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बसपा के बड़े ब्राह्मण नेता ब्रजेश पाठक ने छोड़ी पार्टी, बीजेपी में हुए शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 August 2016, 17:03 IST
(फेसबुक)

बसपा सुप्रीमो मायावती को स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी के बाद अब तीसरा बड़ा झटका लगा है. सतीश चंद्र मिश्र के बाद पार्टी में दूसरा बड़ा ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले ब्रजेश पाठक ने बसपा छोड़ दी है. आगरा में रविवार को ही हुई मायावती की रैली के ब्रजेश पाठक संयोजक थे.

बाहुबली छवि वाले पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक उन्नाव इलाके से आते हैं. उन्नाव से वो बसपा के लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं. दिल्ली में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में ब्रजेश पाठक ने सोमवार को ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए बसपा को बड़ा झटका दिया है. 

हालांकि इसके कयास पहले से लगाए जा रहे थे, लेकिन अचानक ही उनका भाजपा की सदस्यता ग्रहण करना उत्तर प्रदेश के चुनावी परिदृश्य में नए समीकरणों के संकेत जरूर दे रहा है. इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य ने भी दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की थी. वहीं छह विपक्षी विधायक लखनऊ में भाजपा में शामिल हुए थे. 

अमित शाह की मौजूदगी में शामिल

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने इस दौरान कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश भाजपामय हो रहा है. इसी का नतीजा है कि एक-एक करके दूसरी पार्टियों के नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं.

अरुण सिंह ने ब्रजेश पाठक को पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए कहा कि यूपी में भाजपा दो तिहाई बहुमत से विधानसभा चुनाव जीतने वाली है. इस दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री और नोएडा से बीजेपी सांसद महेश शर्मा भी मौजूद रहे.

'गांव-गांव जाकर करूंगा प्रचार'

वहीं भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ब्रजेश पाठक ने कहा, "गांव-गांव घर-घर जाकर 2017 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए प्रयत्न करूंगा."

ब्रजेश पाठक ने कहा, "पीएम मोदी की नीतियों और नेतृत्व से ही देश और प्रदेश का भला होगा. बाकी पार्टियों में भाई-भतीजावाद होता है." अचानक बसपा छोड़ने के सवाल पर ब्रजेश पाठक ने कहा कि जब तक जहां रहते हैं, पूरी तरह से तन-मन के साथ रहते हैं.

केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने कहा, "बहुजन समाज पार्टी का जहाज डूब रहा है. किस तरह से पार्टी को लोग छोड़-छोड़कर आ रहे हैं, वो आपके सामने है."

यूपी में इससे पहले स्वामी प्रसाद मौर्य और आरके चौधरी ने बसपा अध्यक्ष मायावती पर टिकटों की बिक्री का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी थी.

ब्रजेश पाठक को सतीश चंद्र मिश्र के बाद बसपा में दूसरा बड़ा ब्राह्मण चेहरा माना जाता है. (फाइल फोटो)

कौन हैं ब्रजेश पाठक?

ब्रजेश पाठक की छवि बाहुबली नेता की रही है. मूल रूप से हरदोई के रहने वाले ब्रजेश पाठक 2004 में उन्नाव लोकसभा सीट से बसपा के सांसद रह चुके हैं. इसके अलावा वह बसपा से राज्यसभा के भी सदस्य रह चुके हैं.

जिस समय उन्होंने चुनाव जीता था, उस समय दिए गए हलफनामे में उन्होंने स्वीकार किया था कि उनके ऊपर अपहरण जैसे कई मुकदमे दर्ज थे. हलाकि किसी भी मामले में उन्हें तब तक सजा नहीं दी गई थी. वहीं दशक भर पहले ही उनकी डेढ़ करोड़ से अधिक की संपत्ति घोषित हुई थी.

छात्र राजनीति से सक्रिय

लखनऊ विश्विद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल करने वाले ब्रजेश पाठक छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं. वह लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

हालांकि ब्रजेश पाठक की आपराधिक छवि को लेकर सवाल उठते रहे हैं. भाजपा के भीतर भी कुछ लोग इस तरह की छवि के लोगों को पार्टी में शामिल करने से नाराज बताये जाते हैं. लेकिन फिलहाल तो भाजपा अपने साथ इन नेताओं को जोड़कर मिशन 2017 की तैयारी में लगी है.

रविवार को मायावती की आगरा रैली के संयोजक ब्रजेश पाठक की ब्राह्मण सम्मेलनों में मुख्य भूमिका रही है. (फेसबुक)
First published: 22 August 2016, 17:03 IST
 
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