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जम्मू कश्मीर: सेना ने मार गिराए थे तीन आतंकी, परिवार ने लगाए आरोप-तीनों थे मजदूर, शुरू हुई जांच

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 August 2020, 14:21 IST

जम्मू कश्मीर के शोपियां में बीते 18 जुलाई को सेना और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान सेना ने तीन आतंकियों को मार गिराया था. इस घटना के 21 दिन बाद मारे गए तीन लड़कों के परिवार वाले सामने आए हैं और आरोप लगाए हैं कि वह आतंकी नहीं बल्कि राजौरी के रहने वाले मजदूर थे. पुलिस का कहना है कि इस ऑपरेशन का इनपुट सेना को मिला था और उसके बाद एनकाउंटर किया गया था. अब सेना का कहना है कि यह फेक एनकाउंटर नहीं था और इसकी जांच की जा रही है.

दरअसल, जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा 18 जुलाई को बताया गया था कि सेना को शोपियां जिले के अमशीपोरा इलाके में कुछ आतंकियों की मौजूदगी के बारे में जानकारी मिली थी. इसके बाद सुरक्षाबलों ने इलाके की घेराबंदी करके सर्च ऑपरेशन चलाया था. इस दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग की थी, जिसके जवाब में सेना ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया.


इस मुठभेड़ में थोड़ी देर बाद सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस भी सेना का साथ देने पहुंची थी. एनकाउंटर के दौरान सेना ने तीनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया. मारे गए सभी तीन आतंकवादियों के शवों को मुठभेड़ स्थल से हटा दिया गया था. पुलिस ने अपने बयान में बताया था कि मुठभेड़ के स्थल से हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए थे. 

हालांकि, सोमवार को सोशल मीडिया पर परिवार के हलावे से ऐसी कई रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिन लोगों को सेना ने आतंकी बताकर एनकाउंटर किया, वो तीनों लड़के मजदूर के लिए राजौरी से शोपियां गए थे. दावा है कि इन लड़कों ने परिजनों ने शवों की तस्वीरों से अपने बच्चों की पहचान की है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कश्मीर स्थित रक्षा मंत्रालय के पब्लिक रिलेशंस ऑफिसर कर्नल. राजेश कालिया के हवाले से कहा गया है,"हमने 18 जुलाई 2020 को शोपियां में ऑपरेशन से जुड़े सोशल मीडिया इनपुट्स नोट किए हैं." कर्नल. राजेश कालिया ने आगे बताया,"ऑपरेशन के दौरान मारे गए तीन आतंकवादियों की पहचान नहीं की गई है और शवों को प्रोटोकॉल के आधार पर दफनाया गया था. सेना इस मामले की जांच कर रही है."

बतातें चलें कि सोमवार सुबह से, सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए हैं कि राजौरी के तीन निवासी - 26 साल के इब्रार अहमद, 21 वर्षीय मोहम्मद इम्तियाज और 18 साल का मोहम्मद इमरान ( कुछ मीडिया रिपोर्ट में 16 तो कुछ में 17 उम्र बताई जा रही है), के घर वालों ने आरोप लगाया कि तीनों मजदूरी के लिए राजौरी से शोपियां निकले थे, जिनको सेना ने एकनाउंटर में मार गिराया है. बताया जा रहा है कि पुलिस ने इन तीनों के शवों को उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में दफनाया था.

एनकाउंटर में मारे गए तीनों लड़के (Source-Greater Kashmir)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राजौरी में, लापता युवकों के परिजनों ने पुलिस पोस्ट पेरी में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने कश्मीर पुलिस के साथ अपना ब्योरा साझा किया है. युवकों के परिजनों के अनुसार, तीनों लड़के एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं, काम से जुड़े सिलसिले में कश्मीर गए थे, लेकिन 17 जुलाई से लापता हो गए.

इस मामले में मोहम्मद इम्तियाज के चाचा लाल हुसैन ने ग्रेटर कश्मीर को बताया कि उनका भतीजा 2 जुलाई को घर से निकल गया और शोपियां पहुंच गया जहां उसने देहाड़ी मजदूर के रूप में काम किया. लाल हुसैन ने कहा,"हम उनसे नियमित तौर पर बात करते थे और वह निर्माण स्थलों के साथ-साथ बागों में भी दैनिक मजदूरी का काम करते थे और काम की जगह पर रहते थे क्योंकि उनके पास कोई आवास नहीं था."

उन्होंने आगे कहा,"17 जुलाई को, हमारे इलाके के दो और लड़के (इब्रार अहमद और मोहम्मद इमरान) वहां पहुँचे और इम्तियाज के पास पहुंचे, जिसके बाद तीनों ने एक कमरा किराए पर लिया." लाल हुसैन ने आगे बताया कि 17 जुलाई की शाम 7:30 बजे उन्होंने अपने भतीजे से बात की थी और उसके बाद से ही उसका फोन स्विच ऑफ हो गया.

इस मामले में राजौरी के एडिशनल एसपी लियाकत अली ने कहा,"हमें उनके परिवारों की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली थी और उसी को पंजीकृत किया गया है और कश्मीर में हमारे समकक्षों को आगे की जांच के लिए तीनों के विवरण के साथ इसके बारे में सूचित किया गया है."

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First published: 12 August 2020, 12:34 IST
 
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