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उत्तराखंड में सरकार के लिए मुश्किलें बढ़ीं, प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 February 2017, 8:25 IST
QUICK PILL
  • राज्य में कांग्रेस की सहयोगी दल प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को हटाने की मांग की है. 
  • राज्य के राजनीतिक विश्लेषक दोनों गठबंधनों की इस जुबानी जंग को रावत और उपाध्याय के बीच बरसों से चली आ रही कलहे के परिणाम के रूप में देख रहे हैं. 

उत्तराखंड में हरीश रावत की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार की मुश्किलें कम होती नहीं लग रही हैं. अपने विरोधियों और राष्ट्रपति शासन से उबरने के बाद कांग्रेस सरकार अब अपने ही सहयोगी दल प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) से जंग का सामना कर रही है. पीडीएफ नेताओं ने कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष किशोर उपाध्याय को हटाने की मांग की है या फिर सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी दे दी है.

पीडीएफ नेता और राज्य के शिक्षा मंत्री मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने राज्य की प्रभारी अम्बिका सोनी से मुलाकात कर कहा है कि पीडीएफ ज्यादा लम्बे समय तक उपाध्याय के अनावश्यक टीका-टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेगी और यदि उन्हें तुरन्त प्रभाव से नहीं हटाया गया तो पीडीएफ समर्थन वापस ले लेगी. मीडिया से बात करते हुए नैथानी ने कहा है कि पीडीएफ गठबंधन धर्म का पालन कर रही है और आलाकमान के कहने पर ही कांग्रेस को समर्थन दिया था. नैथानी इन दिनों दिल्ली में हैं.

समझा जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर अन्य कई वरिष्ठ नेताओं से मिलेंगे और इस बवाल को खत्म कराकर ही मानेंगे. इस बीच पीडीएफ के एक अन्य नेता और राज्य के पर्यटन मंत्री दिनेश धानिया ने दावा किया है कि नैथानी उनके नेता हैं और वे उनकी ओर से फैसला ले सकते हैं. हमने उन्हें पीडीएफ के नेता के रूप में चुना है और जो कुछ भी वह निर्णय लेंगे, हम उसका पालन करेंगे.

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) चीफ किशोर उपाध्याय और पीडीएफ के बीच तनातनी तो चल ही रही है. रावत पर दबाव है कि वे पीडीएफ मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दें और 2017 के विधान सभा चुनावों से पहले खाली स्थान पर कांग्रेस विधायकों को मंत्री बना दें. हाल ही में, कुमाऊं में एक कार्यक्रम के दौरान उपाध्याय ने कहा था कि वे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के हित में काम करेंगे, पीडीएफ के नहीं. उनके इस बयान से पीडीएफ नेतृत्व में गुस्सा भड़क गया और उसने कांग्रेस आलाकमान से इस मामले में दखल देने और मामला सुलझाने की मांग कर दी.

राष्ट्रपति शासन के दौरान कांग्रेस के बचाव में आई थी पीडीएफ

केन्द्र द्वारा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के बाद जब सुप्रीम कोर्ट ने रावत को बहुमत सिद्ध करने का निर्देश दिया था, तब पीडीएफ कांग्रेस सरकार के बचाव में आ गई थी. पीडीएफ में तीन स्वतंत्र, दो बसपा और उत्तराखंड क्रांतिदल के एक विधायक शामिल हैं. इस बीच मुख्य मंत्री ने अपने बयान में कहा है कि उन्होंने पीडीएफ मंत्रियों का फैसला आलमाकमान पर छोड़ दिया है. और यह भी कहा है कि उन्हें पिछले चार सालों से अपने गठबंधन सहयोगियों का समर्थन हासिल है. उन्होंने यह भी कहा कि जो पार्टी का समर्थन करेगा, पार्टी हमेशा उसका साथ देगी. यह पीडीएफ का निर्णय होगा कि वह अकेले चुनाव लड़े या कांग्रेस के साथ मिलकर. 

हालांकि रावत ने यह भी कहा कि बेहतर यही होगा कि पीडीएफ और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े. राज्य के राजनीतिक विश्लेषक दोनों गठबंधनों की इस जुबानी जंग को रावत और उपाध्याय के बीच बरसों से चली आ रही कलह के परिणाम के रूप में देख रहे हैं. उनका दावा है कि कांग्रेस के राज्य अध्यक्ष इस बात से चिन्तित हैं कि मुख्यमंत्री कांग्रेस के टिकट पर धानिया को टेहरी सीट से लड़ाना चाहते हैं. धानिया ने 2012 के विधानसभा चुनावों मे टेहरी सीट से उपाध्याय को मात दी थी. 

इस सप्ताह की शुरुआत में उपाध्याय ने पीडीएफ नेताओं से कहा था कि वे यह साफ बताएं कि वे कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लडऩा चाहेंगे या स्वतंत्र या किसी अन्य दल के प्रत्याशी के रूप में. बताते हैं कि उपाध्याय मुख्य मंत्री के उत्तर से भड़क गए. मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार और संगठन पीडीएफ के साथ है.

और तेज़ होगी जुबानी जंग

कई मौकों पर नैथानी उपाध्याय को निशाने पर लेते रहे हैं. उनका कहना है कि विधान सभा चुनाव हार जाने के बाद भी उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया, इसके लिए उन्हें पार्टी नेताओं को धन्यवाद देना चाहिए. वह कांग्रेस को कमजोर करने का भी आरोप उपाध्याय पर मढ़ते रहे हैं. इसके जवाब में उपाध्याय ने सवाल खड़ा किया है कि पीडीएफ है क्या और धरातल पर वास्तव में उसका कोई अस्तित्व है क्या?

अब जबकि, चुनावों में कुछ ही महीने बाकी रह गए हैं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पीडीएफ और उपाध्याय के बीच जुबानी जंग और तेज होती जाएगी. उपाध्याय के एक निकटतम सूत्र ने कहा कि मुख्य मंत्री कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के बजाए पीडीएफ का समर्थन कर रहे हैं और यह लड़ाई चुनाव आते-आते और ज्यादा 'कुरूप' बन जाएगी. इस बीच, रावत ने मीडिया को भरोसा दिलाया कि अभी तक वह पार्टी के मुखिया हैं. उनके विचारों मे अन्तर आने का कोई सवाल ही नहीं है. वह जल्द से जल्द मामले का हल निकालने की कोशिश करेंगे.

First published: 25 September 2016, 7:23 IST
 
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