Home » इंडिया » Anti-defamation law: not modi even Rajiv Gandhi did not was forced to
 

मोदी सरकार ही नहीं तब राजीव गांधी भी मीडिया को नहीं कर पाए थे कैद

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 April 2018, 18:55 IST

यह 1988 के सितंबर की एक निराशाजनक दोपहर थी. प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 7 रेस कोर्स रोड पर अचानक एक आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई. सभी कांग्रेस सदस्य इस बैठक को बुलाने के कारण  से अनजान थे. बैठक में प्रधानमंत्री गांधी ने जो कहा उसे सुनकर तो सब आश्चर्यचकित थे. गांधी ने अपने सहयोगियों को सूचित किया कि वे कुछ महीने पहले उनकी सरकार द्वारा लोकसभा में पारित बिल को वापस लेने पर विचार कर रहे हैं.

अगले ही कुछ पलों में उन्होंने उस बिल को वापस लेने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर कर दिए. उसमे लिखा गया था "एक स्वतंत्र प्रेस हमारे लोकतंत्र की आंतरि क शक्ति और गतिशीलता का अभिन्न अंग है. एक स्वतंत्र प्रेस के बिना, कोई लोकतंत्र नहीं हो सकता. हमारे स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों ने भारत में प्रेस बनाने में भाग लिया है, और हम इस विरासत को कायम रखना चाहते हैं''.

आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी के सत्ता में लौटने के बाद से यह पहली बार हुआ था जब कांग्रेस के सांसदों ने हिम्मत दिखायी. यह एक ऐतिहासिक क्षण भी था क्योंकि भारतीय गणराज्य के इतिहास में पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ जब लोकसभा में पारित किसी कानून को सार्वजनिक दबाव के कारण वापस लेना पड़ा.

वर्तमान नरेंद्र मोदी सरकार को भी मंगलवार को इसी तरह की स्थिति का सामना करना पड़ा क्योंकि सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने मीडिया के लिए बनाये गए अपने दिशानिर्देश को वापस ले लिया. मंत्रालय इस निर्देश में कहा गया था कि अगर कोई पत्रकार फेक न्यूज़ देते हुए पकड़ा गया तो उसकी मान्यता रद्द हो जाएगी.

ऐसे वक़्त में जब सरकार, प्रेस और जनता प्रेस की आजादी पर और फर्जी खबरों पर बहस कर रही है, तब तीन दशक पहले कांग्रेस सरकार का वह कारनामा भी याद आना लाज़मी है, जब उसने प्रेस को रोकने के प्रयास किए लेकिन अंततः वह असफल रही.

19 87-88 में बोफोर्स केस के वक्त इंडियन एक्सप्रेस सरकार से रोज 10 सवाल करती थी जिसके बाद राजीव गांधी की सरकार मानहानि बिल1988 लेकर आयी. इस बिल के खिलाफ देश भर में विरोध हुआ और मीडिया ने भी एकजुट होकर इसके खिलाफ आवाज उठाई. यहां तक कि सरकार के समर्थक मीडिया घराने भी इस बिल के विरोध में आ गए. अंत में राजीव गांधी को बिल वापस लेना पड़ा.

ये भी पढ़ें : 650 करोड़ गबन करने वाली कंपनी में रेल मंत्री पीयूष गोयल थे चेयरमैन- रिपोर्ट में दावा

First published: 3 April 2018, 18:55 IST
 
अगली कहानी