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सिंहस्थ कुंभ: दलित संतों के साथ डुबकी लगाएंगे अमित शाह

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2016, 11:01 IST
QUICK PILL
  • मध्य प्रदेश के उज्जैन में 22 अप्रैल को शुरू हुए सिंहस्थ कुंभ का 21 मई को समापन हो जाएगा. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह 11 मई को दलित संतों के साथ स्नान करेंगे.
  • बीजेपी के इस कदम का शंकराचार्य स्वरूपानंद ने विरोध किया है. स्वरूपानंद ने इसे समाज को बांटने की साजिश बताते हुए भेदभाव पैदा करने वाला फैसला बताया है.

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 11 मई को सिंहस्थ कुंभ में दलित धर्मगुरुओं के साथ उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान क्षिप्रा नदी में शाही स्नान करेंगे और साथ ही दलित संतों के साथ भोजन भी करेंगे.

मध्य प्रदेश बीजेपी ने 11 मई को शंकराचार्य की जयंती के अवसर पर उज्जैन में 51 दलित धर्मगुरुओं के साथ पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को बुलाया है.

शंकराचार्य स्वरूपानंद का निशाना


वहीं दूसरी ओर बीजेपी की इस योजना को शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने समाज को बांटने की साजिश बताया है. 

बीजेपी के इस कदम को द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने अनैतिक बताया है. स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक गोलवलकर की पद्धति को कैसे दूर कर सकते हैं.

स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि किसने दलितों को क्षिप्रा में स्नान करने से रोका है. सब बिना भेदभाव के स्नान करें. आखिर यह भेदभाव बीजेपी क्यों पैदा कर रही है.

11 मई को क्षिप्रा में डुबकी


बीजेपी अध्यक्ष अमि्त शाह के कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता डॉक्टर हितेश बाजपेई ने बताया कि 11 मई को अमित शाह दलितों के वाल्मीकि धाम से लेकर क्षिप्रा के घाट तक शोभा यात्रा निकालेंगे.

साथ ही बाजपेई ने बताया कि दलित धर्मगुरु और संतों के साथ कुंभ स्नान और सहभोज करेंगे. सिंहस्थ कुंभ में बीजेपी अध्यक्ष के इस कार्यक्रम को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. 

दलित वोट बैंक पर नजर !


सियासी जानकारों के मुताबिक बीजेपी रोहित वेमुला की घटना को देखते हुए ये कदम उठा रही है. बीजेपी को इस बात का डर है कि कहीं दलित वोट बैंक उनके विरोधी खेमे में न चला जाए.

इससे पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 14 अप्रैल को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन पर महू गए थे.

इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री मोदी अंबेडकर के जन्म स्थल पर जाने वाले देश के पहले प्रधानमंत्री हैं.

इसके एक महीने के भीतर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उज्जैन में दलित धर्मगुरुओं के साथ क्षिप्रा में स्नान करके यह संदेश देना चाहते हैं कि बीजेपी भी दलितों के उतनी ही करीब है, जितनी दूसरी पार्टियां.

First published: 5 May 2016, 11:01 IST
 
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