की आजादी पर आघात'


कोर्ट ने बीएचयू प्रशासन के फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, " संदीप पांडेय को हटाने का आदेश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार का उल्लंघन है. ये बीएचयू के संस्थापक के सपनों पर भी आघात है."

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संदीप पांडेय, आईआईटी बीएचयू के केमिकल एंड मैकेनिकल विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे. 21 दिसंबर 2015 को कार्य परिषद ने कहा कि वो कैंपस की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल रहते हैं.

वैचारिक विरोध की वजह से निशाना

फैसले के बाद संदीप पांडेय का कहना है, " मेरी संस्थान के डायरेक्टर से बात हुई है, उन्होंने कहा है कि मैैं फिर से बीएचयू में पढ़ा सकता हूं. लेकिन सेमेस्टर तकरीबन खत्म होने के कगार पर है."

संदीप पांडेय ने कहा, " इस सत्र में अब पढ़ाने को ज्यादा कुछ नहीं है और मेरा अनुबंध जुलाई में खत्म हो रहा है, लिहाजा मैं अनुबंध के नवीनीकरण पर बीएचयू-आईआईटी  के डायरेक्टर से चर्चा करूंगा."

संदीप पांडेय ने अपनी बर्खास्तगी को लेकर बीएचयू प्रशासन पर निशाना साधा है. पांडेय ने कहा कि वो केवल गांधीवादी विचारधारा में यकीन रखते हैं.

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संदीप पांडेय ने आरोप लगाया है कि बीएचयू के आरएसएस समर्थित कुलपति और आईआईटी के शैक्षणिक मामलों के डीन से उनके वैचारिक मतभेद थे, इसी वजह से उनको हटाया गया.

इस बीच प्रोफेसर संदीप पांडेय अगले बुधवार को बीएचयू जाने वाले हैं. संदीप पांडेय ने कहा कि अभी वो उत्तर प्रदेश में शिक्षा के अधिकार की मुहिम को लेकर व्यस्त हैं.

अनुबंध बढ़ाने पर चुप्पी


हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बीएचयू-आईआईटी  के डायरेक्टर राजीव सिंघल ने कहा है कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाएगा.


वहीं प्रोफेसर संदीप पांडेय के अनुबंध का नवीनीकरण करने के सवाल पर प्रोफेसर सिंघल ने कहा, "मैं इस पर कुछ नहीं कह सकता क्योंकि इसका फैसला बीएचयू की कार्य परिषद करेगी."

छात्र अविनाश पांडेय की शिकायत

बीएचयू के एमए राजनीति शास्त्र के अंतिम वर्ष के छात्र अविनाश कुमार पांडेय ने संदीप पांडेय के खिलाफ शिकायत की थी. जिसके बाद कार्य परिषद की बैठक में संदीप पांडेय पर कार्रवाई का फैसला लिया गया.  

12 जनवरी को अपने फेसबुक पोस्ट में अविनाश ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े होने का दावा किया था.

आरोप लगाया गया कि अपने व्याख्यान के दौरान संदीप पांडेय नक्सलवाद का समर्थन और राष्ट्रविरोधी बातें कहते थे. जिससे सांप्रदायिक सौहार्द को खतरा था.

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बीएचयू की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा गया था कि संदीप पांडेय, दादरी के अखलाक की हत्या और गोमांस जैसे विवादित मुद्दों पर सामूहिक चर्चा आयोजित कराते हैं. साथ ही वो कैंपस का शैक्षणिक माहौल खराब कर रहे हैं.

जनवरी 2016 में हुई थी बर्खास्तगी


16 जनवरी 2016 को बीएचयू प्रशासन ने संदीप पांडेय की संविदा पर नियुक्ति खत्म करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया. उन पर कैंपस में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों और एक खास विचारधारा के प्रचार-प्रसार का आरोप लगाया गया था. 

संदीप पांडेय के वकील ने हाईकोेर्ट में दलील देते हुए कहा कि बीएचयू का आदेश सामान्य बर्खास्तगी आदेश नहीं है बल्कि एक तरीके की सजा है, क्योंकि संदीप को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला.

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First published: 23 April 2016, 21:11 IST
 
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