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एक ऑनलाइन लॉटरी घोटाला जो एनसीपी की मुसीबतें और बढ़ा सकता है

अश्विन अघोर | Updated on: 16 June 2016, 22:36 IST
QUICK PILL
  • इस बार आरोप लगे हैं पूर्व वित्तमंत्री जयंत पाटिल पर, जिन्हें पार्टी में साफ-सुथरी छवि वाला नेता माना जाता है. विभिन्न घोटालों में अपने कई बड़े नेताओं की संभावित गिरफ्तारी का सामना कर रही एनसीपी इस खुलासे के बाद शायद दूसरी पंक्ति का एक और नेता खो बैठेगी.
  • मामले की जानकारी मांगने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी आनंद कुलकर्णी का आरोप है कि तत्कालीन वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को हो रहे भारी वित्तीय घाटे के प्रति अपनी आंखें बंद कर ली थीं.

अपनी पार्टी के दूसरी पंक्ति के लगभग सभी नेताओं पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों और संभावित गिरफ्तारी का सामना कर रही राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को एक और बड़ा झटका लगा है.

सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी में खुलासा हुआ है कि कई करोड़ के एक ऑनलाइन लॉटरी घोटाले में एनसीपी का एक नेता शामिल है. इस रहस्योद्घाटन के साथ ही आने वाले दिनों में पार्टी की मुसीबत और बढ़ने की संभावना है.

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इस बार आरोप लगे हैं पूर्व वित्तमंत्री जयंत पाटिल पर, जिन्हें पार्टी में साफ-सुथरी छवि वाला नेता माना जाता है.

विभिन्न घोटालों में अपने कई बड़े नेताओं की संभावित गिरफ्तारी का सामना कर रही एनसीपी इस खुलासे के बाद शायद दूसरी पंक्ति का एक और नेता खो बैठेगी.

बढ़ती परेशानी

एनसीपी तब से गंभीर संकट का सामना कर रही है जबसे छगन भुजबल और उनके भतीजे को काले धन को वैध करने (मनी लॉन्ड्रिंग) के आरोप में गिरफ्तार किया गया. यह पार्टी के लिए पहला बड़ा झटका था और यह अभी तक सदमे से उबरने नहीं पाई है.

पार्टी के अजीत पवार और सुनील ठाकरे जैसे प्रमुख नेताओं पर करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले में पहले से ही गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. दूसरी पंक्ति के लगभग सभी नेता किसी न किसी मामले में गिरफ्तारी का डर मोल लिए बैठे हैं.

महाराष्ट्र को 2001 से 2009 तक प्रति वर्ष लगभग 30,000 करोड़ रुपये के वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ा था

यह मामला तब प्रकाश में आया जब पूर्व नौकरशाह आनंद कुलकर्णी ने आरटीआई के तहत राज्य के स्वामित्व वाली एक ऑनलाइन लॉटरी के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी.

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आरटीआई के तहत उन्हें मिली जानकारी से खुलासा हुआ कि महाराष्ट्र को 2001 से 2009 तक प्रति वर्ष लगभग 30,000 करोड़ रुपये के वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ा था.

इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि इस घोटाले का पता लगाने वाले अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक ही नहीं किया गया. तर्क दिया गया कि यह गोपनीय है.

पूरा घोटाला क्या था?

मामले की जानकारी मांगने वाले पूर्व आईएएस अधिकारी आनंद कुलकर्णी का आरोप है कि तत्कालीन वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने अनियमितताओं के कारण सरकारी खजाने को हो रहे भारी वित्तीय घाटे के प्रति अपनी आंखें बंद कर ली थीं.

कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि आरटीआई के तहत प्राप्त जांच रिपोर्ट के घोटाले का पूरा ब्यौरा दिया गया है. उनके अनुसार यदि समय रहते सरकार कदम उठाती तो न सिर्फ खजाने को हुए भारी नुकसान को रोका जा सकता था, बल्कि अपराधियों को गिरफ्तार भी किया जा सकता था.

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार ने राज्य के स्वामित्व वाली एक ऑनलाइन लॉटरी संचालित करने के लिए निविदाएं आमंत्रित की थीं. निविदा सिर्फ एक कंपनी की ओर से भरी गई और वह थी चेन्नई की मेसर्स मार्टिन लॉटरी एजेंसीज लिमिटेड.

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दो बार समय सीमा में विस्तार के बाद भी जब किसी अन्य संस्था ने इसमें रुचि नहीं दिखाई तो इसका ठेका मेसर्स मार्टिन लॉटरी एजेंसीज लिमिटेड को दे दिया गया.

कुलकर्णी कहते हैं, 'हालांकि दावा है कि यह दो अंकों की लॉटरी है, लेकिन वास्तव में यह एक अंक वाली ही लॉटरी है जो लॉटरी अधिनियम 1998 का उल्लंघन है. जब इस अवैध कारोबार का पता चला तो एक सचेत नागरिक नानासाहेब कुटे ने राज्य सरकार के पास शिकायत दर्ज कराई और इस मामले की जांच की मांग की. मामला राज्य विधानसभा के विभिन्न सत्रों में भी उठा, जिसके बाद तत्कालीन गृह मंत्री स्वर्गीय आरआर पाटिल ने जांच के आदेश दे दिए."

आदेश के अनुसार, एसीबी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसपीएस यादव ने पूरे मामले की जांच की और 2007 में गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंप दी.

क्या कहती है रिपोर्ट

रिपोर्ट कहती है कि यह अनिवार्य है कि महाराष्ट्र की ऑनलाइन लॉटरी चलाने वाले ठेकेदार का सर्वर महाराष्ट्र में ही हो, लेकिन मेसर्स मार्टिन लॉटरी एजेंसीज लिमिटेड का सर्वर तमिलनाडु में था. कुलकर्णी ने कहा, "लॉटरी निदेशालय के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर ठेकेदार ने महाराष्ट्र सरकार के नियमों से छेड़छाड़ की, जिसके कारण सरकार को भारी वित्तीय घाटे का सामना करना पड़ा."

कुलकर्णी ने आरोप लगाया है कि जयंत पाटिल को अनियमितताओं के बारे में पता था

उन्होंने कहा कि लॉटरी के ड्रा भी तमिलनाडु में स्थित सर्वर से ही निकाले जाते थे. कुलकर्णी ने आरोप लगाया है कि जयंत पाटिल को अनियमितताओं के बारे में पता था, लेकिन एसीबी द्वारा दी गई जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने की बजाय उन्होंने आंखें मूंद लीं.

कुलकर्णी ने अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के पास एक शिकायत दर्ज की है और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

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एसपीएस यादव द्वारा जमा की गई जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लॉटरी निदेशालय में तैनात वरिष्ठ नौकरशाहों ने अपनी दफ्तरी शक्तियों का जमकर दुरुपयोग करते हुए घोटाले की छूट दी, जिसके कारण महाराष्ट्र को प्रति वर्ष 30,000 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा सहना पड़ा.

इस बीच, जयंत पाटिल ने ऑनलाइन लॉटरी घोटाले पर एक स्पष्टीकरण जारी किया है और इस बात से इनकार किया है कि ऑनलाइन लॉटरी का ठेका देने में कोई अनियमितता बरती गई थी.

First published: 16 June 2016, 22:36 IST
 
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