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बलात्कार, फर्जी मुठभेड़ और हत्या: छत्तीसगढ़ में नए सिरे से पुरानी कहानी

राजकुमार सोनी | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

इस खबर को पढ़ रहे पाठक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इसकी तस्वीर को कई-कई बार ध्यान से देखें. जो दिख रहा है उसमें यह साफ है कि एक युवती के शरीर पर उस रंग की वेशभूषा हैं जिसका इस्तेमाल सामान्य तौर पर माओवादी करते हैं. पुलिस का दावा है कि मृत युवती माओवादी है और एक खतरनाक मुठभेड़ के बाद उसे मार गिराया गया है. पुलिस के मुताबिक यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़ में बस्तर के उस इलाके में हुई है जहां बतौर आईजी पुलिस शिवराम कल्लूरी पदस्थ है.

यह बताने की जरूरत नहीं है कि पूरे बस्तर इलाके में इन दिनों माओवादियों के समर्पण या मुठभेड़ की बाढ़ आई हुई है.

सुकमा जिले के पुलिस अधीक्षक ईके एलेसेना का कहना है कि इसी महीने 13 जून को जब सुरक्षाबलों के जवान सर्चिंग के लिए निकले थे तब सुबह नौ बजे के आसपास दंतेवाड़ा से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर गोमपाड़ और गोरवा के बीच घात लगाकर बैठे माओवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी. माओवादियों की संख्या 25 से 30 के आसपास रही होगी. सुरक्षाबलों की जवाबी फायरिंग के बाद वे जंगल की ओर भाग खड़े हुए और एक महिला माओवादी जिसका नाम मडकम हिड़मे है वह मारी गई.

इस घटना के चंद घंटों बाद ही युवती की वह तस्वीर भी सोशल मीडिया में जारी हो गई जिसे लेकर कई तरह की बातें उठ रही है. सूत्रों का कहना है कि युवती की तस्वीर को जारी करने का काम पुलिस ने ही किया है मगर अब पुलिस इससे पल्ला झाड़ रही है.

पल्ला झाड़ने की है कई वजहें

मारी गई युवती की तस्वीर सोशल मीडिया में जारी करने वाले को पुलिस अब तक खोज नहीं पाई है. पुलिस अधीक्षक एलेसेना का कहना है कि जो युवती मारी गई वह हार्डकोर नक्सली रही है और उसके पिता मड़काम देवा भी माओवादी गतिविधियों में लिप्त रहे हैं.

लेकिन मृत महिला नक्सली की फोटो ही कई तरह के सवाल खड़ा करती है. पुलिस के पास इस बात का जवाब नहीं है कि युवती के शरीर पर एकदम नई वर्दी कैसे है? ऐसी वर्दी जिसकी धारियां तक भयंकर मुठभेड़ के बाद सही सलामत हैं. युवती के शरीर पर वर्दी इतनी बड़ी और ढीली हो गई है कि उसे नीचे से मोड़कर पहनाया गया है. बेसाइज की वर्दी एक खुंखार नक्सली क्यों पहनेगा? एक नई क्रीज वाली वर्दी के साथ माओवादी हिड़मे ने बेल्ट नहीं पहनी और वह चप्पल पहनकर मुठभेड़ करती रही.

उसकी बंदूक भी मुठभेड़ पर सवालिया निशान लगाती है. सुरक्षाबलों से उसकी मुठभेड़ उस बंदूक से होती रही जिसे भरमार बंदूक कहते हैं. यानी देशी बंदूक. पुलिस अधीक्षक एलेसेना का दावा है कि युवती को तीन से पांच गोली लगने के बाद मौत के घाट उतारा जा सका है. जबकि सोशल मीडिया में खबर वायरल हुई थी कि उसे 20 गोली मारी गई.

अगर पुलिस अधीक्षक के दावे को सच भी मान लें तो पांच गोलियों के इस्तेमाल के बाद भी वर्दी में एक भी छेद दिखाई नहीं देता है. इस तस्वीर के साथ यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि कहीं युवती को गोली मारने के बाद तो वर्दी नहीं पहनाई गई?

गांव को बना दिया छावनी

घटना के बाद गांव के कुछ लोगों ने आदिवासी नेत्री सोनी सोरी के भतीजे लिंगा कोडपी से संपर्क किया तो पता चला कि सुरक्षाबलों ने कथित तौर पर युवती को 12 जून को ही गोमपाड़ गांव से अगवा कर लिया था. ग्रामीणों ने लिंगा को जो बताया उसके मुताबिक युवती की शादी होने वाली थी और वह अपने घर के सामने धान कूट रही थी.

ग्रामीणों के मुताबिक उसी दौरान गश्त पर निकले सुरक्षाबल उसे अपने साथ उठा ले गए. ग्रामीणों का आरोप है कि युवती के साथ अनाचार के बाद उसकी हत्या कर दी गई और अपना कृत्य छिपाने के लिए माओवादी वर्दी पहना दी गई. घटना के बाद पुलिस ने गांव तक जाने वाले सभी रास्तों पर पहरेदारी बढ़ा दी है ताकि सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के लोग वहां पहुंच ही न सकें.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनी सोरी ने अपने कुछ साथियों के साथ कोशिश की तो शुक्रवार को उनके साथ कुछ लोगों ने धक्का-मुक्की की. सोरी का आरोप है कि जिन लोगों ने उन्हें गांव जाने से रोकने के लिए तमाशा किया वे सभी पुलिस से मिले हुए हैं और कुछ तो पुलिसवाले ही है जो सादी वर्दी में ग्रामीण बनकर आए थे.

याचिका दायर

फिलहाल यह साफ नहीं है कि युवती के शव को जला दिया गया अथवा उसे दफनाया गया है. आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक संकेत ठाकुर ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर शव का पोस्टमार्टम कराने की मांग की है. ठाकुर का कहना है इस पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन भी होना चाहिए.

First published: 18 June 2016, 1:42 IST
 
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