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इलाहाबाद यूनीवर्सिटीः अनिवार्य ऑनलाइन आवेदन ने शुरू किया एक और टकराव

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 May 2016, 22:01 IST
QUICK PILL
  • इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर अनिवार्य ऑनलाइन आवेदन के विरोध में शनिवार को भारी तादाद में छात्रों ने प्रदर्शन किया.
  • छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने इस कार्रवाई को छात्रसंघ को भंग करने की साजिश बताया है. कुलपति ने पुलिस स्टेशन में ऋचा सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज करवाया है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लिए अनिवार्य ऑनलाइन आवेदन के विरोध में शनिवार को भारी तादाद में छात्रों ने प्रदर्शन किया. छात्रों की मांग थी कि आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन भी किया जाए क्योंकि अधिकांश छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं. 

छात्र संघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने कहा, "जब बीएचयू, एएमयू, जेएनयू, हैदराबाद यूनीवर्सिटी समेत अधिकांश केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के दोनों माध्यम उपलब्ध हैं तो फिर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में क्यों नहीं. इलाहाबाद यूनीवर्सिटी में इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि यह उस राज्य में स्थित है जहां 78 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण है. इसलिए ऑनलाइन आवेदन को अनिवार्य बनाना ऐसे तमाम छात्रों केे प्रवेश को रोकना है जो ग्रामीण पृष्ठभूमि से और हाशिये पर पड़े समुदायों  से आते हैं."

जब छात्र अपनी मांगों के साथ कुलपति के पास पहुंचे तो उन्होंने न केवल छात्र संघ के चुने हुए पदाधिकारियों से मिलने से मना कर दिया बल्कि खुद को अपने कार्यालय में बंद कर लिया. इसके विरोध में गुस्साए छात्रों ने कुलपति कार्यालय के बाहर दो घंटे से ज्यादा धरना दिया.

कुलपति ने पुलिस स्टेशन में ऋचा सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज करवाया है

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शाम को बिना छात्रों को बताए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर अध्यक्ष ऋचा सिंह और अन्य पदाधिकारियों को प्रदर्शन करने के आरोप में दंडस्वरूप निष्कासित कर दिया. हालांकि एक घंटे के भीतर प्रेस विज्ञप्ति को वापस ले लिया गया और इसके बजाय प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए एक उच्च समिति का गठन कर दिया गया.

छात्र नेताओं ने इस कार्रवाई को छात्र संघ को भंग करने की दिशा में एक प्रयास बताते हुए इसे छात्रों की आवाज और उनके आंदोलन को दबाने का कदम बताया है. कुलपति ने पुलिस स्टेशन में ऋचा सिंह के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज करवाया है.

ऋचा ने कहा, "यह मुझे झूठे आरोपों में फंसाने का प्रयास है और अतीत में की गई कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया है. हालांकि इससे भयभीत नहीं हुई हूं."

पहले भी कुलपति ने ऋचा सिंह को निष्कासित करने का प्रयास किया था लेकिन संसद में यह मामला उठने के कारण कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी थी. कुलपति ने इसके बाद विश्वविद्यालय परिसर के अंदर समस्त प्रकार की राजनीतिक गतिविधियों और कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगा दिया था.

कुलपति के तानाशाही रवैये के खिलाफ और प्रवेश के लिए ऑफलाइन विकल्प की मांग को लेकर छात्र नेताओं ने आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और ज्यादा बड़ा करने का मन बना लिया है. उन्होंने फैसला किया है कि वे सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से मिलकर 78 फीसदी ग्रामीण आबादी वाले राज्य में मौजूद केंद्रीय विश्वविद्यालय में ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में उनका पक्ष जानेंगे.

उन्होंने यह भी निर्णय लिया है कि वे इस मुद्दे को इलाहाबाद और आसपास के जिलों के आम आदमी तक ले जाएंगे ताकि भारी तादाद में लोगों को भी पता चले कि एक ऐसी नीति बनाई जा रही है जो ग्रामीण और हाशिये पर पड़े समुदायों से आने वाले छात्रों के भविष्य को प्रभावित करने वाली है. दिलचस्प बात यह है कि अभी तक 92 फीसदी आवेदकों ने अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में आवेदन के लिए ऑफलाइन आवेदन का विकल्प चुना है, जबकि इसके लिए दोनों विकल्प मौजूद हैं.

First published: 1 May 2016, 22:01 IST
 
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