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एपीजे अब्दुल कलाम: जानिए कैसे अखबार बेचने वाला साधारण मछुआरा बन गया भारत का 'मिसाइल मैन'

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 October 2018, 12:19 IST

भारत के इतिहास में सबसे विलक्षण व्यक्तित्व की यादें 'मिसाइल मैन' के रूप में हमेशा याद की जाएंगी. भारत को 'अग्नि' मिसाइल देने वैज्ञानिक और देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन 15 अक्टूबर को मनाया जाता है. अब्दुल कलाम बतौर वैज्ञानिक और बतौर एक राष्ट्रपति के साथ ही एक विलक्षण व्यक्तित्व और आदर्श विचारधारा के लिए जाने जाते हैं. अब्दुल कलाम की मृत्यु शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते समय ही हुई. लेक्चर देते समय ही उन्हें दिल का दौरा पड़ा और 83 साल की उम्र में 'मिसाइल मैन' इतिहास के सुनहरे पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गए.

एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. उनके पिता एक मछुआरे थे. अब्दुल कलाम के जीवन का सफर बहुत कठिनाओं से भरा हुआ था. शुरूआती दिनों में कलम ने अखबार बेचा और अनवरत संघर्ष के बाद वे देश के महान वैज्ञानिक बने और फिर सबसे बड़े राष्ट्रपति पद को भी शोभायमान किया.

कलाम के जीवन के अनुभवों को उन्होनें लगभग दो दर्जन किताबों में बयान किया है. अब्दुल कलाम देश के सबसे बड़े पद पर होने के बावजूद भी खुद को हमेशा 'लर्नर' कहते थे. उनका व्यक्तित्व उन्हें बाकी लोगों से अलग और महान बनाती है.

अब्दुल कलम के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें:

अब्दुल कलाम का शुरूआती बहुत कठिनाओं से भरा था. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 से 8 बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे. बचपन की अनेक कठिनाइयों से लड़ कर कलाम 1962 में इसरो पहुंचने में कामयाब हो गए.

कलाम के नेतृत्व में ही उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं. 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान भारत परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बना जब वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट किए.

1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया. उसी दौरान अन्ना यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया. कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया. स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई.

 

कलाम के नेतृत्व में ही पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए. इसके बाद 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. इस सफलता के बाद ही अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन के रूप में पूरे देश में ख्याति मिली और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया. अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले ये सम्मान मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया.

First published: 11 October 2018, 12:18 IST
 
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