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एमनेस्टी इंटरनेशनल: भारत धार्मिक हिंसा रोकने में नाकाम रहा है

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 February 2016, 17:22 IST

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आज जारी अपने एक रिपोर्ट में बताया है कि भारत सरकार धार्मिक हिंसा को रोकने में नाकाम सिद्ध हुई है.

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ने साल 2015-16 के लिए जारी अपनी रिपोर्ट में पूरे विश्वभर में हो रहे स्वतंत्रता और आस्था के अधिकारों के हनन और कई सरकारों के द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून को तोडऩे के खिलाफ चेतावनी जारी की है.

एमनेस्टी की इस रिपोर्ट में भारत की परिस्थितियों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा गया है कि भारत में कितने ही कलाकारों, लेखकों और वैज्ञानिकों ने यहां तेजी से बढ़ते असहिष्णुता के विरोध में राष्ट्रीय पुरस्कार वापस लौटा दिए है.

सरकारी नीतियों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने वाले नागरिक समाज संगठनों पर प्रशासन ने कार्रवाई की और विदेश से मिलने वाले धन पर प्रतिबंध लगा दिया. भारत में धार्मिक तनाव बढ़ गया है. लिंग और जाति आधारित भेदभाव और हिंसा ने पूरे देश पर व्यापक असर डाला है.

सरकारी सेंसरशिप और कटटरपंथी हिंदू संगठनों की ओर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले में वृद्धि हुई है. इस मामले में एमनेस्टी इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने बताया कि हमने साल 2015 में देश में मानवाधिकारों पर कई भयंकर आघात देखे हैं.

सरकार ने नागरिक समाज संगठनों पर प्रतिबंधों को और कठोर कर दिया है. पटेल ने आगे यह भी कह कि भारत में अच्छी बात यह है कि यहां जितना अधिकारों का हनन हो रहा है, उतना ही इसका विरोध भी हो रहा है.

धार्मिक असहिष्णुता पर फैला रोष, अभिव्यक्ति की आजादी के खिलाफ दमनकारी कानून को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा खारिज किया जाना, भूमि अधिग्रहण कानून के अतार्किक सुधारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन, इन सभी घटनाओं से यह लगता है कि साल 2016 भारत में मानवाधिकारों के लिए एक बेहतर वर्ष हो सकता है.

First published: 24 February 2016, 17:22 IST
 
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