Home » इंडिया » Am being harassed for challenging Amit Shah: Indira Jaising
 

इंदिरा जयसिंह: सरकार खुद से असहमति रखने वालों को निशाना बना रही है

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST
(कैच न्यूज)
QUICK PILL
  • इंदिरा जयसिंह ने पत्रकार राना अयूब की किताब \'गुजरात फाइल्स\' के विमोचन के मौके पर कहा था कि वे अमित शाह को बरी करने के फैसले को चुनौती देंगी. इसके अगले दिन गृह मंत्रालय का नोटिस उन्हें जारी हुआ.
  • गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में आरोप लगाया है कि एनजीओ द्वारा प्राप्त विदेशी चंदे और गृह मंत्रालय में पेश की गई रिटर्न में अंतर है. साथ ही इंदिरा जयसिंह ने सरकारी नौकर रहते हुए फंड लेकर एफसीआरए के नियमों का उल्लंघन किया है.

लॉयर्स कलेक्टिव के विदेशी अनुदान पर अस्थाई रोक लगाने के गृह मंत्रालय के फैसले को वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने मानवाधिकारों की हिमायत करने वालों पर हमला बताया. पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने बताया कि सरकार के खिलाफ कोर्ट में केस ले जाने वालों पर हमले हो रहे हैं.

जयसिंह ने फैसले की टाइमिंग पर सवाल उठाया है. उन्होने कहा कि "ये फैसला मेरे उस बयान के तुरंत बाद आया है जिसमें मैने अमित शाह को बरी करने के बॉम्बे हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती देने की बात कही थी.

इंदिरा जयसिंह ने पत्रकार राना अयूब की किताब 'गुजरात फाइल्स' के विमोचन के मौके पर यह बात कही थी. यह कार्यक्रम 29 मई को था और गृह मंत्रालय का नोटिस 30 मई को जारी हुआ.

डी राजा: यह 1964 नहीं है, वाम दलों का एकीकरण अस्तित्व के लिए जरूरी है

फॉरेन कॉन्ट्रीब्यूशन रेग्यूलेशन एक्ट (एफसीआरए) वो कानून है जिसके तहत एनजीओ, संस्थानों, जजों, पत्रकारों आदि को मिलने वाले विदेशी धन और चंदे का नियमन किया जाता है. 

लॉयर्स कलेक्टिव को इससे पहले नवम्बर 2015 और 9 फरवरी 2016 में एफसीआरए के तहत नोटिस मिल चुका है. 

क्या उल्लंघन न्यायसंगत हैं ?

गृह मंत्रालय ने अपनी अधिसूचना में आरोप लगाया है कि एनजीओ द्वारा प्राप्त विदेशी चंदे और गृह मंत्रालय में पेश की गई रिटर्न में अंतर है. साथ ही इंदिरा जयसिंह ने सरकारी नौकर रहते हुए फंड लेकर एफसीआरए के नियमों का उल्लंघन किया है.

अधिसूचना में कहा गया है कि संगठन ने इस धन का इस्तेमाल राजनीतिक मंशा के साथ धरने और रैली आयोजित करने में किया जो कि एफसीआरए का उल्लंघन है.

पढ़ेंः अबकी बार इंदिरा जयसिंह का एनजीओ 'शिकार'

समाज में वंचित और गरीब तबके के लिए काम करने वाले एनजीओ पीस के डायरेक्टर अनिल चौधरी कहते हैं कि कानून निजी संस्थानों और राजनीतिक दलों के लिए विदेशी चंदे को सही मानता है जबकि एनजीओ और नागरिक संस्थाओं को इससे रोकता है. चंदे के पीछे राजनीतिक मंशा नहीं होनी चाहिए लेकिन कानून की ये विडम्बना आश्चर्यजनक है.

इंदिरा को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उन्होंने जुलाई 2009 से 5 मई 2014 तक अपने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के कार्यकाल में लॉयर्स कलेक्टिव एनजीओ से मेहनताना लिया.

गृहमंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक "ये वास्तव में आश्चर्यजनक है कि एक इतनी वरिष्ठ कानून अधिकारी ने एएसजी के रूप में इतने लंबे कार्यकाल के दौरान निजी संस्था से भुगतान लिया जिसका मकसद अघोषित था. यह भारत सरकार के कानूनी अधिकारियों की नियमावली का बड़ा उल्लंघन है."

भले ही गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन का कोई आधार नहीं है लेकिन इन लोगों ने इस सरकार को परेशान किया है

लॉयर्स कलेक्टिव के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि "इंदिरा जयसिंह के सरकारी अधिकारी होने के आधार पर विदेशी चंदे के इस्तेमाल का आरोप गलत है. क्योंकि जयसिंह सरकारी अधिकारी नहीं बल्कि पब्लिक सर्वेंट थीं जिन पर विदेशी चंदा लेने पर कोई रोक नहीं है. इसके अलावा विदेशी धन संस्था द्वारा लिया गया, जयसिंह को तो महज उनकी सेवाओं के बदले मेहनताना दिया गया जिस पर कोई रोक नहीं है. मंत्रालय द्वारा इस तथ्य की अनदेखी की गई है."

इंदिरा जयसिंह कहती हैं, "मेरा स्पष्ट मानना है कि ये सरकारी नीतियों से सहमति नहीं रखने वाली गैर सरकारी संस्थाओं के प्रति भेदभाव की नीति का हिस्सा है. वजह साफ है, आनंद और मैने ऐसे कई लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की है जिन्होंने मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ मुकदमे दायर किए हैं."

प्रकाश सिंह रिपोर्ट: प्रशासनिक नकारापन और जातीय ध्रुवीकरण ने हिंसा को हवा दी

आनंद ग्रोवर ने याकूब मेमन की फांसी माफी के लिए पैरवी की थी जबकि जयसिंह ने ग्रीनपीस की प्रिया पिल्लई का केस लड़ा जिनको विदेशों में देश की छवि खराब करने के आरोप में लंदन जाने से रोका दिया गया और उनका पासपोर्ट भी जब्त कर लिया गया था. जयसिंह ने एफसीआरए के दुरुपयोग के केस में फंसी तीस्ता सीतलवाड़ के लिए भी कोर्ट में पैरवी की है.

इंदिरा कहती हैं, "मेरी राय में सरकार अपनी नीतियों और कामों के सामने किसी चुनौती को सहन नहीं कर पा रही है और लॉयर्स कलेक्टिव के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट उनके कतई अनुकूल नहीं हैं."

इससे पहले जयसिंह ने कैच न्यूज को बताया कि मीडिया को इन खबरों को लीक करना भी एफसीआरए के सेक्शन 20 का उल्लंघन है जिसके मुताबिक सरकार को इस कार्यवाही को गोपनीय रखना चाहिए. लॉयर्स कलेक्टिव के एक बयान में भी ये कहा गया है कि उनसे पहले मीडिया को इस नोटिफिकेशन की कॉपी मिल गई थी.

अनिल चौधरी बताते हैं, "तीस्ता और इंदिरा स्वाभाविक निशाना हैं. भले ही गृह मंत्रालय के नोटिफिकेशन का कोई आधार नहीं है लेकिन इन लोगों ने इस सरकार को परेशान किया है."

चौधरी मानते हैं कि "यह कानून भी अपने आप में एक समस्या है. दुनियाभर में सरकारें गैर सरकारी संस्थाओं और सिविल सोसाएटी के खिलाफ एफसीआरए जैसे कानूनों का इस्तेमाल करती हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सत्ता में है, बीजेपी अपने विरोधियों के खिलाफ इसका इस्तेमाल करेगी जैसे कांग्रेस ने किया."

First published: 3 June 2016, 10:18 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @catchnews

एशियन कॉलेज ऑफ़ जर्नलिज्म से पढ़ाई. पब्लिक पॉलिसी से जुड़ी कहानियां करते हैं.

पिछली कहानी
अगली कहानी