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MBBS की विदेशी डिग्री पर डॉक्टरों की अवैध प्रैक्टिस का नेटवर्क

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 14 October 2016, 8:28 IST
QUICK PILL
  • देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करने या डॉक्टर बनने के लिए प्रवेश परीक्षा ज़रूरी होती है लेकिन चीन और दक्षिण कोरिया समेत कई देशों में ऐसा नहीं है. 
  • देश में हर साल सिर्फ़ 4500 छात्रों को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल पाता है लेकिन बाहर से डिग्री लाने वाले भारत में होने वाले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्ज़ामिनेशन को पास नहीं कर पाते. 

विदेशों से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए डॉक्टर भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी एमसीआई टैस्ट में फेल क्यों हो जाते हैं? यह सवाल एमबीबीएस के एक स्टूडेंट ने एक वेबसाइट पर पूछा है जो विदेशी यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की डिग्री लेकर भारत में प्रैक्टिस करना चाहता है. 

अगर कोई छात्र विदेशी यूनिवर्सिटी से कोर्स करने के बाद भारत में प्रैक्टिस करना चाहता है तो उसे नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन (एनबीई) का क्लीयरेंस टैस्ट पास करना होता है.

एनबीई के आंकड़ों के मुताबिक 2012-14 के बीच एफएमजीई परीक्षा देने वाले 11825 अभ्यर्थियों ने चीन में एमबीबीएस कोर्स किया लेकिन चीन और यूक्रेन के डिग्रीधारी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (एफएमजीई) पास नहीं कर पाए. 

मेडिकल काउन्सिल ऑफ इंडिया के अनुसार नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन की ओर से लिया जाने वाला एफएमजीई टेस्ट विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर आए डॉक्टरों के लिए जरूरी है, जो भारत में प्रैक्टिस करना चाहते हैं.

26 फ़ीसदी अधिकतम पास हुए

एनबीई के आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच ऐसे टेस्ट में 29968 छात्रों ने भाग लिया लेकिन केवल 3610 ही पास हुए. एनबीई के अधिकारी बताते हैं कि इस टेस्ट में पास होने वाले छात्रों का प्रतिशत कभी 26 प्रतिशत से अधिक नहीं रहा.

2004 में बोर्ड ने परीक्षा के नियमों में थोड़ी ढील दी और छात्रों को एक से अधिक बार परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी लेकिन बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा. 

इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने यूक्रेन और रूस जाते हैं और भारत आकर कानून के दायरे से बाहर रहकर प्रैक्टिस भी करते हैं.

अवैध प्रैक्टिस का गिरोह

केरल के जन स्वास्थ्य कार्यकर्ता के.वी. बाबू कहते हैं, 'इससे पता चलता है कि कम कीमत में एमबीबीएस करवाने वाले इन विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई की गुणवत्ता का स्तर कितना कम है. वे साफ़ कहते हैं फेल होने के बावजूद फर्जी प्रैक्टिस करने वालों की जांच होनी चाहिए और उन्हें इस बात की सजा भी मिलनी चाहिए. 

चीन से एमबीबीएस करके आए एक छात्र ने बताया कि मैंने 2012 में एमबीबीएस पूरा कर लिया था. इसके बाद पांच बार एफएमजीई का टेस्ट दिया. कोचिंग क्लासेज़ में तकरीबन एक लाख रूपए खर्च कर दिए. अब तो घरवाले भी मेरा साथ नहीं दे सकते. क्या यह टेस्ट कुछ आसान नहीं बनाया जा सकता?

एमसीआई ने साफ़ कर दिया है कि उन्हें टेस्ट के सिलेबस और इसके स्ट्रक्चर से कोई सरोकार नहीं है. एमसीआई अध्यक्ष डॉ. जयश्री मेहता ने कहा है कि ये टेस्ट नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन की तरफ़ से होते हैं, इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है. वहीं एनबीई अधिकारियों का कहना है कि प्रैक्टिस के लिए लिया जाने वाला टेस्ट भारत में प्रैक्टिस की आवश्यकताओं के अनुरूप है.

सीट बढ़ाएं, फ़ीस घटाएं

एनबीई के निदेशक ने कहा कि एफएमजी एग्जाम कोई जानबूझ कर कठिन नहीं बनाए गए हैं. जब भारतीय विश्वविद्यालयों से डिग्री करने वाले छात्र ये परीक्षा देते हैं तो 80 प्रतिशत छात्र पहले ही प्रयास में सफल हो जाते हैं.

डॉक्टर बनने का सपना लिए छात्र बहुत से कारणों से विदेशों में पढ़ना चाहते हैं. पहली वजह यह है कि भारत में मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रवेश परीक्षा होती है लेकिन चीन और दक्षिण कोरिया में ऐसा नहीं है. 

दूसरा कारण यह है कि कई बार बाहर से कोर्स करना सस्ता पड़ता है क्योंकि साढ़े पांच लाख अभ्यर्थियों में से केवल 4500 को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिल पाता है.

अगर इन दो मोर्चों पर सरकारें काम करना शुरू कर दें तो छात्र विदेशी डिग्री के फ़ेर में कम पड़ेंगे. साथ ही एनबीई का टेस्ट पास करने वालों का प्रतिशत बढ़ेगा और देश के अलग-अलग हिस्सों में अवैध प्रैक्टिस कर रहे डॉक्टरों की संख्या घटेगी. मगर क्या सरकारी कॉलेजों में सीटें बढ़ेंगी और प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन फ़ीस घटाई जाएगी? मुश्किल लगता है. 

First published: 14 October 2016, 8:28 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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