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विशाखापत्तनम में है दुनिया का सबसे उम्रदराज वोटर, 352 साल से डाल रहा है वोट

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 November 2018, 13:19 IST
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

दुनिया का सबसे उम्रदराज व्यक्ति भारत में मौजूद है. जी हां! देश के सरकारी आंकड़ों में एक ऐसा भी व्यक्ति मौजूद है जिसकी उम्र 352 साल है. दरअसल ये व्यक्ति केवल सरकारी आंकड़ों में ही जिंदा है. यह बड़ी गड़बड़ी विशाखापत्तनम जिले की वोटर लिस्ट में पाई गई है. जहां पर एक 352 साल के व्यक्ति का नाम आज भी वोटर लिस्ट में है. इतना ही नहीं इस अगर सरकार के वोटिंग के आंकड़ों की मानें तो ये व्यक्ति पिछले कई साल से लगातार वोट भी डालता आ रहा है.

दरअसल आईआईएम बेंगलुरु के पूर्व छात्र और सॉफ्टवेयर इंजिनियर थुम्माला लोकेश्वर रेड्डी की टीम ने वोटर लिस्ट में इस तरह की कई गड़बड़ियां पकड़ी हैं. उन्होंने मतदाता सूची के अध्ययन में पाया कि कम से कम 15 फीसदी वोटर्स ऐसे हैं जो सही नहीं है यानी अवैध या ड्यूप्लिकेट हैं.

वोटर लिस्ट के एक अध्यन में पता चला है कि राज्य के विशाखापत्तनम जिले की वोटर लिस्ट में 352 साल का यह शख्स जीवित है. स्टडी में यहां के निर्वाचन दस्तावेजों की बड़ी गड़बड़ियां सामने आई है. चौकाने वाली बात ये है कि यह सिर्फ अकेला ऐसा केस नहीं है बल्कि ऐसे हजारों केस आईआईएम बेंगलुरु के पूर्व छात्र और सॉफ्टवेयर इंजिनियर थुम्माला लोकेश्वर रेड्डी की टीम ने पकड़े हैं. मतदाता लिस्ट में एक ही वोटर का नाम बार-बार दर्ज है. 15 फीसदी काफी बड़ी संख्या है जो कि किसी भी चुनाव में जीत-हार में अहम रोल निभाती है. लोकेश्वर ने बताया कि आंध्र प्रदेश में 3.2 करोड़ मतदाता पंजीकृत हैं, स्टडी के दौरान इनमें से 52.67 लाख वोटर्स उन्होंने फर्जी पाए.

अध्ययन में ये भी पाया गया कि 25 लाख वोटरों के नाम, पिता और पति का नाम सही है लेकिन बाकी की दूसरी डीटेल सही नहीं हैं. वहीं रिसर्च में यह भी खुलासा हुआ है किहजारों मतदाताओं के पास दो वोटर आईडी कार्ड और गलत पते वाले आईडी कार्ड हैं. इतना ही नहीं कई वोटर ऐसे भी हैं जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश दोनों राज्यों के वोटर आईडी कार्ड रखते हैं.

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टीम ने ये भी पाया कि हजारों वोटर्स ऐसे हैं जिनकी उम्र 100 साल से ऊपर है. इतना ही नहीं हजारों वोटर्स 18 साल से कम उम्र के पाए गए. चुनाव आयोग की वेबसाइट में तो नेल्लोर शहर के एक वोटर का नाम ऐसा पड़ा था जिसकी उम्र सिर्फ एक साल की दर्शायी गई है.

लोकेश्वर की मानें तो उन्होंने इस डाटा के विश्लेषण में पंद्रह साल लगा दिए हैं. इसमें उन्होंने कैलिफोर्निया और यूके के आईटी प्रफेशनल्स के मदद भी ली. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की यह जिम्मेदारी है कि इस तरह की गड़बड़ियों को सुधारे. अब इतने बड़े खुलासे के बाद चुनाव आयोग क्या फैसला करेगा ये देखना बाकि है.

First published: 14 November 2018, 13:13 IST
 
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