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दलितों को लुभाने के लिए अमित शाह की 'लंच' पॉलिटिक्स

महेंद्र प्रताप सिंह | Updated on: 15 August 2016, 10:16 IST

उत्तर प्रदेश में चुनावी आहट के साथ ही शुरू हो चुकी है वोटरों को रिझाने के दांवपेंच. केंद्र में सत्ताधारी भाजपा को इस बार बड़ी उम्मीदें हैं लिहाजा वह विधानसभा चुनाव में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. इसीलिए पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य तक सभी अलग-अलग जातियों के वोटरों को लुभाने की कवायद में जुट गए हैं.

शनिवार को क्रांतिकारियों की कर्मभूमि काकोरी से जहां अमित शाह ने अखिलेश सरकार और बसपा सुप्रीमो मायावती जमकर निशाना साधा. वहीं, उन्होंने मोहनलालगंज से भाजपा के दलित सांसद कौशल किशोर के घर जाकर लंच भी किया. राजनीतिक जानकार इसे आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दलितों और पिछड़ों को भाजपा से जोड़ने के लिए एक कवायद के रूप में देख रहे हैं.

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शनिवार को काकोरी में अमित शाह के आने की काफी हलचल थी. काकोरी में दलित सांसद और उनके समुदाय के लोगों के साथ उन्होंने लंच किया. जाहिर तौर पर लोग इससे खुश थे. भाजपा को उम्मीद है कि दलितों के साथ खानपान की यह रणनीति आगामी चुनाव में वोटों में भी तब्दील होगी. यूपी की राजनीति को देखने-समझने वाले जानकारों के मुताबिक, बीजेपी के लिए बड़ी संख्या में दलित वोटरों को अपने खेमे में लाना काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

पहले भी अमित शाह मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस के जोगियापुर गांव में एक दलित परिवार के साथ भोजन कर चुके हैं

जानकारों की मानें तो यूपी में दलित वोटरों को थोक के भाव बसपा से अलग करना और उन्हें विश्वास में ले पाना काफी कठिन काम है. वह भी ऐसे में जब बसपा 'गुपचुप' तरीके से जनसंपर्क अभियान चला रही है. इसके तहत हर रोज बसपा नेता दलित बस्तियों में जाकर 'मैन टू मैन' प्रचार कर रहे हैं और उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा जा रहा है.

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गौरतलब है कि इससे पहले भी अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र बनारस के जोगियापुर गांव में एक दलित परिवार के साथ भोजन कर चुके हैं. बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने दलित और पिछड़ों को भाजपा से जोड़ने की कवायद की शुरुआत उज्जैन में लगे सिंहस्थ कुंभ में दलित साधुओं के साथ स्नान करके की थी. पीएम नरेंद्र मोदी भी वाराणसी के संत रविदास मंदिर में रैदासियों के संग लंगर करके दलितों को अपना बनाने की कोशिश कर चुके हैं.

केशव-स्वामी के जरिए पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश

प्रदेश की राजनीति में अखिलेश-मुलायम के रूप में दो बड़े ओबीसी नेता मौजूद हैं. इसलिए सरकार गैर यादव ओबीसी जातियों को रिझाने के लिए भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को यूपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है.

यादव, कुर्मी और लोध के बाद मौर्य पिछड़ी बिरादरी में सबसे बड़ा जाति समूह है. यूपी में इनकी आबादी करीब आठ फीसदी है. पार्टी को उम्मीद है कि बची कसर स्वामी प्रसाद मौर्य पूरी कर देंगे. स्वामी प्रसाद मौर्य हाल ही में बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं.

First published: 15 August 2016, 10:16 IST
 
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