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पलट गए अमरिंदर, राहुल को माना नेता

चारू कार्तिकेय | Updated on: 21 November 2015, 17:33 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस के शीर्ष नेता अमरिंदर सिंह का मानना है कि पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को जल्द ही पार्टी की कमान संभाल लेनी चाहिए.
  • खबरों के अनुसार पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में सांसद अमरिंदर सिंह को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है.

बिहार चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को लेकर अचानक अमरिंदर सिंह का आकलन बदल गया है. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अब चाहते हैं कि राहुल बिना देर किए पार्टी का कमान संभाल लें.

लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उप नेता अमरिंदर सिंह के अंदर यह काफी बड़ा बदलाव आया है. इसी साल अप्रैल में उनका मानना था कि राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष के रूप में सोनिया गांधी की तरह सफल नहीं हो पाएंगे क्योंकि उनके (राहुल) पास कम अनुभव है.

सके अलावा अमरिंदर ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल को सलाह दी थी कि उन्हें देश में घूम-घूमकर अपनी छवि बनाने और अनुभव प्राप्त करने की जरूरत है.

अब अमरिंदर के विचार बदल गए हैं. 16 नवंबर को पाटियाला में नेशनल प्रेस डे समारोह में उन्होंने कहा कि राहुल ने बिहार में अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित कर दिया है.

साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि महागठबंधन बनाने और इसकी जीत में राहुल की भूमिका को कम करके आंका गया

अमरिंदर ने बिहार चुनाव में राहुल की 'सक्रिय भूमिका' के लिए उन्हें धन्यवाद दिया. उन्होंने दावा किया कि पार्टी उपाध्यक्ष के चलते ही कांग्रेस का पूरा वोटबैंक महागठबंधन को मिला. उनका मानना है कि बिहार में मिली जीत के लिए राहुल को ज्यादा श्रेय मिलना चाहिए.

क्या वास्तव में अमरिंदर का हृदय पर्रिवतन होने का कारण राहुल को 'बिहार में मिली सफलता' है? इस वजह पर राजनीतिक जानकार संदेह कर रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि पार्टी के कद्दावर नेता अमरिंदर पंजाब में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए राहुल का साथ चाहते हैं.

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा के साथ पिछले कुछ महीने से अमरिंदर के रिश्ते बहुत खराब चल रहे हैं

पंजाब कांग्रेस में इन दिनों गुटबाजी चरम पर है. बाजवा और अमरिंदर गुट में दरअसल विवाद अध्यक्ष पद को लेकर है.

2012 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की हार के बाद अमरिंदर को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था. उनकी जगह बाजवा को अध्यक्ष बनाया गया. इसके बाद से बाजवा हमेशा अमरिंदर के निशाने पर रहे. लोकसभा चुनाव में अमृतसर से कांटे की लड़ाई में वित्त मंत्री अरुण जेटली को हराने के बाद अमरिंदर अब बाजवा को लेकर ज्यादा मुखर हो गए हैं.

इस साल अक्टूबर में यह लड़ाई ज्यादा कटु तब हो गई जब बाजवा ने अमरिंदर पर आरोप लगाया कि वह पार्टी तोड़ने की कोशिश में है. अमरिंदर ने इसकी प्रतिक्रिया में बाजवा को 'अक्षम और असफल' कहा. इन दोनों की लड़ाई सुलझाने का जिम्मा राहुल पर छोड़ दिया गया है.

हालांकि, पंजाब में राहुल के हालिया दौरे में बाजवा और अमरिंदर सार्वजनिक रूप से साथ दिखे. पंजाब को लेकर राहुल ने राज्य के शीर्ष नेताओं के साथ कई बार बातचीत की और उन्हें चेताया भी है. खबरों के अनुसार अमरिंदर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है. इसकी घोषणा जल्द होने की संभावना है.

यह मानना मुश्किल है कि किसी एक चुनाव में मिली जीत के कारण अमरिंदर जैसे अड़ियल नेता राहुल गांधी के बारे में अपनी राय बदल दे. लगता है अमरिंदर को मिलने वाली जिम्मेदारी की सूचना उन तक पहुंच गई है. इस कारण अब राहुल में उनकी आस्था जग गई है.

अमरिंदर के लिए राज्य में स्थितियां आसान नहीं है. अमरिंदर के कट्टर समर्थक माने जाने प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष कर्नल सीडी कम्बोज ने 17 नवंबर को पार्टी से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर लिया. अमरिंदर के लिए यह काफी बड़ा झटका है.

यह स्पष्ट नहीं है कि कंबोज को उनकी पार्टी से निकाला गया है या आम आदमी पार्टी ने उन्हें ज्यादा बड़ा ऑफर दिया है. अगर अमरिंदर को पंजाब की कमान दी भी जाती है तो उनके साथ अब उनका सिपहसालार नहीं होगा.

First published: 21 November 2015, 17:33 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

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