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जानिए 10 ट्रेड यूनियनों के 15 करोड़ श्रमिक आज क्यों हैं हड़ताल पर?

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 September 2016, 11:24 IST
(फेसबुक)

देशभर के 10 ट्रेड यूनियनों की हड़ताल आज शुरू हो गई है. दावा है कि इस हड़ताल में मजदूर संगठनों से संबद्ध 15 करोड़ श्रमिक शामिल हो रहे हैं. वहीं हड़ताल से बैंकिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट और टेलीकॉम जैसी जरूरी सेवाओं पर असर पड़ना तय है.

हड़ताल की वजह से बैंक, सरकारी ऑफिस और फैक्‍टरियां बंद हैं. कुछ राज्‍यों में स्‍थानीय संगठनों ने भी हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है. इस वजह से सार्वजनिक परिवहन व्‍यवस्‍था पर भी असर पड़ रहा है.

हड़ताल के दौरान पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के मेयर अशोक भट्टाचार्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. भट्टाचार्या के साथ 15 अन्य प्रदर्शनकारियों को भी गिरफ्तार किया गया है.

हड़ताल क्यों?

आल इंडिया ट्रेड यूनियंस कांग्रेस और सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस जैसे संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की केंद्र सरकार की अपील को ठुकरा दिया था.

इन श्रमिक संगठनों का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है. इन संगठनों की आपत्ति बीमा और रक्षा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश के नियमों में ढील को लेकर भी है.

इसके साथ ही घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने की योजना का भी श्रमिक संगठन विरोध कर रहे हैं.

ट्रेड यूनियनों की हड़ताल को खत्‍म करने के प्रयासों के तहत वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मंगलवार को केंद्रीय कर्मचारियों का पिछले दो साल का संशोधित बोनस जारी करने का एलान किया था.

वहीं अकुशल श्रमिकों के न्‍यूनतम वेतन में इजाफा किया गया है. केंद्र सरकार ने अकुशल क्षेत्र के कामगारों की न्यूनतम मजदूरी को 246 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये कर दिया है. यह बढ़ोतरी करीब 43 फीसदी की है. हालांकि ट्रेड यूनियन इससे संतुष्ट नहीं हैं.

मजदूर संगठनों की प्रमुख मांगें

1. 12 मांगों के प्रति उदासीनता की वजह से ट्रेड यूनियन हड़ताल.

2. न्यूनतम मासिक वेतन 18000 रुपये करने की मांग.

3. न्यूनतम मासिक पेंशन 3000 रुपये करने की मांग.

4. बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में छूट पर आपत्ति.

5. रक्षा क्षेत्र में भी एफडीआई की सीमा बढ़ाने का विरोध.

6. घाटे में चल रहे सार्वजनिक उपक्रमों को बंद करने के खिलाफ.

7. पेंशन फंड-स्टॉक मार्केट में ज्यादा पैसा लगाने के सरकार के निर्देश का विरोध.

8. बैंकों के निजीकरण और विलय के खिलाफ बैंक कर्मचारी यूनियन.

कौन से मजदूर संगठन शामिल?

हड़ताल को मुख्य रूप से लेफ्ट और कांग्रेस के मजदूर संगठन अपना समर्थन दे रहे हैं. कांग्रेस से जुड़े (इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस) इंटक के अलावा ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी) इस देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में है.

वहीं लेफ्ट से जुड़ा सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू) भी इसमें शामिल है. संगठनों ने हड़ताल नहीं करने की मोदी सरकार की ओर से मंगलवार को की गई अपील ठुकरा दिया था. इन संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों को पूरा करने में नाकाम रही है.

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ इस हड़ताल में शामिल नहीं हो रहा है.

मौजूदा वित्‍तीय वर्ष में सरकार ने निजीकरण और कुछ कंपनियों को बंद करके करीब 55,907 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया है. सरकार की ओर से संचालित 77 कंपनियों को घाटा बढ़कर 26,700 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है. ट्रेड यूनियन इस कदम के खिलाफ हैं.

रेडियोलॉजिस्ट और नर्सों की हड़ताल

इस बीच अपने लंबित मुद्दों पर केंद्र सरकार के रवैए के खिलाफ देशभर में रेडियो‍लॉजिस्‍ट भी हड़ताल पर हैं. इससे अल्ट्रासोनोग्राफी और अन्य स्कैन प्रक्रियाएं जैसे रेडियोलॉजी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने का अंदेशा है.

आईआरआईए के अध्यक्ष ओपी बंसल ने कहा, ''सरकार ने हमारी मांगों पर दो-तीन महीने में गौर करने का आश्वासन दिया लेकिन ठोस वादा नहीं किया. लिहाजा हमने अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है.''

देश भर में सरकारी अस्पतालों की लाखों नर्सें भी बेमियादी हड़ताल पर हैं. ये नर्सें ऐसे समय में हड़ताल पर जा रही हैं जब दिल्ली और कई अन्य शहर डेंगू एवं चिकनगुनिया के बढ़ते मामलों से जूझ रहे हैं. ये नर्सें वेतन और भत्तों से जुड़े मुद्दों का निपटारा चाहती हैं.

आल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के प्रवक्ता लीलाधर रामचंदानी ने कहा, ''हम सरकार के जवाब से खुश नहीं हैं, इसलिए हम शुक्रवार से अपनी प्रस्तावित हड़ताल पर आगे बढ़ने जा रहे हैं. लेकिन हम आपात स्थिति वाले नाजुक मामलों को देखेंगे.''

दिल्ली में केंद्र, दिल्ली सरकार और नगर निकायों द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों में करीब 20,000 नर्सें कार्यरत हैं.

बैंकों के कामकाज पर भी असर

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के छह कर्मचारी संगठनों ने भी केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है. कथित 'श्रम विरोधी नीतियों' के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल की अपील की है. कई बैंकों ने पहले ही अपने ग्राहकों को होने वाली असुविधा के बारे में सूचना दे दी है.

ऑल इंडिया बैंक इंप्लायज एसोसिएशन (एआईबीईए), बैंक इंप्लायज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कान्फेडरेशन (एआईबीओसी) तथा इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस (आईएनबीओसी) जैसे संगठनों ने नोटिस दिए हैं.

वहीं कोल इंडिया के कर्मचारी भी इस हड़ताल में शामिल है. कोयला और ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि पावर प्‍लांटों के संचालन के लिए पर्याप्‍त कोयला है. अगर अगले 50 से 60 दिनों में भी खनन नहीं होता है, तो भी पावर प्‍लांट इससे प्रभावित नहीं होंगे.

First published: 2 September 2016, 11:24 IST
 
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