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एपीजे अब्दुल कलाम: जब देश के इस प्यारे राष्ट्रपति ने लाइव व्याख्यान के दौरान गंवा दी थी अपनी जान

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 July 2019, 13:10 IST

भारत को 'अग्नि' मिसाइल देने वैज्ञानिक और देश के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की आज पुण्यतिथि है. आज के ही दिन 83 साल की उम्र में शिलांग के भारतीय प्रबंध संस्थान में उनका निधन हो गया था. डॉक्टर कलाम वहां व्याख्यान देने गए थे. हालांकि वो अपना व्याख्यान शुरू भी नहीं कर पाए थे और पोडियम के पास गिर पड़े.

अब्दुल कलाम को अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने देश के राष्‍ट्रपति पद के लिए चुना था. रामेश्‍वरम के एक सामान्‍य परिवार में जन्मे कलाम ने राष्‍ट्रपति रहते कई ऐसे फैसले लिए जो बाद में नजीर बने. भारत रत्‍न कलाम का जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के एक धार्मिक मुस्लिम परिवार में हुआ था.

 

कलाम के पिता जैनुलाब्दीन खुद ज्‍यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन अपने प्रतिभावान बेटे को शिक्षित और संस्‍कारवान बनाने में उनका अहम योगदान रहा. कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम था. उनके पिता एक मछुआरे थे. कलाम का जीवन बहुत कठिनाओं से भरा हुआ था. शुरूआती दिनों में उन्होंने अखबार बेचा.

कलाम ने अपने जीवन के अनुभवों को लगभग दो दर्जन किताबों में बयान किया है. देश के सबसे बड़े पद पर होने के बावजूद भी खुद को हमेशा 'लर्नर' कहते थे. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 से 8 बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे. जीवन की अनेक कठिनाइयों से लड़ कर वह साल 1962 में इसरो पहुंचने में कामयाब हुए.

 

उनके नेतृत्व में भारत ने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं. साल 1992 से 1999 तक वह देश के रक्षामंत्री के रक्षा सलाहकार भी थे. इस दौरान भारत परमाणु हथियार संपन्न राष्ट्र बना, तब वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट कर दुनिया को चौंका दिया था.

कलाम के नेतृत्व में भारत ने पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए. उनके नेतृत्व में भारत ने साल 1998 में रूस के साथ मिलकर सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की. इस सफलता के बाद अब्दुल कलाम 'मिसाइल मैन' के रूप में पूरे देश में विख्यात हो गए. 

 

भारत सरकार ने साल 1981 में कलाम को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण फिर 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया. अब्दुल कलाम भारत के राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न पाने वाले देश के तीसरे राष्ट्रपति थे. उनसे पहले ये सम्मान मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया था.

कलाम ऐसे परमाणु वैज्ञानिक थे जो मिसाइल कार्यक्रम के साथ-साथ कविताएं लिखने और वीणा बजाने में भी पारंगत थे. वो गीता को जीवन का मूल मानते थे. राष्‍ट्रपति के तौर पर साल 2007 में उनका कार्यकाल खत्‍म हुआ. पूरा देश उन्‍हें बतौर राष्‍ट्रपति दूसरा कार्यकाल दिए जाने के पक्ष में था, लेकिन सियासी दलों के आपसी मतभेदों के चलते ऐसा नहीं हो सका था. 

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First published: 27 July 2019, 13:10 IST
 
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