Home » इंडिया » AMU is much safer than other universities, Najeeb's mother told him prior to admission
 

नजीब की मां, 'अलीगढ़ सेफ़ है, यहीं रुक जाओ'

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 October 2016, 19:36 IST
(मुहम्मद सारिम, एएमयू )
QUICK PILL
  • 15 अक्टूबर के गायब जेएनयू छात्र नजीब अहमद के बारे में पुलिस अभी तक कोई सुराग नहीं लगा सकी है. 
  • जेएनयू और एएमयू की स्टूडेंट यूनियनों ने नजीब को ढूंढने के लिए प्रदर्शनों का दौर तेज़ कर दिया है. 

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ के नुमाइंदों ने दिल्ली में लापता स्टूडेंट नजीब अहमद की मां से मुलाक़ात की है. वापस अलीगढ़ लौटने पर यूनियन के सचिव नबील उस्मानी ने छात्रों को बताया कि नजीब की मां ने उन्हें जेएनयू में दाख़िला लेने से मना किया था. मगर बेहतर पढ़ाई की उम्मीद में वह कुछ दिन पहले ही जेएनयू पहुंचे और अब 7 दिन से लापता हैं. 

नजीब की मां ने सचिव नबील उस्मानी से कहा, 'उसका एडमिशन अलीगढ़, जामिया और जेएनयू, तीनों यूनिवर्सिटी में हो गया था. मैंने उससे कहा था कि अलीगढ़ और जामिया सेफ़ है, जेएनयू की तरफ़ मत जाओ'. नजीब ने बैचलर ऑफ साइंस की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की थी. 

नजीब को ढूंढने की कार्रवाई में तेज़ी लाने की मांग लेकर एएमयू स्टूडेंट यूनियन ने जुमे की नमाज़ के बाद यूनिवर्सिटी की जामा मस्जिद से लेकर बाब-ए-सय्यद दरवाज़े तक एक मार्च निकाला. यहां नबील उस्मानी ने कहा, 'जेएनयू हमेशा उस यूनिवर्सिटी के रूप में जानी जाती थी, जहां मज़हब या ज़ात के आधार पर भेदभाव नहीं होता है मगर अब वहां का कैंपस भी सुरक्षित नहीं रहा. नजीब की मां बात-बात पर रोती हैं.

उस्मानी ने यह भी कहा कि 'अलीगढ़ और जेएनयू की स्टूडेंट यूनियनों ने एक-दूसरे का साथ हमेशा दिया है. नजीब और उनके घरवालों के लिए इंसाफ़ की लड़ाई भी हम मिलकर लड़ रहे हैं'. यूनियन के प्रेज़िडेंट फ़ैज़ुल हसन और अब्दुल्लाह विमेंस कॉलेज यूनियन की प्रेज़िडेंट नगमा शरीफ़ ने भी इंसाफ़ की मुहिम तेज़ करने का भरोसा दिलाया है.  

मार्च में शामिल स्टूडेंट नवेद अशरफ़ी ने कहा कि जातिय उत्पीड़न की वजह से रोहित वेमुला की हैदराबाद यूनिवर्सिटी में फांसी लगा ली थी. उसी तरह मज़हबी पहचान के नाते नजीब के साथ मारपीट हुई जोकि अब लापता हैं. यूनिवर्सिटी कैंपसों में इस तरह के ख़तरे लगातार बढ़ रहे हैं.  

वहीं दिल्ली में नजीब की बड़ी बहन ने जेएनयू के प्रशासनिक भवन पर छात्रों को संबोधित किया है. उन्होंने कहा, 'बात मेरे भाई की जान की नहीं है. आप में से कोई भी गायब हो सकता है. किसी के भी साथ ऐसा हो सकता है. बात मुसलमान की नहीं, बात एक बच्चे की है'.

शुक्रवार को जेएनयू छात्र संघ ने भी गृह मंत्री राजनाथ सिंह के घर की तरफ़ मार्च किया लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर संसद मार्ग थाने चली गई. 

First published: 21 October 2016, 19:36 IST
 
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