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डूब गया बीजेपी के साउथ का सितारा, 4 साल में PM मोदी ने खोया तीसरा बड़ा सहयोगी

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 November 2018, 9:50 IST
(File Photo)

भारतीय जनता पार्टी के साउथ के स्टार और केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार का 59 साल की उम्र में निधन हो गया. फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे अनंत कुमार ने बेंगलुरु में आखिरी सांस ली. अनंत कुमार के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने एक बड़ा ही महत्पूर्ण राजनेता खो दिया. अनंत कुमार के निधन के साथ ही पीएम मोदी ने अपना तीसरा सबसे बड़ा सहयोगी खो दिया. दक्षिण के ये नेता उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तर और मध्य भारत के कई राज्यों की राजनीति में बीजेपी की और से बहुत ही सक्रीय और लोकप्रिय नेता के रूप में जाने जाते थे.

अनंत कुमार ने अपना सियासी सफर अस्सी के दशक में शुरू किया था जिस समय बीजेपी का गठन हुआ था. अनंत कुमार ने बैंगलोर दक्षिण से लगातार 6 बार सांसद चुनाव जीत हासिल की है. इसके बाद उन्हें मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री का पद भार सौंपा गया था. इससे पहले अनंत कुमार ने अटल सरकार में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी उठाई थी. अनंत कुमार को बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं, अटल बिहारी वाजपेई के साथ ही एलके आडवाणी के सबसे करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है.

अनंत कुमार ने दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में बीजेपी की राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने में अति महत्वपूर्ण योगदान दिया था. वाजपेई सरकार के समय वह कैबिनेट के सबसे युवा सदस्य थे. अनंत कुमार से पहले मोदी सरकार के 2 और मंत्रियों का असामयिक निधन हुआ था.

पीएम मोदी ने अपने साढ़े चार साल के कार्यकाल में अनंत कुमार समेत बीजेपी के कद्दावर नेताओं को खो दिया. इसके पहले बीजेपी के प्रभावशाली नेता गोपीनाथ मुंडे का 3 जून 2014 को एक सड़क हादसे में निधन हो गया था. मोदी सरकार में वह ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री थे. भारतीय राजनीति के इतिहास में वह सबसे कम वक्त तक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे. इसका कारण उनकी आसामयिक मृत्यु थी.

इसके बाद पिछले साल मई में अनिल माधव दवे का असामयिक निधन हो गया था. मोदी सरकार में पर्यावरण मंत्री के पद को संभाल रहे थे. दवे की पहचान पर्यावरण के लिए लड़ने वाले एक जुझारू योद्धा के रूप में रही है. ये कहना गलत नहीं होगा कि उनका पूरा जीवन नर्मदा नदी की सेवा करने और पर्यावरण को बचाने में समर्पित रहा.

 

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी फैसले के विरोध में काटी जेल

बेंगलुरू से आए अनंत कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से प्रभावित थे, वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(ABVP) की स्टूडेंट विंग के सदस्य भी रहे थे. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी सरकार में आपातकाल का विरोध करने की वजह से वह हजारों अन्य छात्र कार्यकर्ताओं के साथ जेल में सजा भी काट चुके हैं. लेकिन इमरजेंसी खत्म होने के बाद राज्य में उनका राजनैतिक प्रभाव बहुत तेजी से बढ़ा.

इसके बाद उन्हें एबीवीपी के राज्य सचिव का पदभार सौंपा गया और 1985 में उन्हें राष्ट्रीय सचिव बन दिया गया. इसके बाद अनंत कुमार ने बीजेपी ज्वाइन की और उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा के राज्य अध्यक्ष के रूप में नॉमिनेट भी किया गया. साल 1996 में अनंत कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव का पदभार संभाला. गौरतलब है कि कैंसर से पीड़ित अनंत कुमार पिछले कुछ दिनों से वेंटिलेटर पर थे. बीजेपी के इस दिग्गज नेता के नाम बेंगलूरु साउथ से लगातार 6 बार जीत हासिल करने का रिकॉर्ड है.

First published: 12 November 2018, 9:50 IST
 
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